व्रत में क्यों अमृत समान माना जाता है सेंधा नमक? जानें मन और सुख के ग्रहों से इसका अनोखा कनेक्शन
सनातन धर्म में तीज-त्यौहारों और व्रतों के दौरान साधारण नमक का सेवन पूरी तरह वर्जित होता है, लेकिन सेंधा नमक (Rock Salt) का उपयोग धड़ल्ले से किया जाता है। क्या आपने कभी सोचा है कि ऐसा क्यों है? दरअसल, इसके पीछे केवल खान-पान का नियम नहीं, बल्कि गहरा वैज्ञानिक आधार और ज्योतिष शास्त्र में मन व सुख के कारक ग्रहों से जुड़ा एक बेहद दिलचस्प रहस्य छिपा है, जो व्रत रखने वाले हर व्यक्ति के लिए जानना जरूरी है।
पूरी तरह शुद्ध और सात्विक है सेंधा नमक का आधार
साधारण सफेद नमक को समुद्र के पानी से तैयार किया जाता है, जिसे शुद्ध करने के लिए कई तरह के केमिकल्स और रिफाइनिंग प्रोसेस से गुजरना पड़ता है, जिससे यह तामसिक और अशुद्ध हो जाता है। इसके विपरीत, सेंधा नमक पूरी तरह प्राकृतिक और शुद्ध होता है। यह पहाड़ों की चट्टानों से सीधे प्राप्त होता है। इसमें किसी भी प्रकार का केमिकल या मिलावट नहीं होती, जिसके कारण इसे पूरी तरह सात्विक और पवित्र माना गया है, जो व्रत की शुद्धता को बनाए रखता है।
चंद्रमा और शुक्र ग्रह से है इसका सीधा ज्योतिषीय संबंध
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, सेंधा नमक का सीधा संबंध हमारे मन के कारक ग्रह 'चंद्रमा' और भौतिक सुख-समृद्धि के कारक ग्रह 'शुक्र' से है। व्रत के दौरान अन्न न खाने से शरीर और मन में जो अस्थिरता या कमजोरी आती है, उसे सेंधा नमक संतुलित करता है। यह शरीर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है, जिससे मानसिक तनाव कम होता है और एकाग्रता बढ़ती है। यही वजह है कि इसके सेवन से व्रत के दौरान मन शांत और आध्यात्मिक ऊर्जा से भरपूर रहता है।