हर घर में क्यों होना चाहिए मात्र 20 रुपये का ORS पैकेट? 'ओआरएस डे' पर डॉक्टरों ने बताई जान बचाने वाली वजह

हर घर में क्यों होना चाहिए मात्र 20 रुपये का ORS पैकेट? 'ओआरएस डे' पर डॉक्टरों ने बताई जान बचाने वाली वजह

आज 29 जुलाई है, यानी विश्व ओआरएस दिवस (World ORS Day 2026)। यह दिन उस एक जादुई घोल के महत्व को समर्पित है जिसने दुनिया भर में करोड़ों बच्चों और बड़ों को डिहाइड्रेशन (शरीर में पानी की कमी) के कारण मौत के मुंह में जाने से बचाया है। मानसून के इस मौसम में जब उल्टी, दस्त, फूड पॉइजनिंग और हैजा (Cholera) जैसी बीमारियां अपने चरम पर होती हैं, तब फर्स्ट-एड बॉक्स में रखा मात्र 20 रुपये का एक ORS पैकेट किसी की जान बचाने में सबसे बड़ी भूमिका निभा सकता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, दस्त या डायरिया (Diarrhea) शिशुओं की मृत्यु का एक बहुत बड़ा कारण है, और इसका सबसे आसान व सटीक समाधान आपके घर की रसोई या मेडिकल किट में छिपा है।

क्या है ORS और यह शरीर में कैसे काम करता है?

ORS का पूरा नाम ओरल रीहाइड्रेशन साल्ट्स (Oral Rehydration Salts) है। यह सोडियम, पोटैशियम, क्लोराइड, साइट्रेट और ग्लूकोज का एक सटीक और वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित मिश्रण होता है। जब किसी व्यक्ति को लगातार दस्त या उल्टियां होती हैं, तो शरीर से सिर्फ पानी ही बाहर नहीं निकलता, बल्कि जीवन के लिए जरूरी इलेक्ट्रोलाइट्स (लवण) भी तेजी से बह जाते हैं।

ऐसी स्थिति में केवल सादा पानी पीने से शरीर में लवणों का संतुलन और बिगड़ सकता है। जब हम ओआरएस का घोल पीते हैं, तो इसमें मौजूद ग्लूकोज आंतों को सोडियम और पानी को तेजी से सोखने में मदद करता है। यह शरीर के हाइड्रेशन लेवल को मिनटों में रीस्टोर कर देता है और ऑर्गन फेलियर (अंगों का काम बंद करना) के खतरे को टाल देता है।

हर घर में ORS का पैकेट होना क्यों है जरूरी? जानिए 4 बड़े फायदे

चिकित्सकों के अनुसार, हर परिवार को अपने घर में ओआरएस के 2-3 पैकेट हमेशा एडवांस में रखने चाहिए, जिसके पीछे निम्नलिखित बड़े कारण हैं:

  • डायरिया और फूड पॉइजनिंग में तत्काल राहत: दूषित पानी या खराब खानपान के कारण अचानक रात-बिरात दस्त या उल्टी शुरू होने पर, ओआरएस अस्पताल भागने से पहले मरीज को स्टेबल करने का सबसे पहला और असरदार इलाज है।

  • हीट स्ट्रोक और डिहाइड्रेशन से बचाव: भीषण गर्मी या उमस भरे मानसूनी मौसम में अत्यधिक पसीना निकलने से होने वाली सुस्ती, चक्कर आना और मांसपेशियों की ऐंठन (Cramps) को ओआरएस तुरंत दूर करता है।

  • बच्चों के लिए जीवनरक्षक: छोटे बच्चों का शरीर वयस्कों की तुलना में बहुत जल्दी डिहाइड्रेट होता है। दस्त के दौरान बच्चों को ओआरएस देना उनके जीवन को सुरक्षित रखता है।

  • सस्ता, सुलभ और आसान: यह किसी भी मेडिकल स्टोर पर बेहद कम कीमत में उपलब्ध है और इसे बनाने के लिए किसी डॉक्टरी पर्चे या जटिल तैयारी की जरूरत नहीं होती।

ओआरएस घोल बनाने और देने की सही मेडिकल विधि

कई बार लोग ओआरएस बनाने में गलती कर देते हैं, जिससे इसका असर कम हो जाता है। डॉक्टरों के अनुसार इसका सही तरीका यह है:

  1. पानी की सही मात्रा: एक साफ बर्तन में 1 लीटर पीने का साफ पानी लें (यदि पानी पर भरोसा न हो, तो पहले उसे उबालकर ठंडा कर लें)।

  2. पूरा पैकेट मिलाएं: डब्ल्यूएचओ (WHO) के मानक वाले पूरे पैकेट को उस 1 लीटर पानी में डाल दें और अच्छी तरह चम्मच से तब तक घोलें जब तक पाउडर पूरी तरह घुल न जाए।

  3. थोड़ा-थोड़ा कर पिलाएं: मरीज को एक साथ पूरा गिलास पिलाने के बजाय, हर बार दस्त या उल्टी होने के बाद आधा या एक कप घोल धीरे-धीरे (घूंट-घूंट कर) पिलाएं। छोटे बच्चों को चम्मच से पिलाएं।

  4. 24 घंटे की समय सीमा: एक बार तैयार किए गए ओआरएस घोल को केवल 24 घंटे के भीतर ही इस्तेमाल करना चाहिए। 24 घंटे के बाद बचे हुए घोल को फेंक दें और जरूरत पड़ने पर नया घोल तैयार करें।

महत्वपूर्ण चेतावनी: ओआरएस पाउडर को कभी भी सीधे पानी में बिना नापे न मिलाएं, और न ही इस घोल में ऊपर से अलग से चीनी, नमक, दूध या जूस मिलाने की गलती करें। ऐसा करने से इसका वैज्ञानिक संतुलन बिगड़ जाता है और यह पेट को और अधिक खराब कर सकता है। यदि ओआरएस देने के बाद भी मरीज की आंखें धंसने लगें, अत्यधिक सुस्ती आए या पेशाब आना बंद हो जाए, तो बिना देर किए उसे तुरंत नजदीकी अस्पताल ले जाएं।

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