लिवर का 'साइलेंट किलर' है हेपेटाइटिस, डॉ. एस के सरीन ने शुरुआती लक्षणों पर दी बड़ी चेतावनी
लिवर से जुड़ी बीमारियां आज के समय में एक वैश्विक संकट बनती जा रही हैं, और इनमें सबसे खतरनाक नाम है हेपेटाइटिस (Hepatitis)। देश के बेहद प्रतिष्ठित हेपेटोलॉजिस्ट और इंस्टीट्यूट ऑफ लिवर एंड बिलियरी साइंसेज (ILBS) के निदेशक डॉ. एस के सरीन ने हेपेटाइटिस के शुरुआती लक्षणों को लेकर देश के लोगों को एक बड़ी चेतावनी दी है। डॉ. सरीन के मुताबिक, हेपेटाइटिस एक ऐसा 'साइलेंट किलर' है जिसके शुरुआती लक्षण इतने सामान्य होते हैं कि लोग इन्हें मामूली समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। लेकिन यही लापरवाही आगे चलकर लिवर सिरोसिस (Liver Cirrhosis) या लिवर कैंसर जैसी जानलेवा स्थिति का कारण बन सकती है।
अक्सर नजरअंदाज होने वाले हेपेटाइटिस के 5 शुरुआती लक्षण, जिन्हें पहचानना है जरूरी
डॉ. एस के सरीन ने उन प्रमुख शुरुआती संकेतों (Early Warning Signs) का खुलासा किया है, जो शरीर हेपेटाइटिस वायरस की चपेट में आने पर देता है:
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लगातार कमजोरी और अत्यधिक थकान: बिना किसी भारी काम के भी हर वक्त शरीर में सुस्ती और अत्यधिक थकान महसूस होना इसका सबसे पहला संकेत है, जिसे लोग अक्सर काम का तनाव समझ लेते हैं।
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भूख न लगना और जी मिचलाना: खाने की इच्छा अचानक से बहुत कम हो जाना, भोजन देखते ही उल्टी जैसा मन होना (Nausea) या बदहजमी बने रहना लिवर में सूजन की तरफ इशारा करता है।
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हल्का बुखार और मांसपेशियों में दर्द: हेपेटाइटिस के शुरुआती दौर में फ्लू जैसे लक्षण दिखाई देते हैं, जिसमें शरीर में हल्का बुखार बना रहता है और जोड़ों व मांसपेशियों में लगातार दर्द होता है।
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यूरिन का रंग गहरा (डार्क) होना: यदि आपके टॉयलेट (पेशाब) का रंग सामान्य से ज्यादा गहरा पीला या मटमैला दिख रहा है, तो यह लिवर में बिलीरुबिन की मात्रा बढ़ने का साफ संकेत है।
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पेट के ऊपरी हिस्से में दर्द या भारीपन: पेट के दाहिनी ओर, जहां लिवर स्थित होता है, वहां हल्का दर्द, भारीपन या असहजता महसूस होना हेपेटाइटिस का एक प्रमुख लक्षण है।
पीलिया (Jaundice) दिखने का इंतजार न करें, डॉ. सरीन ने समझाया असली खतरा
आम तौर पर लोग मानते हैं कि जब आंखें और त्वचा पीली हो जाए (यानी पीलिया हो जाए), तभी लिवर की बीमारी होती है। लेकिन डॉ. सरीन ने इस मिथक को तोड़ते हुए साफ किया है कि हेपेटाइटिस के कई मरीजों में पीलिया के लक्षण बहुत देर से या कई बार दिखाई ही नहीं देते हैं। जब तक त्वचा पीली होती है, तब तक लिवर को काफी नुकसान पहुंच चुका होता है। इसलिए, पीलिया होने का इंतजार किए बिना ऊपर बताए गए शुरुआती लक्षणों के दिखते ही तुरंत लिवर फंक्शन टेस्ट (LFT) और हेपेटाइटिस की जांच करानी चाहिए।
हेपेटाइटिस से बचाव के लिए क्या करें और क्या न करें?
लिवर को सुरक्षित रखने और इस गंभीर बीमारी से बचने के लिए डॉ. सरीन ने कुछ बेहद जरूरी स्वास्थ्य टिप्स साझा किए हैं:
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टीकाकरण (Vaccination) है सबसे जरूरी: हेपेटाइटिस बी (Hepatitis B) से बचने के लिए वैक्सीन की सभी खुराकें जरूर लगवाएं। यह वायरस से बचने का सबसे अचूक उपाय है।
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बाहर के दूषित पानी और भोजन से बचें: हेपेटाइटिस ए और ई दूषित पानी व भोजन से फैलते हैं, इसलिए हमेशा साफ और उबला हुआ पानी पिएं और खुले में बिकने वाले भोजन से परहेज करें।
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संक्रमित सुई और असुरक्षित संबंधों से दूरी: हेपेटाइटिस बी और सी संक्रमित खून, अनस्टेरलाइज्ड सुइयों (Tattoos or Injections) और असुरक्षित शारीरिक संबंधों के जरिए फैलते हैं, इसलिए इन मामलों में पूरी सावधानी बरतें।
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शराब और अत्यधिक दवाओं से परहेज: बिना डॉक्टर की सलाह के दर्द निवारक दवाएं (Painkillers) खाने की आदत और शराब का अत्यधिक सेवन लिवर को तेजी से डैमेज करता है।