Up kiran,Digital Desk : हिमाचल प्रदेश सरकार ने पंचायती राज चुनावों को लेकर 9 जनवरी के हाईकोर्ट फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। सरकार ने स्पेशल लीव पिटीशन (SLP) दायर कर 30 अप्रैल से पहले चुनाव कराने के आदेश को चुनौती दी है।
क्यों हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती दी गई?
हिमाचल हाईकोर्ट की खंडपीठ ने प्रदेश सरकार को पंचायती चुनाव रोस्टर जारी करने के लिए केवल चार दिन का समय दिया था। सरकार का तर्क है कि यह समय तर्कसंगत और न्याय संगत नहीं है। 2021 में मनीष धरमैक मामले में इसी तरह के रोस्टर के लिए तीन महीने का समय दिया गया था।
साथ ही, सरकार ने यह भी सवाल उठाया है कि डिजास्टर मैनेजमेंट एक्ट लागू होने पर क्या चुनावों को कुछ समय के लिए टाला जा सकता है या नहीं। हाईकोर्ट में इस पर भी कानूनी स्पष्टता मांगी गई है।
हाईकोर्ट ने क्या आदेश दिया था?
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट की खंडपीठ ने कहा था:
31 जनवरी को पंचायती संस्थाओं का कार्यकाल समाप्त हो गया, नए चुनाव छह महीने के भीतर कराना जरूरी है।
आपदा कानून का हवाला देकर चुनाव अनिश्चितकाल तक नहीं टाला जा सकता।
जहां पुनर्सीमांकन पूरा हो चुका है, वहां तुरंत आरक्षण रोस्टर जारी किया जाए।
चुनाव आयोग को राज्य सरकार और स्थानीय निकायों के साथ तालमेल बिठाकर चुनाव कराना होगा।
चुनाव आयोग और सरकार की स्थिति
चुनाव आयोग ने अदालत को बताया कि उनकी पूरी तैयारी पूर्ण है, केवल सरकार के रोस्टर का इंतजार किया जा रहा है। डीसी और अन्य अधिकारियों को समय-समय पर निर्देश दिए जा चुके हैं।
वहीं, सरकार ने कहा कि सड़कों और बुनियादी ढांचे की क्षति और कुछ पंचायतों के पुनर्गठन एवं परिसीमन के कारण चुनाव कराना मुश्किल है।
राजनीतिक प्रतिक्रिया
भाजपा विधायक सुधीर शर्मा ने सोशल मीडिया पर लिखा कि सुप्रीम कोर्ट में दायर SLP देख कर यह मामला 'सरकार बनाम सरकार' जैसा लग रहा है।




