होटल के कमरे में होने वाली थी 40 लाख की बड़ी डील

होटल के कमरे में होने वाली थी 40 लाख की बड़ी डील

भारत के वन्यजीव संरक्षण और जंगलों के भीतर चल रहे अवैध शिकार के काले कारोबार के खिलाफ वन विभाग (Forest Department) और एंटी-पोचिंग टास्क फोर्स ने एक बहुत ही सनसनीखेज और फिल्मी अंदाज में कार्रवाई को अंजाम दिया है। उत्तर प्रदेश के एक प्रतिष्ठित और नामी होटल के कमरे के भीतर वन्यजीवों के अंगों की तस्करी का एक बड़ा सौदा चल रहा था। तस्करों ने दुर्लभ वन्यजीव तेंदुए की खाल और उसके बेशकीमती नाखूनों को बेचने के लिए पूरे 40 लाख रुपये की भारी-भरकम कीमत तय की थी। इस गुप्त सूचना पर कार्रवाई करते हुए स्थानीय पुलिस और वन विभाग की संयुक्त टीम ने खुद को अमीर ग्राहक (Dummy Customers) बनकर उस होटल में एंट्री ली और तस्करों के मंसूबों पर पानी फेरते हुए रंगे हाथों तीन शातिर तस्करों को दबोच लिया। उनके कब्जे से तेंदुए की खाल, पंजे और नाखून बरामद किए गए हैं। आइए एक इन्वेस्टिगेटिव और क्राइम रिपोर्टर की नजर से गहराई से जानते हैं कि इस सीक्रेट ऑपरेशन की इनसाइड स्टोरी क्या है और कैसे इस अंतरराष्ट्रीय वन्यजीव तस्करी रैकेट का पर्दाफाश हुआ है।

कैसे रची गई थी 40 लाख की इस अवैध डील की साजिश और क्या थी तस्करों की योजना?

वन विभाग के उच्च अधिकारियों को पिछले कुछ दिनों से लगातार यह खुफिया इनपुट मिल रहा था कि उत्तर प्रदेश के तराई और जंगलों से सटे इलाकों में सक्रिय कुछ वन्यजीव तस्कर एक बहुत बड़ी डील की फिराक में हैं। तस्करों ने इस बार किसी सुनसान जंगल या हाईवे के बजाय अपनी योजना को बेहद शातिर तरीके से अंजाम देने के लिए एक आरामदेह होटल के कमरे को चुना ताकि किसी को शक न हो। तेंदुए की खाल (Leopard Skin) और उसके नाखूनों (Leopard Claws) की अंतरराष्ट्रीय काले बाजार में भारी मांग को देखते हुए इस पूरी खेप की कीमत 40 लाख रुपये आंकी गई थी। तस्करों ने देश के बड़े खरीदारों से संपर्क साधा था और वे एडवांस रकम लेकर इस बेशकीमती वन्यजीव अवशेष को सौंपने की पूरी तैयारी कर चुके थे। लेकिन वे इस बात से पूरी तरह से अनजान थे कि खाकी और वन विभाग की पैनी नजरें उन तक पहले ही पहुंच चुकी हैं।

ग्राहक बनकर होटल के कमरे में घुसी वन विभाग की टीम और बिछाया ऐसा जाल

मुखबिर की पुख्ता सूचना मिलते ही वन विभाग के अधिकारियों ने एक विशेष दल का गठन किया और योजनाबद्ध तरीके से जाल बिछाया। टीम के कुछ शातिर अधिकारियों ने साधारण कपड़ों में अमीर वन्यजीव प्रेमी या खरीदार बनकर उस होटल में कमरा बुक किया और तस्करों से संपर्क साधा। तस्करों को यह जरा भी भनक नहीं लगी कि वे जिन्हें ग्राहक समझकर अपना माल बेचने आए हैं, असल में वे कानून के रखवाले हैं। जैसे ही तस्करों ने होटल के कमरे के अंदर अपने बैग से तेंदुए की खाल और नाखून निकालकर खरीदार बने अधिकारियों को दिखाए, वैसे ही अंदर का माहौल पूरी तरह बदल गया। अधिकारियों ने इशारा करते ही होटल के बाहर और गलियारों में मुस्तैद अन्य पुलिसकर्मियों व वन कर्मियों को अंदर बुला लिया और पलक झपकते ही तीनों तस्करों को चारों तरफ से दबोच लिया।

बरामद हुए तेंदुए के अवशेष: वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत दर्ज हुआ गंभीर मामला

छापेमारी के दौरान तस्करों के पास से जो सामान बरामद हुआ, उसने अधिकारियों के भी होश उड़ा दिए। उनके पास से एक पूरी वयस्क तेंदुए की खाल और दर्जनों नुकीले नाखून व पंजे बरामद किए गए हैं, जो इस बात का स्पष्ट प्रमाण हैं कि तस्करों ने किसी स्वस्थ तेंदुए का शिकार करने के बाद उसके शरीर के अंगों को बहुत ही शातिर तरीके से संरक्षित किया था। पकड़े गए तीनों आरोपियों से कड़ाई से पूछताछ की जा रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि उन्होंने इस तेंदुए का शिकार खुद किया था या फिर वे किसी बड़े अंतरराष्ट्रीय वन्यजीव तस्कर सिंडिकेट (Wildlife Smuggling Syndicate) के छोटे मोहरे मात्र हैं। उनके मोबाइल फोन की कॉल डिटेल्स और चैट खंगाली जा रही है ताकि यह सामने आ सके कि इस खेप को आगे किस देश या राज्य में सप्लाई किया जाना था। आरोपियों के खिलाफ वन्यजीव संरक्षण अधिनियम (Wildlife Protection Act) की गंभीर धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया गया है और उन्हें अदालत में पेश कर रिमांड पर लेने की तैयारी की जा रही है।

जंगलों में बेखौफ घूम रहे शिकारियों पर वन विभाग का कड़ा प्रहार और भविष्य की चुनौतियां

भारत के जंगलों में बाघों और तेंदुओं जैसे संरक्षित वन्यजीवों का शिकार करने वाले ये तस्कर पर्यावरण और जैव विविधता के लिए सबसे बड़ा खतरा बनते जा रहे हैं। आए दिन इस तरह के मामले सामने आते हैं जहाँ लालच में आकर कुछ लोग बेजुबान जानवरों की जान ले लेते हैं और उनके अंगों को करोड़ों में बेचते हैं। वन विभाग की इस साहसिक और सफल कार्रवाई से वन्यजीव तस्करों के बीच हड़कंप मच गया है और यह एक कड़ा संदेश गया है कि कानून की नजरों से बचना नामुमकिन है। पर्यावरण प्रेमियों और सामाजिक संगठनों ने वन विभाग की इस टीम की सराहना की है और मांग की है कि इस पूरे नेटवर्क के सरगनाओं को जल्द से जल्द बेनकाब किया जाए ताकि हमारे जंगलों के असली राजा कहे जाने वाले इन वन्यजीवों का अस्तित्व सुरक्षित रह सके।