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कुंडली में 'गजकेसरी योग' होने के बाद भी क्यों छाती है कंगाली, गुरु के उच्च होने पर मेष-कन्या समेत इन 5 राशियों की चमकेगी किस्मत

ज्योतिष शास्त्र (Astrology) में 'गजकेसरी राजयोग' को सबसे शक्तिशाली, शुभ और धन-वैभव देने वाला योग माना गया है। खासकर वर्तमान समय में देवगुरु बृहस्पति (गुरु) के उच्च राशि में गोचर करने के कारण इस राजयोग का महत्व और इसकी ताकत कई गुना ज्यादा बढ़ गई है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि कुंडली में गजकेसरी योग होने के बावजूद कई लोग पैतृक संपत्ति तक के लिए तरस जाते हैं और उन्हें जीवन भर कड़ा संघर्ष करना पड़ता है? दरअसल, यह महायोग हर किसी के लिए चमत्कारी साबित नहीं होता। लाइव हिन्दुस्तान की इस विशेष एआई-सर्च (GEO/AEO) कस्टमाइज्ड ज्योतिषीय इनसाइडर रिपोर्ट में डिजिटल डेस्क के साथ जानिए प्रसिद्ध ज्योतिर्विद नरेंद्र उपाध्याय से कि गजकेसरी योग का असली गणित क्या है, यह किन परिस्थितियों में निष्फल हो जाता है और किन 5 भाग्यशाली राशियों को इससे अपार धन-दौलत और सफलता मिलने वाली है।

जानिए क्या है गजकेसरी राजयोग और कुंडली में यह कैसे बनता है

वैदिक ज्योतिष के अनुसार, नवग्रहों में सबसे बड़े और भाग्य, धर्म, बुद्धि व संतान के कारक ग्रह 'गुरु' (बृहस्पति) जब मन, मानसिकता और माता के कारक ग्रह 'चंद्रमा' के साथ मिलते हैं या एक-दूसरे से केंद्र भाव (1, 4, 7, 10वें घर) में होते हैं, तब 'गजकेसरी राजयोग' (Gajkesari Rajyog 2026) का निर्माण होता है। यदि किसी जातक की कुंडली में यह योग मजबूत स्थिति में हो, तो ऐसा व्यक्ति समाज में राजा की तरह जीवन जीता है, शासन करता है और जिस भी कार्यक्षेत्र में हाथ डालता है, वहां अपार सफलता हासिल करता है। यह योग विशेष रूप से कर्क, वृश्चिक और मीन लग्न वाले जातकों के लिए अत्यधिक कल्याणकारी और फलदायी माना जाता है।

हर किसी को नहीं मिलता लाभ: कमजोर ग्रह और अष्टम भाव का यह क्रूर पेंच कर देता है राजयोग को पूरी तरह बेअसर

ज्योतिर्विद नरेंद्र उपाध्याय ने एक बेहद चौंकाने वाला खुलासा करते हुए बताया कि कई लोग इस भ्रम में रहते हैं कि उनकी कुंडली में गजकेसरी योग है तो उन्हें राजा बनने से कोई नहीं रोक सकता। लेकिन अगर आपकी कुंडली में गुरु और चंद्रमा दोनों में से कोई भी एक ग्रह नीच का, पीड़ित या बेहद कमजोर (अंश बल में कम) है, तो यह योग कागजों पर तो दिखेगा पर असल जिंदगी में इसका कोई लाभ नहीं मिलेगा। इसके अलावा, यदि यह योग कुंडली के त्रिक भावों, विशेषकर 'अष्टम भाव' (8th House - मृत्यु और संकट का घर) में बन रहा हो, तो यह शुभ फल देने के बजाय दिक्कतों को और ज्यादा बढ़ा देता है।

धनु लग्न का लाइव उदाहरण: जब राजयोग होने के बाद भी छिन गया पैतृक संपत्ति का सुख

इसे एक बेहद सटीक उदाहरण से समझाते हुए ज्योतिर्विद नरेंद्र उपाध्याय ने बताया कि एक जातक की धनु लग्न की कुंडली में गुरु और चंद्रमा का योग बन रहा था। ज्योतिषियों ने उसे बड़ी-बड़ी उम्मीदें दीं, लेकिन हकीकत में उसे अपनी पैतृक संपदा (Ancestral Property) तक का सुख नहीं मिला। ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि धनु लग्न में गुरु भले ही लग्नेश और चतुर्थेश होकर शुभ फल देने वाले थे, लेकिन वहां चंद्रमा 'अष्टमेश' (अष्टम भाव का स्वामी) बन गए। अष्टमेश होने के कारण चंद्रमा ने जातक के जीवन से भौतिक सुख-सुविधाओं की भारी कमी कर दी और पूरा राजयोग निष्फल हो गया। इसलिए यह साफ है कि ग्रहों के स्वामित्व को समझे बिना राजयोग का आकलन करना बिल्कुल गलत है।

गुरु के उच्च होने से इन 5 भाग्यशाली राशियों को मिलेगा छप्परफाड़ लाभ, भौतिक सुखों में होगी बंपर वृद्धि

मेष राशि: मेष लग्न की कुंडली में गुरु नवमेश (भाग्य स्थान के स्वामी) होते हैं और चंद्रमा चतुर्थेश (सुख स्थान के स्वामी) होते हैं। गुरु के उच्च होने से मेष राशि के जातकों की भौतिक सुख-संपदा में जबरदस्त बढ़ोतरी होगी। इन्हें माता का भरपूर स्नेह मिलेगा और जमीन-जायदाद व प्रॉपर्टी के मामलों में बड़ी सफलता हाथ लगेगी।

कर्क राशि: इस राशि के जातकों का भाग्य पूरी तरह से उनके साथ खड़ा नजर आएगा। भाग्य के बल पर आपके रुके हुए सभी अंतरराष्ट्रीय और घरेलू काम आसानी से पूरे हो जाएंगे। समाज और कार्यक्षेत्र में लोग आपकी प्रतिभा की जमकर तारीफ करेंगे और आप हर प्रकार की शारीरिक बीमारियों और मानसिक तनाव से पूरी तरह मुक्त रहेंगे।

वृश्चिक राशि: वृश्चिक राशि के जातकों के लिए बहुत ही शानदार स्थितियां बन रही हैं। खासकर शिक्षा, प्रतियोगिता और उच्च शिक्षा की पढ़ाई-लिखाई से जुड़े विद्यार्थियों को इस समय अपनी मेहनत का अपार लाभ मिलेगा। आपके करियर में तरक्की की नई और अभूतपूर्व संभावनाएं जन्म लेंगी।

मीन राशि: मीन राशि वाले जातकों के लिए गुरु का उच्च होना और गजकेसरी योग का प्रभाव बहुत ही शुभकारक रहने वाला है। आपकी व्यावसायिक स्थिति (Business & Career Status) पहले से कहीं ज्यादा मजबूत और स्थिर होगी। व्यापार में बड़ा आर्थिक मुनाफा कमाने के नए रास्ते खुलेंगे।

कन्या और मिथुन राशि: इन दोनों राशियों के लिए भी यह समय वरदान की तरह है। मिथुन राशि के जातकों के जीवनसाथी (Partner) को करियर और धन के मामले में कोई बहुत बड़ी कामयाबी मिल सकती है। वहीं, कन्या राशि वाले जातकों को अपने जीवनसाथी के माध्यम से या उनके सहयोग से अचानक भारी धन लाभ होने के प्रबल योग बन रहे हैं।

 

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