JPSC-JSSC अभ्यर्थियों की 10 सदस्यीय टीम और सरकार के बीच पहले चरण की वार्ता संपन्न, छात्र बोले- 'मांगें पूरी होने तक जारी रहेगा प्रदर्शन'
झारखंड में प्रतियोगी परीक्षाओं और छात्रों के भविष्य को लेकर चल रहा घमासान अभी थमता नजर नहीं आ रहा है। राजधानी रांची में झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) के अभ्यर्थियों के आंदोलन के बीच सरकार और छात्रों के प्रतिनिधियों के बीच पहले चरण की उच्चस्तरीय वार्ता संपन्न हो गई है। छात्रों की 10 सदस्यीय टीम ने प्रशासनिक अधिकारियों और सरकार के नुमाइंदों के सामने अपनी सभी प्रमुख मांगें मजबूती से रखीं। हालांकि, पहली दौर की बैठक के बाद भी छात्रों ने साफ कर दिया है कि जब तक उनकी सभी मांगें पूरी तरह मान नहीं ली जातीं, तब तक उनका यह विरोध प्रदर्शन और आंदोलन लगातार जारी रहेगा।
पहले चरण की वार्ता में क्या रहा मुख्य एजेंडा?
छात्रों और सरकार के प्रतिनिधियों के बीच हुई इस बैठक में मुख्य रूप से परीक्षाओं में पारदर्शिता, समय पर रिजल्ट जारी करने, उम्र सीमा में छूट और धांधली के खिलाफ सख्त कार्रवाई जैसे गंभीर मुद्दों पर चर्चा हुई।
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छात्रों का पक्ष: अभ्यर्थियों की 10 सदस्यीय टीम ने एक सुर में कहा कि राज्य में युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने JPSC और JSSC की परीक्षाओं से जुड़ी तमाम प्रशासनिक कमियों को दूर करने का ज्ञापन सौंपा।
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शासन-प्रशासन का रुख: अधिकारियों ने छात्रों की बातों को गंभीरता से सुनने का आश्वासन दिया है, लेकिन किसी ठोस और अंतिम निष्कर्ष पर न पहुंचने के कारण छात्र पूरी तरह संतुष्ट नजर नहीं आए।
'मांगें पूरी होने तक जारी रहेगा आंदोलन' - अड़े हैं छात्र
प्रशासन के साथ पहले दौर की बातचीत बेनतीजा रहने के बाद छात्र नेताओं और आंदोलनकारी अभ्यर्थियों ने हुंकार भरी है कि उनका प्रदर्शन रुकने वाला नहीं है।
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सड़क से हटने से इनकार: छात्र संघ का कहना है कि जब तक सरकार लिखित रूप में उनकी मांगों को पूरा करने का आदेश जारी नहीं करती, तब तक उनका धरना-प्रदर्शन और आंदोलन पूरी ताकत के साथ जारी रहेगा।
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बढ़ता जा रहा राजनीतिक और सामाजिक समर्थन: छात्रों के इस आंदोलन को राज्यभर के विभिन्न राजनीतिक दलों, छात्र संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का भी लगातार समर्थन मिल रहा है, जिससे यह मुद्दा झारखंड की राजनीति का सबसे बड़ा केंद्र बनता जा रहा है।