20-25 की उम्र में हेल्थ इंश्योरेंस लेना क्यों है सबसे समझदारी का फैसला, जानें प्रीमियम से लेकर 'वेटिंग पीरियड' तक का पूरा गणित

20-25 की उम्र में हेल्थ इंश्योरेंस लेना क्यों है सबसे समझदारी का फैसला, जानें प्रीमियम से लेकर 'वेटिंग पीरियड' तक का पूरा गणित

आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी और अनियमित खानपान ने बीमारियों के पैटर्न को पूरी तरह से बदल कर रख दिया है। जो गंभीर बीमारियां पहले 50 से 60 साल के बुजुर्गों में देखने को मिलती थीं, वे अब 25-30 साल के युवाओं को अपनी चपेट में ले रही हैं।

ऊपर से मेडिकल इन्फ्लेशन यानी इलाज का खर्च इतनी तेजी से बढ़ रहा है कि अचानक अस्पताल जाना पड़े तो अच्छे-खासों की जीवनभर की जमा-पूंजी खत्म हो जाती है। ऐसे में फाइनेंशियल एक्सपर्ट्स सलाह देते हैं कि करियर की शुरुआत में ही हेल्थ इंश्योरेंस ले लेना चाहिए। आइए समझते हैं कि कम उम्र में यह पॉलिसी खरीदना आपके लिए कैसे एक स्मार्ट इन्वेस्टमेंट साबित हो सकता है।

कम उम्र मतलब सस्ता प्रीमियम और फुल कवरेज

हेल्थ इंश्योरेंस का सीधा सा गणित आपकी उम्र से जुड़ा हुआ है। आप जितनी जल्दी पॉलिसी खरीदेंगे, आपको प्रीमियम उतना ही कम चुकाना होगा। जब आप 20 या 25 साल की उम्र में बीमा लेते हैं, तो कंपनियां आपको 'लो-रिस्क' (कम जोखिम) वाले ग्राहकों की सूची में रखती हैं। युवावस्था में बीमार पड़ने की गुंजाइश कम होती है, इसलिए आपको मामूली कीमत पर शानदार कवरेज मिल जाता है। वहीं, अगर आप 40 की उम्र पार करने के बाद पॉलिसी लेने जाएंगे, तो न सिर्फ प्रीमियम भारी-भरकम होगा, बल्कि पहले से मौजूद बीमारियों (Pre-existing diseases) के चलते आपको 'लोडिंग चार्ज' के रूप में अतिरिक्त पैसा भी देना पड़ सकता है।

'वेटिंग पीरियड' का चक्रव्यूह ऐसे करें पार

हेल्थ पॉलिसी खरीदते समय सबसे ज्यादा परेशान करने वाली चीज 'वेटिंग पीरियड' होती है। ज्यादातर बीमा कंपनियां पुरानी बीमारियों के इलाज के लिए 2 से 4 साल का इंतजार करवाती हैं। अगर आप पूरी तरह स्वस्थ रहते हुए जवानी में ही पॉलिसी ले लेते हैं, तो आपका यह वेटिंग पीरियड आसानी से कट जाता है। भविष्य में जब आपको सच में किसी बड़े इलाज की दरकार होगी, तब तक आपकी पॉलिसी पूरी तरह से मैच्योर हो चुकी होगी और आपकी जेब से एक भी पैसा नहीं लगेगा। बीमार पड़ने के बाद पॉलिसी लेने का कोई तुक नहीं है, क्योंकि इमरजेंसी के वक्त 3 साल का वेटिंग पीरियड आपकी कोई मदद नहीं कर पाएगा।

बीमारी से बचाव और वित्तीय सुरक्षा का अचूक हथियार

इंश्योरेंस होने का एक बहुत बड़ा फायदा मानसिक शांति है। जेब में कैशलेस कार्ड होने से आप किसी भी छोटी-मोटी शारीरिक दिक्कत को टालते नहीं हैं और तुरंत डॉक्टर से सलाह लेते हैं। यह आदत आपको भविष्य की किसी जानलेवा बीमारी से बचा सकती है। इसे महज एक खर्च समझने की भूल न करें; यह आपकी सबसे बड़ी वित्तीय संपत्ति (Financial Asset) है जो लाखों के मेडिकल बिल से आपकी रक्षा करती है। इसके अलावा, हेल्थ इंश्योरेंस के प्रीमियम पर सरकार द्वारा दी जा रही टैक्स और जीएसटी संबंधी रियायतें इसे मध्यम वर्ग के लिए और भी किफायती बनाती हैं।

नो क्लेम बोनस और एक्स्ट्रा बेनेफिट्स

आज के दौर में हेल्थ इंश्योरेंस सिर्फ अस्पताल के बिल तक सीमित नहीं है। अगर आप युवा हैं और सालभर में आपने बीमा कंपनी से कोई क्लेम नहीं लिया है, तो कंपनी आपको 'नो क्लेम बोनस' (NCB) का तोहफा देती है। इससे बिना कोई अतिरिक्त प्रीमियम दिए अगले साल आपका कवरेज अपने आप बढ़ जाता है। साथ ही, कई नामी कंपनियां आपको हर साल फ्री प्रिवेंटिव हेल्थ चेक-अप की सुविधा भी मुहैया कराती हैं। इसलिए, मुश्किल वक्त का इंतजार किए बिना आज ही अपने और अपने परिवार के लिए एक सही हेल्थ प्लान चुनें।

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