मीठा बिल्कुल नहीं खाते फिर भी आसमान छू रहा है ब्लड शुगर? साइलेंट किलर तनाव तो नहीं है वजह
आज के इस आधुनिक, अत्यधिक व्यस्त और प्रतियोगिता से भरे दौर में शायद ही कोई ऐसा इंसान होगा जो तनाव या मानसिक दबाव से पूरी तरह अछूता हो। सुबह आंख खुलने से लेकर रात को बिस्तर पर जाने तक डेडलाइन्स, ऑफिस का प्रेशर, पारिवारिक जिम्मेदारियां और भविष्य की चिंताएं हमारे दिमाग पर लगातार हावी रहती हैं। हम में से अधिकांश लोग यही सोचते हैं कि तनाव केवल हमारे मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित करता है और इससे मूड खराब होता है या सिरदर्द जैसी समस्याएं होती हैं, लेकिन विज्ञान और आधुनिक चिकित्सा जगत ने एक बेहद चौंकाने वाला और गंभीर खुलासा किया है। डॉक्टरों और एंडोक्राइनोलॉजिस्ट्स का साफ तौर पर यह कहना है कि मानसिक तनाव और चिंता का सीधा और गहरा संबंध हमारे शरीर में ब्लड शुगर के स्तर से होता है। कई बार लोग हमारे पास यह शिकायत लेकर आते हैं कि वे चीनी, मिठाइयां और कार्बोहाइड्रेट से पूरी तरह तौबा कर चुके हैं, स्ट्रिक्ट डाइट फॉलो करते हैं, फिर भी उनकी डायबिटीज या ब्लड शुगर का ग्राफ लगातार ऊपर की ओर ही भागता रहता है। इस अजीबोगरीब और उलझन भरी स्थिति के पीछे कोई और नहीं बल्कि हमारे शरीर के भीतर पैदा होने वाला एक खास हार्मोन और हमारा बढ़ता हुआ क्रोनिक तनाव जिम्मेदार होता है। इस पूरी प्रक्रिया को गहराई से समझना हर उस व्यक्ति के लिए बेहद जरूरी है जो डायबिटीज के खतरे से जूझ रहा है या अपने बढ़ते शुगर लेवल से परेशान है।
कोर्टिसोल हार्मोन क्या है और कैसे शरीर का नेचुरल फाइट-आर-फ्लाईट सिस्टम बढ़ाता है शुगर
जब भी कोई इंसान किसी मानसिक तनाव, डर, घबराहट या शारीरिक संकट की स्थिति से गुजरता है, तो हमारा मस्तिष्क तुरंत हमारे शरीर की एड्रेनल ग्रंथियों (Adrenal Glands) को एक आपातकालीन संदेश भेजता है। इस संदेश के जवाब में एड्रेनल ग्रंथियां बड़ी मात्रा में कोर्टिसोल (Cortisol) और एड्रेलीन जैसे हार्मोन्स का स्राव करती हैं, जिन्हें सामूहिक रूप से स्ट्रेस हार्मोन्स कहा जाता है। इवोल्यूशनरी साइंस के नजरिए से देखें तो यह सिस्टम हमारे पूर्वजों के लिए तब बेहद जरूरी था जब उन्हें जंगल में किसी खतरनाक जंगली जानवर से जान बचाकर भागना पड़ता था या तुरंत उससे मुकाबला करना पड़ता था। उस आपातकालीन स्थिति में शरीर को अचानक से भारी मात्रा में ऊर्जा की आवश्यकता होती थी, जिसके लिए कोर्टिसोल हमारे लिवर को सक्रिय करता है ताकि वह शरीर में जमा ग्लाइकोजन को ग्लूकोज में बदलकर तुरंत रक्त प्रवाह (Blood Stream) में छोड़ सके। इस प्रक्रिया से हमारी मांसपेशियों को अचानक से अत्यधिक शक्ति मिलती है ताकि हम तुरंत भाग सकें या लड़ सकें। लेकिन आधुनिक समय की समस्या यह है कि आज हमारे सामने कोई शेर या भालू नहीं बल्कि ऑफिस के ईमेल्स, फाइनेंशियल क्राइसिस और रोजमर्रा की चिंताएं होती हैं, जिनके खिलाफ हमें न तो भागना होता है और न ही शारीरिक लड़ाई लड़नी होती है। इसके बावजूद हमारा शरीर हर छोटे-छोटे तनाव पर बिल्कुल वैसी ही प्रतिक्रिया देता है और लगातार खून में ग्लूकोज की बाढ़ लाता रहता है, जिसका इस्तेमाल शारीरिक श्रम न होने के कारण कहीं नहीं हो पाता और वह मुफ्त में ब्लड शुगर को बढ़ा देता है।
बिना मीठा खाए ब्लड शुगर बढ़ने के पीछे छुपा है इंसुलिन रेजिस्टेंस का खतरनाक खेल
