मानसून के साथ बढ़ा लेप्टोस्पाइरोसिस का खतरा: बच्चों को कैसे बचाएं, जानें डॉक्टर की सलाह
मुंबई में मानसून की बारिश ने भीषण गर्मी से राहत तो दिलाई है, लेकिन इसके साथ ही लेप्टोस्पाइरोसिस जैसी मौसमी और खतरनाक बीमारियों में भी तेजी से वृद्धि हुई है। लेप्टोस्पाइरोसिस एक गंभीर जीवाणु संक्रमण है, जो संक्रमित जानवरों (विशेषकर चूहों) के मूत्र से दूषित हुए पानी के माध्यम से फैलता है।
मुंबई में हाल ही में आई बाढ़ के बाद, पिछले वर्षों की तुलना में इस साल लेप्टोस्पाइरोसिस के मामलों में काफी उछाल आया है। मानसून के अभी जारी रहने की संभावना को देखते हुए स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने माता-पिता को अत्यधिक सतर्क रहने की सलाह दी है, क्योंकि बच्चे इस संक्रमण के प्रति सबसे अधिक संवेदनशील होते हैं।
लेप्टोस्पाइरोसिस क्या है और यह बच्चों को कैसे बनाता है शिकार?
नारायणा हेल्थ एसआरसीसी चिल्ड्रन्स हॉस्पिटल के संक्रामक रोगों के सलाहकार डॉ. अमोल जयभाये के अनुसार, लेप्टोस्पाइरोसिस 'लेप्टोस्पाइरा' नामक बैक्टीरिया के कारण होता है। भारी बारिश और बाढ़ के दौरान यह बैक्टीरिया कूड़े, मल और पशु अपशिष्ट से मिलकर स्थिर जल को दूषित कर देता है।
जब बच्चे खेलते हुए या बाहर निकलते समय अनजाने में इस दूषित बाढ़ के पानी के संपर्क में आते हैं, तो बैक्टीरिया शरीर पर मौजूद छोटे-छोटे कट, खरोंच या आंखों, नाक और मुंह के जरिए आसानी से शरीर में प्रवेश कर जाते हैं। बच्चे बाहर अधिक समय बिताना पसंद करते हैं, पानी के पोखरों की ओर आकर्षित होते हैं और अक्सर नंगे पैर या खुले जूतों में घूमते हैं, जिससे वे संक्रमण के प्रति सबसे ज्यादा असुरक्षित हो जाते हैं।
इन शुरुआती लक्षणों को बिल्कुल न करें नजरअंदाज
लेप्टोस्पाइरोसिस की सबसे बड़ी चुनौती यह है कि इसके लक्षण तुरंत सामने नहीं आते। संक्रमण के बाद आमतौर पर 2 से 14 दिनों के भीतर लक्षण विकसित होते हैं, हालांकि यह अवधि 30 दिनों तक भी खींच सकती है। शुरुआती लक्षणों में मुख्य रूप से शामिल हैं:
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तेज बुखार और ठंड लगना
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गंभीर सिरदर्द
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शरीर और मांसपेशियों में तेज दर्द (विशेषकर पिंडलियों में)
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अत्यधिक थकान और कमजोरी
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उल्टी और दस्त की समस्या
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आंखें लाल होना
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भूख में भारी कमी
चूंकि ये लक्षण मानसून में होने वाली अन्य सामान्य बीमारियों से मिलते-जुलते हैं, इसलिए बाढ़ के पानी के संपर्क में आने के बाद यदि बच्चे को बुखार आए, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। बृहन्मुंबई नगर निगम (बीएमसी) ने भी लोगों को लेप्टोस्पाइरोसिस से बचने के लिए तुरंत चिकित्सा सहायता लेने की अपील की है।
किन गंभीर लक्षणों पर तुरंत लेनी चाहिए आपातकालीन चिकित्सा सहायता?
शुरुआती दौर में एंटीबायोटिक उपचार बहुत असरदार होता है, लेकिन देरी होने पर यह संक्रमण गुर्दे, यकृत, फेफड़े और मस्तिष्क जैसे महत्वपूर्ण अंगों को गंभीर नुकसान पहुंचा सकता है।
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त्वचा या आंखों का पीला पड़ना (पीलिया के लक्षण)
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सांस लेने में भारी कठिनाई
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कंपकंपी के साथ तेज बुखार
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लगातार उल्टी होना और भ्रम या अत्यधिक नींद आना
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पिंडलियों पर दाने उभरना
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मांसपेशियों और जोड़ों में असहनीय दर्द
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बढ़ी हुई लसीका ग्रंथियां (Lymph nodes)
डॉ. जयभाये सख्त हिदायत देते हैं कि माता-पिता बच्चों को खुद से कोई भी एंटीबायोटिक्स या मेडिकल स्टोर की दवा न दें, बल्कि सही समय पर डॉक्टरी सलाह लें।
बच्चों को लेप्टोस्पाइरोसिस से सुरक्षित रखने के कारगर उपाय
बरसात के इस मौसम में कुछ आसान सावधानियां अपनाकर बच्चों को इस संक्रमण के खतरे से पूरी तरह बचाया जा सकता है।
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बच्चों को बाढ़ के पानी और सड़कों पर भरे हुए गंदे पानी के गड्ढों से दूर रखें।
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जब सड़कें और खेल के मैदान जलमग्न हों, तो बच्चों को घर के अंदर ही खेलने के लिए प्रेरित करें।
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बच्चों को घर से बाहर भेजते समय हमेशा वाटरप्रूफ बूट या मजबूत बंद जूते पहनाएं।
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यदि बच्चे के शरीर पर कोई कट या खरोंच है, तो उसे बाहर भेजने से पहले वाटरप्रूफ पट्टी से अच्छी तरह ढक दें।
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घर लौटने के बाद बच्चों के हाथ, पैर और खुली त्वचा को साबुन और साफ पानी से अच्छी तरह धोएं।
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यदि बाढ़ का पानी घर के अंदर घुस गया है, तो घर की सभी सतहों को अच्छी तरह कीटाणुरहित (Disinfect) करें।
बाढ़ का पानी उतरने के बाद भी बना रहता है खतरा
विशेषज्ञों का कहना है कि बाढ़ का पानी कम होने के बाद भी खतरा टलता नहीं है, क्योंकि इसके कई दिनों बाद तक बैक्टीरिया जीवित रह सकते हैं। यदि आपके बच्चे को बाढ़ के पानी में खेलने या जलभराव वाले रास्ते से गुजरने के एक सप्ताह के भीतर बुखार या फ्लू जैसे लक्षण महसूस हों, तो बिना एक पल गंवाए डॉक्टर से मिलें। समय पर पहचान और तुरंत एंटीबायोटिक इलाज से गंभीर जटिलताओं को आसानी से टाला जा सकता है।