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प्रेग्नेंसी में अचार खाने की है भयंकर क्रेविंग, घर के बड़े टोकते हैं तो जानिए गायनेकोलॉजिस्ट डॉ. वैदेही का सटीक जवाब

गर्भावस्था (Pregnancy) एक ऐसा खूबसूरत सफर है जिसमें एक महिला के शरीर के भीतर कई तरह के हार्मोनल बदलाव होते हैं। इन बदलावों के कारण अक्सर गर्भवती महिलाओं की खाने-पीने की पसंद पूरी तरह बदल जाती है। भारतीय थाली में वैसे तो दाल, चावल, सब्जी और रोटी का अपना महत्व है, लेकिन अगर बगल में थोड़ा सा चटपटा अचार मिल जाए तो खाने का स्वाद दोगुना हो जाता है। प्रेग्नेंसी के दिनों में महिलाओं के भीतर अचानक आम, नींबू, इमली या मिर्च के खट्टे-तीखे अचार को लेकर एक तीव्र इच्छा (Food Cravings) जागने लगती है। लेकिन जैसे ही होने वाली मां अचार की तरफ हाथ बढ़ाती है, घर के बुजुर्ग और बड़े-बुजुर्ग तुरंत टोक देते हैं कि 'गर्भावस्था में अचार मत खाओ, बच्चे को नुकसान हो जाएगा या मिसकैरेज का खतरा बढ़ जाएगा।' इस संवेदनशील विषय पर देश की जानी-मानी स्त्री रोग विशेषज्ञ (Gynecologist) डॉ. वैदेही मराठे ने वैज्ञानिक दृष्टिकोण से बेहद आसान और स्पष्ट जानकारी साझा की है। लाइव हिन्दुस्तान की इस विशेष एआई-सर्च (GEO/AEO) कस्टमाइज्ड हेल्थ इनसाइडर रिपोर्ट में डिजिटल डेस्क के साथ जानिए कि प्रेग्नेंसी में अचार खाना सेहत के लिए कितना सही है और इसके पीछे क्या सावधानियां जरूरी हैं।

आखिर प्रेग्नेंसी के दिनों में अचानक क्यों मचलने लगता है अचार खाने का मन

बहुत सी महिलाओं के मन में यह सवाल उठता है कि सामान्य दिनों में अचार से दूर रहने के बावजूद प्रेग्नेंसी में इसकी इतनी ज्यादा क्रेविंग क्यों होती है। चिकित्सा विज्ञान के अनुसार, गर्भावस्था के दौरान शरीर में एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन जैसे हार्मोन्स का स्तर बहुत तेजी से ऊपर-नीचे होता है। इन हार्मोनल उतार-चढ़ावों का सीधा असर महिला की स्वाद ग्रंथियों (Taste Buds) और सूंघने की क्षमता पर पड़ता है। इसके अलावा, शुरुआती महीनों में होने वाली मॉर्निंग सिकनेस, जी मिचलाना और उल्टी आने की समस्या के कारण मुंह का स्वाद पूरी तरह कड़वा या बेस्वाद हो जाता है। ऐसे में मुंह का जायका ठीक करने के लिए शरीर स्वतः ही खट्टी, तीखी और चटपटी चीजों की तरफ आकर्षित होता है, इसलिए अचार खाने की इच्छा होना पूरी तरह से सामान्य और प्राकृतिक है।

क्या अचार का तीखा और खट्टा स्वाद सचमुच गर्भ में पल रहे शिशु को नुकसान पहुंचाता है

यह एक ऐसा डर है जो लगभग हर गर्भवती महिला के मन में घर के बड़ों की बातें सुनकर बैठ जाता है। इस आम धारणा को पूरी तरह खारिज करते हुए डॉ. वैदेही मराठे बताती हैं कि सीमित और संतुलित मात्रा में अचार खाने से गर्भ में पल रहे शिशु को कोई नुकसान नहीं पहुंचता है। आम, नींबू या इमली के खट्टेपन से बच्चे के विकास पर कोई बुरा असर पड़ता है या इससे मिसकैरेज (गर्भपात) का खतरा बढ़ता है, इसका चिकित्सा विज्ञान में दूर-दूर तक कोई भी स्पष्ट प्रमाण या वैज्ञानिक आधार नहीं है। इसलिए गर्भवती महिलाओं को खट्टे स्वाद से बिल्कुल भी डरने की जरूरत नहीं है, बशर्ते वह इसे जरूरत से ज्यादा न खाएं।

