फांसी दो या इंसाफ; प्रोजेक्ट भवन का गेट तोड़कर अंदर घुसे आक्रोशित छात्र, झारखंड की सियासत में उबाल!

फांसी दो या इंसाफ; प्रोजेक्ट भवन का गेट तोड़कर अंदर घुसे आक्रोशित छात्र, झारखंड की सियासत में उबाल!

झारखंड सरकार द्वारा जेएसएससी-सीजीएल समेत कई प्रतियोगी परीक्षाओं को रद्द करने के फैसले के बाद राज्य में राजनीतिक और सामाजिक सरगर्मी तेज हो गई है। इस फैसले से प्रभावित होकर पहले से ही नौकरी कर रहे हजारों अभ्यर्थियों का गुस्सा फूट पड़ा है और वे लगातार विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। इस पूरी घटनाक्रम, विरोध प्रदर्शन और रद्द की गई परीक्षाओं से जुड़ी मुख्य जानकारियों को आप नीचे दिए गए विवरण के माध्यम से देख सकते हैं।

प्रोजेक्ट भवन के बाहर अभ्यर्थियों का जोरदार प्रदर्शन

झारखंड कर्मचारी चयन आयोग की सीजीएल परीक्षा और अन्य परीक्षाओं को रद्द करने के सरकार के आदेश के खिलाफ सैकड़ों अभ्यर्थी रांची के धुर्वा स्थित प्रोजेक्ट भवन के बाहर इकट्ठा होकर विरोध जता रहे हैं। प्रदर्शन के दौरान स्थिति तब बेहद तनावपूर्ण हो गई जब आक्रोशित अभ्यर्थियों ने सुरक्षा घेरे को तोड़ दिया और मुख्य गेट का ताला खोलकर जबरन परिसर के भीतर प्रवेश कर गए। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने 'न्याय दो या फांसी दो' और 'तानाशाही नहीं चलेगी' जैसे नारे लगाए तथा कई अभ्यर्थी जमीन पर बैठकर न्याय की गुहार लगाते नजर आए।

हजारों कर्मियों की नौकरी पर मंडराया संकट

राज्य सरकार के इस बड़े फैसले के दायरे में केवल आने वाली परीक्षाएं ही नहीं, बल्कि वे अभ्यर्थी भी आ गए हैं जो पहले से ही विभिन्न विभागों में अपनी सेवाएं दे रहे हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स और प्रशासनिक आंकड़ों के मुताबिक, विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं के रद्द होने से लगभग 2600 से अधिक नियुक्त पदाधिकारियों और कर्मचारियों का भविष्य अधर में लटक गया है। इनमें जेएसएससी-सीजीएल और 11वीं से 13वीं जेपीएससी के सफल अभ्यर्थी के अलावा फूड सेफ्टी ऑफिसर, सीडीपीओ और महिला पर्यवेक्षिका जैसे पदों पर कार्यरत कर्मी शामिल हैं। अभ्यर्थियों का कहना है कि उन्होंने पूरी कानूनी प्रक्रिया और अदालत की मंजूरी के बाद नौकरी ज्वाइन की थी, ऐसे में अचानक आए इस फैसले से उनकी आजीविका पर बड़ा संकट खड़ा हो गया है।

Latest Posts