पराये मर्दों के साथ संबंध बनाने के लिए मजबूर करता था पति: फ्रांस के इस खौफनाक मामले ने पूरी दुनिया को दहलाया, जानिए इसके पीछे की मानसिक विकृति

पराये मर्दों के साथ संबंध बनाने के लिए मजबूर करता था पति: फ्रांस के इस खौफनाक मामले ने पूरी दुनिया को दहलाया, जानिए इसके पीछे की मानसिक विकृति

हाल ही में फ्रांस की एक अदालत ने एक ऐसे ऐतिहासिक और रोंगटे खड़े कर देने वाले मामले में फैसला सुनाया है, जिसने इंसानियत को शर्मसार कर दिया है। फ्रांस के रहने वाले डोमिनिक पेलिकॉट नाम के एक व्यक्ति को अपनी ही पत्नी गिजेल पेलिकॉट (Gisèle Pelicot) को करीब 10 सालों तक नशीली दवाएं (sedatives) देकर बेहोश करने और इंटरनेट के जरिए 50 से अधिक अनजान मर्दों को बुलाकर उसका रेप करवाने के आरोप में 20 साल की सख्त जेल की सजा सुनाई गई है। इस मामले में कुल 51 पुरुष (पति सहित) दोषी पाए गए हैं। पीड़ित महिला ने अपनी पहचान न छिपाते हुए खुली अदालत में मुकदमा लड़ा ताकि दुनिया इस घिनौने सच को देख सके।

इस सनसनीखेज मामले के सामने आने के बाद दुनिया भर के मनोवैज्ञानिकों, समाजशास्त्रियों और आम जनता के बीच यह बहस छिड़ गई है कि कोई पति इस हद तक कैसे गिर सकता है? क्या यह कोई गंभीर मानसिक विकृति (Mental Illness) है या फिर विशुद्ध रूप से एक क्रूर आपराधिक मानसिकता?

मनोवैज्ञानिकों की राय: क्या यह मानसिक बीमारी है?

इस मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट में कई मनोचिकित्सकों (Psychiatrists) और विशेषज्ञों की रिपोर्ट पेश की गई। डॉक्टरों और मनोवैज्ञानिकों के मुताबिक, इस तरह के घिनौने व्यवहार के पीछे मुख्य रूप से दो स्थितियां काम करती हैं:

  • मानसिक बीमारी नहीं, बल्कि व्यक्तित्व विकार (Personality Disorder): जांच करने वाले चिकित्सा विशेषज्ञों ने स्पष्ट किया कि मुख्य आरोपी डोमिनिक पेलिकॉट किसी पागलपन या दिमागी बीमारी का शिकार नहीं था, बल्कि वह पूरी तरह होशोहवास में था। मनोवैज्ञानिकों के अनुसार, ऐसे व्यक्ति तीव्र 'असामाजिक व्यक्तित्व विकार' (Antisocial Personality Disorder) और 'गंभीर परपीड़क मानसिकता' (Sadism) से ग्रस्त होते हैं, जहां दूसरों को दर्द, लाचारी या बेहोशी की हालत में देखकर उन्हें एक विकृत आनंद और शक्ति का अहसास (Need to feel all-powerful) होता है।

  • वॉयियरिज्म (Voyeurism) और सेक्सुअल डेविएंस: इस तरह की विकृति में व्यक्ति को खुद संबंध बनाने के बजाय, अपने साथी को किसी अन्य व्यक्ति के साथ (विशेषकर उसकी बिना सहमति या लाचारी की स्थिति में) देखने में विकृत यौन सुख मिलता है। इस मामले में आरोपी न सिर्फ अन्य पुरुषों को बुलाता था, बल्कि उन घिनौनी हरकतों के वीडियो और तस्वीरें भी रिकॉर्ड करता था।

क्या इसे केवल 'बीमारी' कहकर छोड़ देना सही है?

विशेषज्ञों और कानूनविदों का मानना है कि ऐसे मामलों को सिर्फ 'मानसिक बीमारी' या 'यौन लत' (Sexual Addiction) का नाम देकर आरोपी के अपराध को कम नहीं किया जा सकता। यह विशुद्ध रूप से एक सोची-समझी आपराधिक और पितृसत्तात्मक मानसिकता का परिणाम है, जहां एक पुरुष अपनी पत्नी को इंसान न समझकर अपनी 'निजी संपत्ति' मानने लगता है।

इस केस में जो अन्य 50 पुरुष पकड़े गए, वे कोई आदतन अपराधी नहीं थे—उनमें से कोई फायर फाइटर था, कोई पत्रकार, कोई सरकारी कर्मचारी तो कोई आम दुकानदार था। उन पुरुषों की मानसिकता यह थी कि चूंकि महिला के पति ने उन्हें आमंत्रित किया है, इसलिए उन्हें महिला की सहमति (Consent) की कोई आवश्यकता नहीं है। यह सोच किसी मानसिक बीमारी से नहीं, बल्कि समाज में महिलाओं के प्रति गहरे बैठे वस्तुकरण (Dehumanization) और सहमति के कानून की समझ न होने की वजह से पैदा होती है।

गिजेल पेलिकॉट बनीं दुनिया के लिए 'नारी शक्ति' की मिसाल

फ्रांसीसी कानून के तहत यौन उत्पीड़न की पीड़ितों को अपनी पहचान गुप्त रखने का अधिकार होता है, लेकिन गिजेल पेलिकॉट ने इस अधिकार को स्वेच्छा से छोड़ दिया। उन्होंने कहा, "मैं चाहती हूं कि यह मुकदमा पूरी तरह सार्वजनिक रूप से चले, ताकि शर्मिंदगी का सामना पीड़ित महिला को नहीं, बल्कि उन बलात्कारियों को करना पड़े जिन्होंने यह घिनौना कृत्य किया है।" उनके इस साहसी कदम ने दुनिया भर में केमिकल सबमिशन (नशीली दवाएं देकर शोषण करना) के खिलाफ एक नई चेतना जगाई है और वे आज दुनिया भर में महिलाओं के अधिकारों और गरिमा की एक वैश्विक प्रतीक बन चुकी हैं।

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