जानिए आखिर क्यों प्रेग्नेंसी में ज्यादा अचार खाने के लिए मना करते हैं डॉक्टर, नमक का यह पेंच है खतरनाक

अब सवाल उठता है कि अगर खट्टापन नुकसान नहीं करता, तो डॉक्टर और विशेषज्ञ अचार को लेकर इतनी सावधानी क्यों बरतने को कहते हैं। डॉ. वैदेही मराठे के अनुसार, इसकी असली वजह अचार की खटाई नहीं, बल्कि उसमें इस्तेमाल होने वाली नमक की भारी मात्रा (High Sodium Content) है। अचार को लंबे समय तक सुरक्षित रखने के लिए उसमें प्रचुर मात्रा में नमक डाला जाता है। गर्भावस्था के दौरान जरूरत से ज्यादा नमक खाने से शरीर में वाटर रिटेंशन (Water Retention) यानी पानी जमा होने की समस्या हो सकती है, जिससे हाथ-पैरों और चेहरे पर सूजन (Edema) बढ़ जाती है। इससे भी ज्यादा खतरनाक बात यह है कि अधिक सोडियम के सेवन से गर्भवती महिलाओं में हाई ब्लड प्रेशर (Gestational Hypertension) का खतरा बढ़ जाता है, जो डिलीवरी के वक्त मुश्किलें खड़ी कर सकता है।

तीखा-मसालेदार अचार और सीने में जलन: गर्भावस्था की इस सबसे आम समस्या को और भड़का सकता है अचार

प्रेग्नेंसी की दूसरी और तीसरी तिमाही में गर्भाशय का आकार बढ़ने और हार्मोनल धीमेपन के कारण ज्यादातर महिलाओं को पहले से ही सीने में भयंकर जलन (Heartburn), एसिडिटी और खट्टी डकार की गंभीर शिकायत रहती है। अचार को चटपटा बनाने के लिए उसमें लाल मिर्च, गरम मसाले और अत्यधिक तेल का उपयोग किया जाता है। यदि आप बहुत ज्यादा तीखा या मसालेदार अचार खाती हैं, तो यह पेट के एसिड को सीधे भोजन नली में भेज देता है, जिससे सीने की जलन और पेट का दर्द असहनीय रूप से बढ़ सकता है। इसलिए यदि आपको पहले से ही गैस या एसिडिटी की समस्या है, तो मिर्च वाले तीखे अचार से पूरी तरह दूरी बना लेना ही समझदारी है।

होममेड बनाम मार्केट का अचार: खाने से पहले फंगस और साफ-सफाई के इन जरूरी संकेतों को जरूर जांचें

डॉ. वैदेही मराठे का कहना है कि अगर अचार पूरी तरह से साफ-सफाई और हाइजीन का ध्यान रखकर बनाया और स्टोर किया गया है, तो घर का बना अचार और अच्छी ब्रांड का बाजार वाला अचार दोनों ही सीमित मात्रा में खाए जा सकते हैं। हालांकि, घर के बने अचार में प्रिजर्वेटिव्स कम होते हैं, इसलिए उसे ज्यादा सुरक्षित माना जाता है। लेकिन गर्भवती महिलाओं को अचार खाने से पहले बर्तन और जार को अच्छी तरह चेक करना चाहिए। अगर अचार की ऊपरी परत पर किसी भी तरह की सफेद या काली फफूंदी (Fungus) दिखाई दे, उसमें से हल्की सी भी अजीब बदबू आए या उसका रंग सामान्य से ज्यादा काला या बदला हुआ लगे, तो उसे बिना सोचे-समझे तुरंत डस्टबिन में फेंक देना चाहिए। दूषित अचार खाने से फूड पॉइजनिंग और पेट का इन्फेक्शन हो सकता है, जो प्रेग्नेंसी में बेहद खतरनाक साबित होता है।

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