'24 घंटे में दो पैसा, नहीं तो भुगतो अंजाम': प्रिंस खान की विधायक अरूप चटर्जी को सीधी धमकी, झारखंड की राजनीति में हड़कं
झारखंड में अपराध का ग्राफ एक बार फिर उस बिंदु पर पहुंच गया है जहाँ से कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। धनबाद के कुख्यात गैंगस्टर प्रिंस खान ने एक बार फिर अपनी दहशत का प्रदर्शन करते हुए निरसा के विधायक अरूप चटर्जी को खुली धमकी दी है। प्रिंस खान ने न केवल विधायक से रंगदारी मांगी है, बल्कि उन्हें '24 घंटे का अल्टीमेटम' देकर अंजाम भुगतने की चेतावनी दी है।
क्या है पूरा मामला?
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, गैंगस्टर प्रिंस खान ने सोशल मीडिया के माध्यम से एक ऑडियो जारी किया है, जिसमें उसने विधायक अरूप चटर्जी को सीधे तौर पर निशाना बनाया है। इस धमकी भरे ऑडियो में प्रिंस खान ने पैसों की मांग की है और चेतावनी दी है कि यदि 24 घंटे के भीतर मांग पूरी नहीं की गई, तो विधायक को इसके गंभीर परिणाम भुगतने होंगे। यह धमकी ऐसे समय में सामने आई है जब राज्य में कानून-व्यवस्था को लेकर प्रशासन पहले ही सख्त रुख अपनाने का दावा कर रहा है।
कौन है प्रिंस खान और क्यों है चर्चा में?
प्रिंस खान धनबाद का एक नामी अपराधी है, जिस पर हत्या, रंगदारी और डराने-धमकाने के दर्जनों मामले दर्ज हैं। वह लंबे समय से पुलिस की पकड़ से दूर है और अक्सर सोशल मीडिया के जरिए बड़े व्यापारियों, राजनेताओं और उद्योगपतियों को निशाना बनाकर रंगदारी वसूलने की कोशिश करता रहा है। विधायक को धमकी देना न केवल एक जन-प्रतिनिधि के सुरक्षा कवच पर सवाल खड़े करता है, बल्कि यह बताता है कि अपराधियों के हौसले किस कदर बुलंद हो चुके हैं।
प्रशासन और सुरक्षा व्यवस्था पर उठ रहे सवाल
एक विधायक को सरेआम धमकी मिलना राज्य की सुरक्षा व्यवस्था के लिए बड़ी चुनौती है। राजनीतिक हलकों में इस घटना के बाद हड़कंप मच गया है। अरूप चटर्जी के समर्थकों और स्थानीय लोगों में आक्रोश है कि आखिर एक अपराधी की हिम्मत इतनी कैसे बढ़ गई कि वह खुलेआम कानून को चुनौती दे रहा है। फिलहाल, मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस विभाग अलर्ट मोड पर आ गया है और मामले की जांच शुरू कर दी गई है।
क्या कानून का डर खत्म हो चुका है?
प्रिंस खान की यह धमकी केवल एक व्यक्ति तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरे समाज के लिए एक संदेश है कि कैसे संगठित अपराध तंत्र का जाल फैला हुआ है। लोग अब सवाल कर रहे हैं कि क्या पुलिस का डर अपराधियों में खत्म हो चुका है? जन-प्रतिनिधियों को इस तरह की धमकियां मिलना इस बात का संकेत है कि अपराध पर लगाम कसने के लिए अब और भी सख्त और त्वरित कार्रवाई की आवश्यकता है।