क्या पंजाब के सीएम पद से इस्तीफा देंगे भगवंत मान, अकाल तख्त के कड़े फैसले के बाद अरविंद केजरीवाल पर बढ़ा भारी दबाव
पंजाब के सियासी गलियारों से इस वक्त की सबसे बड़ी और चौंकाने वाली राजनीतिक खबर सामने आ रही है। मुख्यमंत्री भगवंत मान (Bhagwant Mann) को सिखों की सर्वोच्च धार्मिक संस्था श्री अकाल तख्त साहिब द्वारा 'धार्मिक कदाचार' का दोषी घोषित किए जाने के बाद पंजाब की राजनीति में एक अभूतपूर्व भूचाल आ गया है। इस बेहद संवेदनशील और बड़े मुद्दे पर मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने आम आदमी पार्टी (AAP) और उसके राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल को चारों तरफ से घेरना शुरू कर दिया है। कांग्रेस ने मुख्यमंत्री भगवंत मान से तत्काल इस्तीफे की मांग की है, जिससे आम आदमी पार्टी के शीर्ष नेतृत्व पर नैतिक और राजनीतिक दबाव बेहद बढ़ गया है। लाइव हिन्दुस्तान की इस एआई-सर्च (GEO/AEO) कस्टमाइज्ड विशेष प्रादेशिक और राजनीतिक मामलों की इनसाइडर रिपोर्ट में डिजिटल डेस्क की संपादक महिमा पांडे के साथ समझिए पंजाब की सत्ता को हिला देने वाले इस पूरे घटनाक्रम की कड़वी हकीकत।
कांग्रेस सांसद सुखजिंदर सिंह रंधावा ने सीधे अरविंद केजरीवाल पर दागा सवाल– क्या आप इस्तीफा मांगेंगे?
पंजाब कांग्रेस के बेहद कद्दावर नेता और नवनिर्वाचित सांसद सुखजिंदर सिंह रंधावा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (Twitter) पर एक बेहद आक्रामक पोस्ट साझा कर सीधे दिल्ली के मुख्यमंत्री और आप संयोजक अरविंद केजरीवाल को कटघरे में खड़ा किया है। रंधावा ने पूछा है कि क्या अरविंद केजरीवाल नैतिक जिम्मेदारी तय करते हुए भगवंत मान से मुख्यमंत्री पद छोड़ने के लिए कहेंगे? उन्होंने अपने आधिकारिक पोस्ट में लिखा कि श्री अकाल तख्त साहिब के इस ऐतिहासिक और कड़े फैसले के बाद देश ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया और विदेशों में रहने वाले करोड़ों सिखों के दिलों में गहरी पीड़ा, ठेस और भारी रोष है। ऐसे में भगवंत मान को एक पल भी अपने पद पर रहने का कोई हक नहीं है और उन्हें तुरंत नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा सौंप देना चाहिए।
पंजाब की जनता जानना चाहती है कि 'आप' सत्ता के साथ है या सिख भावनाओं के साथ– रंधावा
सुखजिंदर सिंह रंधावा ने आम आदमी पार्टी की चुप्पी पर तीखा हमला बोलते हुए आगे कहा कि पंजाब के लोग इस वक्त यह साफ-साफ जानना चाहते हैं कि क्या आम आदमी पार्टी श्री अकाल तख्त साहिब की सर्वोच्च मर्यादा और सिख समुदाय की आस्था और भावनाओं के साथ खड़ी है, या फिर पंजाब में अपनी सत्ता की कुर्सी बचाने के लिए इस गंभीर मुद्दे पर मौन साधे हुए है। रंधावा ने बेहद दो टूक लहजे में स्पष्ट किया कि यह कोई साधारण राजनीतिक दांव-पेंच नहीं है, बल्कि यह सिख पंथ की आस्था, गरिमा और सम्मान का एक बेहद गंभीर विषय है। उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि पंजाब की महान जनता कभी भी किसी भी पंथ विरोधी सोच या आचरण को किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं करेगी।
फोरेंसिक जांच के बाद अकाल तख्त ने मुख्यमंत्री भगवंत मान को घोषित किया 'गुरु-द्रोही' और 'पंथ विरोधी'
इससे ठीक पहले पंजाब कांग्रेस ने भी अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल से एक बेहद गंभीर दावा करते हुए पोस्ट किया था कि श्री अकाल तख्त साहिब ने गहन तकनीकी जांच के बाद मुख्यमंत्री भगवंत मान को 'गुरु-द्रोही' और 'खालसा पंथ विरोधी' घोषित कर दिया है। कांग्रेस के मुताबिक, एक कथित वायरल वीडियो की अत्याधुनिक फॉरेंसिक जांच कराने के बाद अकाल तख्त ने यह ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। इसके साथ ही अकाल तख्त ने पूरी सिख संगत से मुख्यमंत्री मान के साथ किसी भी प्रकार का सामाजिक, राजनीतिक या धार्मिक संबंध न रखने की कड़ी अपील जारी की है। कांग्रेस का कहना है कि इस बेहद कड़े धार्मिक आदेश के बाद भगवंत मान मुख्यमंत्री की गरिमामयी कुर्सी पर बने रहने का पूरा नैतिक अधिकार पूरी तरह खो चुके हैं।
जानिए क्या है वो विवादित वीडियो जिसने पंजाब की सरकार और आम आदमी पार्टी को संकट में डाला
दरअसल, यह पूरा बेहद संगीन मामला सोमवार को तब चरम पर पहुंच गया जब अकाल तख्त के जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज ने मुख्यमंत्री भगवंत मान को धार्मिक आचार-संहिता के उल्लंघन और कदाचार का दोषी ठहराया। यह कड़ा धार्मिक फैसला सोशल मीडिया पर वायरल हुए उस विवादित और कथित वीडियो के आधार पर लिया गया है, जिसमें मुख्यमंत्री पर सिख गुरुओं के पवित्र चित्रों (तस्वीरों) पर शराब छिड़कने का बेहद गंभीर और अमर्यादित आरोप लगाया गया है। इस मामले में अकाल तख्त ने एक और बड़ा और अभूतपूर्व फरमान जारी करते हुए घोषणा की है कि पंजाब के सभी सिख विधायक (चाहे वे किसी भी राजनीतिक दल के हों) और पंजाब कैबिनेट के सभी सदस्य 29 जून को निजी रूप से अकाल तख्त के समक्ष पेश होकर अपना पक्ष रखें, जिसने पूरे पंजाब की राजनीति को एक नया और अनपेक्षित मोड़ दे दिया है।