जीवित मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाने का गंभीर आरोप, थाने पहुंचीं दर्जनों महिलाएं
झारखंड के गिरिडीह जिले से एक बेहद चौंकाने वाला और सनसनीखेज मामला सामने आया है, जिसने प्रशासनिक तंत्र और राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है। राज्य में चल रही विशेष मतदाता सूची पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया के दौरान गिरिडीह के पचंबा थाना क्षेत्र अंतर्गत जीवित मतदाताओं के नाम साजिश के तहत मतदाता सूची से काटने का गंभीर आरोप लगाया गया है। स्थानीय वार्ड संख्या-2 से ताल्लुक रखने वाली कई महिलाओं समेत लगभग 20 से 25 मतदाताओं के नाम सूची से हटाने के लिए चुपचाप फॉर्म नंबर-7 जमा किए जाने का मामला प्रकाश में आया है। हैरानी की बात यह है कि जो लोग पूरी तरह से जीवित हैं और अपने वर्तमान पते पर ही निवास कर रहे हैं, उन्हें मृत या स्थानांतरित दिखाकर सूची से बाहर करने की इस कोशिश ने इलाके में भारी आक्रोश पैदा कर दिया है। इस गंभीर अनियमितता के विरोध में दर्जनों की संख्या में स्थानीय महिलाएं और राजनीतिक दलों के कार्यकर्ता थाने पहुंचे और इस मामले में निष्पक्ष जांच तथा दोषियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की मांग को लेकर लिखित शिकायत दर्ज कराई। आइए इस पूरी घटना और इससे जुड़े प्रशासनिक व राजनीतिक घटनाक्रम के हर एक पहलू को विस्तार से समझते हैं।
क्या है पूरा मामला और कैसे हुआ जीवित मतदाताओं के नाम सूची से गायब होने का खुलासा?
यह पूरा मामला तब प्रकाश में आया जब पचंबा थाना क्षेत्र के वार्ड संख्या-2 की रहने वाली शाहिदा खातून और अन्य स्थानीय मतदाताओं को यह भनक लगी कि उनके नाम मतदाता सूची से हटाने की प्रक्रिया चल रही है। शाहिदा खातून, जो कि शहादत अंसारी की पत्नी हैं और भाग संख्या-4 की वैध मतदाता हैं, उन्होंने थाने में दिए गए अपने औपचारिक आवेदन में बताया कि वह पूरी तरह से स्वस्थ और जीवित हैं तथा वर्तमान पते पर ही रह रही हैं। इसके बावजूद किसी अज्ञात व्यक्ति या विरोधी पक्ष द्वारा उनकी नागरिकता और मताधिकार को प्रभावित करने की दुर्भावना से फॉर्म नंबर-7 भरकर जमा कर दिया गया। जब इस बात की जानकारी अन्य पड़ोसियों और स्थानीय लोगों को हुई, तो जांच करने पर पता चला कि अकेले उसी वार्ड के लगभग 20 से 25 ऐसे मतदाताओं के नाम इस सूची से हटाने के लिए आवेदन दिए गए हैं जो अपने घरों में पूरी तरह से जीवित और मौजूद हैं। इस खुलासे के बाद स्थानीय जनता के सब्र का बांध टूट गया और उन्होंने इसे सीधे तौर पर उनके लोकतांत्रिक अधिकारों पर एक बड़ा हमला करार दिया।
थाने पहुंचे सैकड़ों ग्रामीण और झारखंड मुक्ति मोर्चा के नेता, प्रशासनिक लापरवाही पर उठाए गंभीर सवाल
इस सनसनीखेज गड़बड़ी के सामने आने के बाद इलाके में भारी तनाव का माहौल बन गया और सैकड़ों की संख्या में ग्रामीण तथा महिलाएं विरोध प्रदर्शन करते हुए सीधे पचंबा थाना पहुंच गए। इस मामले की गंभीरता को देखते हुए झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) के जिलाध्यक्ष संजय सिंह, डिप्टी मेयर सुमित कुमार सहित पार्टी के कई प्रमुख नेता और कार्यकर्ता भी थाने पहुंचे और पुलिस अधिकारियों से मुलाकात की। झामुमो नेताओं ने कड़े शब्दों में आरोप लगाया कि इस तरह से सुनियोजित तरीके से जीवित मतदाताओं के नाम सूची से गायब करना एक बड़ा चुनावी षड्यंत्र हो सकता है। उन्होंने जिला प्रशासन और निर्वाचन आयोग के स्थानीय अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए मांग की कि इस बात की गहराई से जांच होनी आखिर किस बीएलए (BLA) या अन्य व्यक्ति द्वारा इन फर्जी आवेदनों को आगे बढ़ाया गया है। नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि समय रहते इस गड़बड़ी को नहीं सुधारा गया, तो जनता बड़ा आंदोलन करने के लिए बाध्य होगी।
मतदाता सूची पुनरीक्षण प्रक्रिया और फॉर्म नंबर-7 के दुरुपयोग पर उठ रहे हैं तमाम सवाल
इन दिनों निर्वाचन आयोग द्वारा मतदाता सूचियों को त्रुटिमुक्त बनाने के लिए विशेष अभियान चलाए जा रहे हैं, जिसके तहत मृत, स्थानांतरित या दोहरी प्रविष्टि वाले अवांछित नामों को हटाने के लिए फॉर्म-7 का इस्तेमाल किया जाता है। लेकिन गिरिडीह की इस घटना ने इस पूरी प्रक्रिया की पारदर्शिता और मैदानी स्तर पर इसकी निगरानी व्यवस्था की पोल खोलकर रख दी है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि जब कोई मतदाता अपने घर पर ही मौजूद है और बीएलए या बूथ स्तर के अधिकारियों को इसकी पूरी जानकारी है, तब भी इस तरह के फर्जी आवेदन स्वीकार कैसे किए जा रहे हैं? यह इस बात की ओर इशारा करता है कि कुछ लोग राजनीतिक या व्यक्तिगत स्वार्थ के चलते जानबूझकर वास्तविक मतदाताओं के मताधिकार को छीनने की साजिश रच रहे हैं। पुलिस प्रशासन ने इस मामले में आवेदन प्राप्त करने के बाद जांच शुरू कर दी है और यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि इन फॉर्म्स के पीछे असल में किन लोगों का हाथ है।
स्वतंत्र और निष्पक्ष लोकतांत्रिक प्रक्रिया के लिए कड़ी कार्रवाई की उठी मांग
लोकतंत्र की सबसे बड़ी खूबसूरती निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव होती है, जिसकी नींव एक सटीक और त्रुटिमुक्त मतदाता सूची पर टिकी होती है। यदि शुरुआती स्तर पर ही इस प्रकार की धांधली और जीवित लोगों के नाम मतदाता सूची से काटने के प्रयास सामने आने लगें, तो चुनाव की निष्पक्षता पर सवाल उठना स्वाभाविक है। गिरिडीह के पचंबा क्षेत्र की इस घटना ने पूरे राज्य में एक नई बहस छेड़ दी है। अब सभी की निगाहें जिला निर्वाचन अधिकारी और पुलिस प्रशासन की जांच पर टिकी हैं कि वे इस मामले में कितना सख्त कदम उठाते हैं और क्या उन जिम्मेदार तत्वों को बेनकाब कर पाते हैं जिन्होंने फर्जी दस्तावेजों या जानकारियों के आधार पर इस तरह के आपत्तिजनक आवेदन दाखिल किए थे।