मानसून आने के बाद भी भारत के बड़े शहरों में क्यों पड़ रही है रिकॉर्डतोड़ उमस; वैज्ञानिक भी हैरान, सामने आई ये वजह

मानसून आने के बाद भी भारत के बड़े शहरों में क्यों पड़ रही है रिकॉर्डतोड़ उमस; वैज्ञानिक भी हैरान, सामने आई ये वजह

भारत के कई राज्यों में दक्षिण-पश्चिम मानसून (South-West Monsoon) ने दस्तक दे दी है, लेकिन इसके बावजूद देश के कई बड़े महानगरों में लोगों को गर्मी से राहत नहीं मिल पा रही है। आसमान में बादल छाने और बारिश होने के बाद भी मौसम में ठंडक गायब है। दरअसल, बारिश के साथ बढ़ी हुई अत्यधिक आर्द्रता यानी उमस (Humidity) के कारण शरीर का पसीना जल्दी नहीं सूख पा रहा है, जिससे वास्तविक तापमान कम होने पर भी शरीर को भीषण गर्मी महसूस हो रही है। मौसम वैज्ञानिक इस स्थिति को हीट इंडेक्स (Heat Index) या 'फील्स लाइक' टेम्परेचर के जरिए मापते हैं, जो इन दिनों सामान्य से कहीं अधिक दर्ज किया जा रहा है।

क्यों भट्टी बन रहे हैं हमारे शहर

पर्यावरण वैज्ञानिकों के अनुसार, इस जानलेवा उमस और गर्मी के पीछे जलवायु परिवर्तन (Climate Change) और अनियंत्रित शहरीकरण दो सबसे मुख्य कारण हैं। एक तरफ जहां तेजी से गर्म होते महासागर हवा में जरूरत से ज्यादा नमी ला रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ हमारे शहरों का बुनियादी ढांचा इस गर्मी को और कई गुना बढ़ा रहा है।

कंक्रीट की गगनचुंबी इमारतें, डामर (तारकोल) की सड़कें, सड़कों पर दौड़ते वाहनों का धुआं और दिन-रात चलने वाले एयर कंडीशनरों (AC) से निकलने वाली हीट इस समस्या को और गंभीर बना रही है। शहरों में पेड़-पौधों और हरित क्षेत्रों (Green Zones) की लगातार होती कमी के कारण भारतीय शहर अब अर्बन हीट आइलैंड (Urban Heat Island) में तब्दील हो चुके हैं। यही वजह है कि अब दिन के साथ-साथ रातें भी ठंडी नहीं हो पा रही हैं।

बढ़ती उमस से सेहत को बड़ा खतरा, अस्पतालों में बढ़े मरीज

मौसम में अचानक आए इस बदलाव और अत्यधिक उमस के कारण लोगों के स्वास्थ्य पर बेहद बुरा असर पड़ रहा है। डॉक्टरों के मुताबिक, इस चिपचिपी गर्मी की वजह से शरीर में पानी की कमी (निर्जलीकरण/Dehydration), हीट स्ट्रोक (लू लगना), दिल की बीमारियां, सांस लेने में तकलीफ (Respiratory Problems) और गुर्दे (Kidney) से संबंधित गंभीर बीमारियों का खतरा तेजी से बढ़ रहा है। इस मौसम का सबसे घातक असर दैनिक मजदूरी करने वाले बाहरी कामगारों, बुजुर्गों, छोटे बच्चों और पहले से बीमार चल रहे लोगों पर देखने को मिल रहा है। इसके अलावा, गर्मी से बचने के लिए एयर कंडीशनरों के अत्यधिक उपयोग के कारण बिजली की मांग रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई है, जिससे कार्बन उत्सर्जन भी तेजी से बढ़ रहा है।

सिर्फ हीट एक्शन प्लान काफी नहीं, विशेषज्ञों ने सुझाए ये लॉन्ग-टर्म उपाय

पर्यावरण विशेषज्ञों का स्पष्ट मानना है कि इस गंभीर संकट से निपटने के लिए अब केवल पारंपरिक 'हीट एक्शन प्लान' काफी नहीं हैं। यदि भविष्य में भारतीय शहरों को रहने लायक बनाना है, तो हमें दीर्घकालिक और ठोस कदम उठाने होंगे।

वैज्ञानिकों ने भारतीय शहरी नियोजन (Urban Planning) में बदलाव करते हुए ज्यादा से ज्यादा पेड़ लगाने, जल निकायों और जलाशयों का संरक्षण करने, इमारतों पर 'ठंडी छतें' (Cool Roofs) तकनीक का उपयोग करने, सूरज की रोशनी को वापस भेजने वाली परावर्तक निर्माण सामग्री का इस्तेमाल करने और घरों में बेहतर वेंटिलेशन सिस्टम विकसित करने की सलाह दी है।

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