जब लगातार मानसिक तनाव के कारण कोर्टिसोल हार्मोन का स्तर हमारे शरीर में उच्च बना रहता है, तो ग्लूकोज का यह अतिरिक्त भंडार लगातार खून में तैरता रहता है। हमारे शरीर का अग्नाशय (Pancreas) इस बढ़े हुए ग्लूकोज को संभालने के लिए इंसुलिन नामक हार्मोन का उत्पादन करता है, जिसका मुख्य काम कोशिकाओं तक चीनी को पहुंचाकर ऊर्जा में बदलना होता है। लेकिन जब कोर्टिसोल और क्रोनिक स्ट्रेस का यह चक्र लंबे समय तक हफ्तों और महीनों तक चलता रहता है, तो हमारी शरीर की कोशिकाएं इंसुलिन के प्रति सुस्त और असंवेदनशील होने लगती हैं, जिसे मेडिकल भाषा में इंसुलिन रेजिस्टेंस (Insulin Resistance) कहा जाता है। इसका सीधा मतलब यह होता है कि इंसुलिन तो पर्याप्त मात्रा में मौजूद है, लेकिन कोशिकाएं उसके दरवाजों को खोलने से मना कर देती हैं, जिससे ग्लूकोज अंदर नहीं जा पाता और खून के भीतर ही फंसा रहता है। परिणामस्वरूप, व्यक्ति चाहे जितनी भी शुगर-फ्री डाइट ले ले या मीठे से पूरी तरह परहेज कर ले, उसके शरीर के भीतर का यह आंतरिक बायोलॉजिकल इंजन लगातार शुगर के स्तर को ऊंचा बनाए रखता है। यह स्थिति न केवल टाइप-2 डायबिटीज के खतरे को कई गुना बढ़ा देती है, बल्कि शरीर के अन्य अंगों जैसे कि किडनी, नर्वस सिस्टम और रक्त धमनियों को भी अंदर ही अंदर दीमक की तरह खोखला करना शुरू कर देती है।
तनाव के कारण शरीर में पेट की चर्बी और फैटी लिवर का खतरनाक संयोजन क्यों बनता है शुगर का कारण
कोर्टिसोल हार्मोन का असर केवल ब्लड शुगर तक ही सीमित नहीं रहता, बल्कि यह हमारे शरीर के मेटाबॉलिज्म और चर्बी जमा करने के पैटर्न को भी पूरी तरह उलट-पलट कर रख देता है। जब कोई व्यक्ति लंबे समय तक तनाव में रहता है, तो कोर्टिसोल उसके शरीर को यह संकेत देता है कि शायद कोई बड़ा संकट आने वाला है जिसके लिए ऊर्जा बचा कर रखनी चाहिए। इसके प्रभावस्वरूप शरीर विशेष रूप से विसरल फैट (Visceral Fat) यानी पेट के अंगों के आसपास की चर्बी को बहुत तेजी से स्टोर करने लगता है, जो कि सामान्य चमड़ी के नीचे की चर्बी से कहीं अधिक खतरनाक मानी जाती है। पेट के आसपास जमा यह जिद्दी चर्बी और फैटी लिवर की समस्या सीधे तौर पर इंसुलिन प्रतिरोध को और अधिक बढ़ावा देती है, जिससे शुगर का स्तर बेकाबू होने लगता है। इसके साथ ही, तनाव में रहने वाले लोग अक्सर नींद की कमी, भावनात्मक खानपान (Emotional Eating) और शारीरिक सुस्ती का शिकार हो जाते हैं, जो इस पूरे दुष्चक्र को और ज्यादा मजबूत कर देते हैं। इस तरह बिना एक भी दाना चीनी खाए व्यक्ति का शरीर खुद ही तनाव के रासायनिक जहर के कारण ग्लूकोज पैदा करने वाली एक फैक्ट्री में तब्दील हो जाता है, जिसे समय रहते रोकना बेहद आवश्यक है।
तनाव को कम करके और कोर्टिसोल को नियंत्रित करके कैसे स्वाभाविक रूप से घटाएं अपना शुगर लेवल
यदि आप भी इस बात से परेशान हैं कि आपकी डाइट एकदम परफेक्ट है और आप मीठे को हाथ तक नहीं लगाते फिर भी आपका ब्लड शुगर मीटर हमेशा हाई रहता है, तो अब आपको अपनी डाइट के साथ-साथ अपनी मानसिक जीवनशैली पर भी गहराई से काम करने की जरूरत है। कोर्टिसोल के इस खतरनाक खेल को मात देने का सबसे पहला और असरदार तरीका नियमित रूप से ध्यान (Meditation), योग, प्राणायाम और गहरी सांस लेने के अभ्यास (Deep Breathing Exercises) को अपनी डेली रूटीन का हिस्सा बनाना है। जब आप रोजाना पंद्रह से बीस मिनट प्राणायाम या माइंडफुलनेस करते हैं, तो आपका पैरासिम्पेथेटिक नर्वस सिस्टम एक्टिवेट होता है जो शरीर को यह संदेश देता है कि अब सब सुरक्षित है, जिससे कोर्टिसोल का स्तर तेजी से नीचे गिरने लगता है। इसके अलावा, रोजाना कम से कम सात से आठ घंटे की गहरी और गुणवत्तापूर्ण नींद लेना आपके हार्मोन्स को संतुलित करने के लिए किसी संजीवनी बूटी से कम नहीं है, क्योंकि नींद की कमी सीधे तौर पर अगले दिन कोर्टिसोल और ब्लड शुगर दोनों को बढ़ा देती है। अपने दिनभर के काम के बीच छोटे-छोटे ब्रेक्स लें, प्रकृति के बीच समय बिताएं, पसंदीदा हॉबीज को अपनाएं और जरूरत पड़ने पर किसी अच्छे काउंसलर या डॉक्टर से सलाह लें। यदि आप अपने मानसिक तनाव को नियंत्रित करने में सफल हो जाते हैं, तो आप देखेंगे कि बिना किसी अतिरिक्त दवा के आपका ब्लड शुगर लेवल खुद-ब-खुद एक स्वस्थ और सामान्य दायरे में लौटने लगा है और आप एक ऊर्जावान, तनावमुक्त तथा खुशहाल जीवन का आनंद उठा पा रहे हैं।