धनबाद में फिर भू-धसान, आधा दर्जन घर हुए जमींदोज, बाल-बाल बचे पीड़ित परिवार

धनबाद में फिर भू-धसान, आधा दर्जन घर हुए जमींदोज, बाल-बाल बचे पीड़ित परिवार

कोयलांचल के नाम से मशहूर झारखंड के धनबाद जिले में भूमिगत आग (Underground Fire) और भू-धसान (Land Subsidence) का खतरा एक बार फिर डरावनी शक्ल में सामने आया है। जिले के एक घनी आबादी वाले इलाके में अचानक धरती धंसने से भारी तबाही मच गई। इस भयानक हादसे में आधा दर्जन से ज्यादा पक्के मकान पलक झपकते ही जमींदोज हो गए। गनीमत यह रही कि समय रहते स्थानीय लोगों को आहट मिल गई, जिससे परिवारों ने भागकर अपनी जान बचाई और एक बड़ा जानी नुकसान टल गया, लेकिन इस घटना ने लोगों के सिर से छत छीन ली है।

अचानक धंसने लगी धरती, मच गई अफरा-तफरी

घटना के चश्मदीदों के मुताबिक, जमीन के भीतर से अचानक तेज आवाजें आने लगीं और देखते ही देखते सड़कों व घरों की दीवारों में बड़ी-बड़ी दरारें पड़ने लगीं। कुछ ही पलों में जमीन का एक बड़ा हिस्सा धंस गया, जिसकी चपेट में आकर आसपास बने आधा दर्जन मकान मलबे के ढेर में तब्दील हो गए। इस अचानक हुए हादसे से पूरे इलाके में अफरा-तफरी मच गई। लोग अपनी जान बचाने के लिए चीखते-पुकारते हुए घरों से बाहर भागे। हादसे के बाद से पीड़ित परिवारों के सामने सिर छिपाने का संकट खड़ा हो गया है।

बीसीसीएल (BCCL) की खदानों और अवैध खनन का दंश

धनबाद में इस तरह की घटनाएं नई नहीं हैं, लेकिन प्रशासन और कोयला कंपनियों की अनदेखी के कारण आम जनता की जिंदगी हमेशा दांव पर लगी रहती है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि भूमिगत कोयला खदानों में लगी आग और अवैध खनन (Illegal Mining) के चलते यहां की जमीन खोखली हो चुकी है। हल्की सी हलचल या बारिश के बाद अक्सर ऐसे खतरनाक हालात बन जाते हैं। प्रशासन के तमाम दावों के बावजूद असुरक्षित क्षेत्रों में रहने वाले लोगों का पुनर्वास (Rehabilitation) नहीं हो पाया है, जिसका खामियाजा गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों को अपनी आशियाना गंवाकर चुकाना पड़ रहा है।

प्रशासन और प्रबंधन के खिलाफ फूटा लोगों का गुस्सा

इस दिल दहला देने वाली घटना के बाद स्थानीय निवासियों और विस्थापितों का गुस्सा फूट पड़ा है। लोगों ने जिला प्रशासन और बीसीसीएल (BCCL) प्रबंधन के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया। पीड़ितों की मांग है कि उन्हें तुरंत सुरक्षित स्थान पर बसाया जाए और ध्वस्त हुए मकानों का उचित मुआवजा तथा रहने के लिए वैकल्पिक व्यवस्था दी जाए। सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे और स्थिति को नियंत्रित करने के साथ ही राहत एवं बचाव कार्य शुरू कर दिया है।

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