इस राज्य की राजनीति में आया भूचाल; चुनाव आयोग ने एक झटके में काटे 20 लाख वोटर्स के नाम, मची खलबली
ओडिशा की राजनीति और चुनावी व्यवस्था से इस वक्त की एक बेहद चौंकाने वाली और बड़ी खबर सामने आ रही है। राज्य में रविवार को प्रकाशित हुई नई मसौदा मतदाता सूची (Draft Electoral Roll) के बाद हड़कंप मच गया है। चुनाव आयोग द्वारा चलाई गई विशेष गहन संशोधन (SIR) प्रक्रिया के तहत ओडिशा में एक झटके में करीब 20 लाख से अधिक मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट से पूरी तरह हटा दिए गए हैं। इस ऐतिहासिक और बड़े प्रशासनिक कदम की आधिकारिक पुष्टि खुद ओडिशा के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) एस. गोपालन ने की है। इस छंटनी के बाद राज्य की संशोधित मतदाता सूची में अब कुल वोटरों की संख्या घटकर करीब 3 करोड़ 13 लाख रह गई है। आयोग के मुताबिक, यह पूरी शुद्धिकरण प्रक्रिया इस साल 30 मई से 28 जून के बीच युद्धस्तर पर चलाई गई थी।
जानिए क्या है ओडिशा वोटर लिस्ट का नया गणित और आंकड़े?
ओडिशा के मुख्य निर्वाचन अधिकारी एस. गोपालन ने मीडिया एजेंसी एएनआई (ANI) से बातचीत करते हुए राज्य के नए जनसांख्यिकीय आंकड़े जारी किए हैं। उन्होंने बताया कि जब इस साल विशेष गहन संशोधन की प्रक्रिया शुरू की गई थी, तब राज्य में कुल 3 करोड़ 33 लाख पंजीकृत मतदाता थे। लेकिन व्यापक जांच और गड़बड़ियों को दूर करने के बाद अब सूची से 20 लाख मतदाताओं के नाम हटा दिए गए हैं।
वर्तमान आंकड़ों के अनुसार, ओडिशा में अब कुल 3 करोड़ 13 लाख 87 हजार 34 वैध मतदाता बचे हैं। चुनाव आयोग द्वारा जारी किए गए नए लैंगिक समीकरणों के मुताबिक इन कुल वोटरों में से:
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पुरुष मतदाता: 1 करोड़ 60 लाख 19 हजार 176
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महिला मतदाता: 1 करोड़ 53 लाख 65 हजार 83
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थर्ड जेंडर (तृतीय लिंग) मतदाता: 2,775
सीईओ ने यह भी स्पष्ट किया कि इस पूरी संशोधित वोटर लिस्ट की डिजिटल और प्रिंटेड कॉपियां राज्य के सभी मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों को समीक्षा के लिए उपलब्ध करा दी गई हैं।
आखिर क्यों काटे गए 20 लाख लोगों के नाम? सामने आई ये 3 बड़ी वजह
मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने विस्तार से जानकारी देते हुए बताया कि कुल 20,12,557 मतदाताओं के नाम सूची से हटाए जाने के पीछे कई अलग-अलग और ठोस तकनीकी कारण रहे हैं। चुनाव आयोग ने अपनी जांच में पाया कि:
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पता बदलना या अनुपस्थिति: सबसे बड़ा कारण पलायन रहा। लगभग 10 लाख 7 हजार मतदाताओं के नाम इसलिए हटाए गए क्योंकि वे लंबे समय से अपने दिए गए पते पर अनुपस्थित थे या अपना स्थायी पता बदल चुके थे।
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डुप्लिकेट वोटर्स: करीब 1 लाख मतदाता ऐसे पाए गए जिन्होंने चालाकी से या गलती से एक से अधिक मतदान केंद्रों या स्थानों पर अपना पंजीकरण करा रखा था।
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दस्तावेजों की कमी: लगभग 14 हजार मतदाताओं ने तय समय सीमा के भीतर अपने जरूरी फॉर्म और सहायक दस्तावेज जमा नहीं किए थे, जिसके चलते उनका नाम काटना पड़ा।
आयोग ने चौंकाने वाला खुलासा करते हुए बताया कि इस गहन संशोधन प्रक्रिया के दौरान पूरी वोटर लिस्ट में करीब 50 लाख से अधिक गंभीर अनियमितताएं और विसंगतियां उजागर हुई हैं, जिन्हें अब पूरी तरह ठीक कर लिया गया है।