झारखंड में एसआईआर के बाद बड़ा बदलाव, मतदाता सूची से 43 लाख से ज्यादा वोटर्स के नाम डिलीट

झारखंड में एसआईआर के बाद बड़ा बदलाव, मतदाता सूची से 43 लाख से ज्यादा वोटर्स के नाम डिलीट

भारतीय निर्वाचन आयोग (ECI) के निर्देश पर झारखंड में चलाए गए विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) अभियान के बाद राज्य की मतदाता सूची का नया ड्राफ्ट प्रकाशित कर दिया गया है। इस प्रक्रिया के पूरा होने के बाद झारखंड के राजनीतिक गलियारों और आम जनता के बीच हलचल तेज हो गई है, क्योंकि पब्लिश हुई नई ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से 43 लाख से अधिक मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं। राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) के. रवि कुमार ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर इन तमाम बदलावों और आंकड़ों की विस्तृत जानकारी साझा की है। चुनाव आयोग के इस कदम से राज्य के चुनावी समीकरण और कुल मतदाताओं के आंकड़ों में बड़ा फेरबदल देखने को मिला है।

घटकर 2.21 करोड़ हुई मतदाताओं की कुल संख्या

झारखंड में एसआईआर (Special Intensive Revision) की प्रक्रिया शुरू होने से पहले राज्य में कुल पंजीकृत मतदाताओं की संख्या 2,64,63,236 यानी करीब 2.64 करोड़ थी। निर्वाचन आयोग के मुताबिक 30 जून से 29 जुलाई के बीच चले घर-घर एन्यूमरेशन (गणना) चरण के दौरान कुल 2,21,01,249 यानी लगभग 2.21 करोड़ मतदाताओं ने अपने गणना प्रपत्र भरकर जमा किए, जो कुल मतदाताओं का 83.51 प्रतिशत हिस्सा है। इस प्रकार वेरिफिकेशन और जांच के बाद जो नई ड्राफ्ट मतदाता सूची सामने आई है, उसमें अब कुल 2.21 करोड़ योग्य मतदाता दर्ज हैं। इस पूरी प्रक्रिया में राज्य के सभी नौ मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के 77,430 बूथ लेवल एजेंटों (BLAs) ने भी सक्रिय रूप से हिस्सा लिया है।

नाम कटने के पीछे क्या रहे मुख्य कारण

मतदाता सूची से 43,61,987 यानी 43 लाख से ज्यादा नाम हटने के पीछे चुनाव आयोग ने एएसडीडी (Absent, Shifted, Dead, Duplicate) यानी अनुपस्थित, स्थानांतरित, मृत और दोहरी प्रविष्टि वाले श्रेणियों को मुख्य वजह बताया है। मुख्य निर्वाचन अधिकारी के अनुसार हटाए गए कुल नामों में से लगभग 7.63 लाख मतदाता ऐसे थे जिनकी मृत्यु हो चुकी है, जबकि 15.92 लाख लोग स्थायी रूप से अपनी पुरानी जगह छोड़कर कहीं और शिफ्ट हो चुके हैं। इसके अलावा करीब 14.50 लाख मतदाता ऐसे पाए गए जो बीएलओ (BLO) की घर-घर सत्यापन प्रक्रिया के दौरान मिले ही नहीं या जिनका कोई अतापता नहीं चल सका। वहीं, लगभग 4.38 लाख लोग ऐसे मिले जिनके नाम एक से अधिक स्थानों पर मतदाता के रूप में दर्ज थे और करीब 1.16 लाख मतदाताओं ने एन्यूमरेशन फॉर्म पर हस्ताक्षर करने या उसे वापस करने से ही इनकार कर दिया था।

नाम छूटने वाले मतदाताओं के लिए राहत और आगे का शेड्यूल

चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि ड्राफ्ट सूची से नाम हटने का यह मतलब नहीं है कि वे हमेशा के लिए मतदाता सूची से बाहर हो गए हैं। जिन पात्र नागरिकों के नाम इस ड्राफ्ट सूची में शामिल नहीं हो पाए हैं, वे घबराएं नहीं बल्कि 5 अगस्त से 4 सितंबर तक चलने वाली 'दावा और आपत्ति' अवधि के दौरान फॉर्म-6 भरकर और जरूरी घोषणापत्र के साथ अपना नाम दोबारा जुड़वा सकते हैं। इसके अलावा जो युवा 1 अक्टूबर तक या उससे पहले 18 वर्ष की आयु पूरी कर चुके हैं या करने वाले हैं, वे भी नए वोटर के रूप में आवेदन कर सकते हैं। ऐसे नए और छूटे हुए मतदाताओं की सुविधा के लिए झारखंड भर में आगामी 8, 9, 22 और 23 अगस्त को विशेष शिविर (Special Camps) भी आयोजित किए जाएंगे। इस पूरी प्रक्रिया के तहत नोटिस और सुनवाई का चरण 3 अक्टूबर को समाप्त होगा और अंततः 7 अक्टूबर 2026 को झारखंड की अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित कर दी जाएगी।

 

Latest Posts