Up kiran,Digital Desk : अमेरिका और ईरान के बीच जारी संघर्ष अब एक ऐसे मोड़ पर पहुंच गया है जहां से पूर्ण युद्ध का खतरा मंडराने लगा है। मंगलवार को ईरान ने अमेरिका को अब तक की सबसे कठोर चेतावनी देते हुए कहा कि यदि किसी भी देश ने उसकी संप्रभुता का उल्लंघन करने या जमीनी हमला करने की जुर्रत की, तो उसके 'पैर काट दिए जाएंगे'। यह बयान ऐसे समय में आया है जब डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ईरान के खिलाफ सैन्य रणनीति में बदलाव के संकेत दे रहा है।
जमीनी हमले पर चेचन लड़ाकों का मिलेगा साथ
ईरानी रिवॉल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के प्रवक्ता इब्राहिम जोलफाघरी ने सरकारी मीडिया 'प्रेस टीवी' के जरिए दुनिया को कड़ा संदेश भेजा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि ईरान की सशस्त्र सेनाएं किसी भी आक्रमणकारी को सबक सिखाने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इस युद्ध में अब रूस के चेचन लड़ाकों (Chechen Fighters) की एंट्री की खबर है। दावा किया जा रहा है कि यदि अमेरिका जमीनी स्तर पर सेना उतारता है, तो चेचन लड़ाके ईरान की ओर से मोर्चे पर तैनात हो सकते हैं।
क्या झुक रहे हैं ट्रंप? 6 हफ्ते में युद्ध विराम के संकेत
दूसरी ओर, 'वॉल स्ट्रीट जर्नल' (WSJ) की एक रिपोर्ट ने सबको हैरान कर दिया है। रिपोर्ट के अनुसार, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अब ईरान के खिलाफ चल रहे सैन्य अभियान को धीरे-धीरे कम करने पर विचार कर रहे हैं। ट्रंप ने अपने करीबियों से कहा है कि वे अगले 4 से 6 हफ्तों में इस संघर्ष को समेटना चाहते हैं। ट्रंप का मानना है कि अमेरिका ने ईरान की नौसेना और मिसाइल क्षमताओं को पर्याप्त नुकसान पहुंचाकर अपने मुख्य सैन्य लक्ष्य हासिल कर लिए हैं। ऐसे में अब कूटनीति (Diplomacy) के जरिए रास्ता निकालने पर जोर दिया जा सकता है, भले ही होर्मुज जलडमरूमध्य फिलहाल बंद रहे।
होर्मुज जलडमरूमध्य पर ईरान का 'टोल टैक्स' प्लान
युद्ध के बीच ईरान ने अपनी संसद में एक बड़ा मास्टरप्लान पास किया है। 'होर्मुज जलडमरूमध्य प्रबंधन योजना' के तहत अब इस रास्ते से गुजरने वाले जहाजों पर रियाल (Rial) आधारित शुल्क यानी टोल टैक्स लगाया जाएगा।
प्रतिबंध: अमेरिकी और इस्राइली जहाजों के गुजरने पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया है।
जवाबदेही: ईरान के खिलाफ प्रतिबंध लगाने वाले देशों के जहाजों को भी इस मार्ग के इस्तेमाल की अनुमति नहीं मिलेगी।
ओमान की भूमिका: ईरान अब ओमान के साथ मिलकर इस समुद्री मार्ग के लिए एक नया कानूनी ढांचा तैयार करने की योजना बना रहा है।
दुनिया के कुल तेल व्यापार का एक बड़ा हिस्सा इसी जलमार्ग से गुजरता है, ऐसे में ईरान का यह कदम वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए बड़ा झटका साबित हो सकता है।




