JPSC-JSSC धांधली: आंदोलनरत छात्रों के समर्थन में उतरे बाबूलाल मरांडी, बोले- 'विधानसभा के अंदर और बाहर जोरदार तरीके से उठाएंगे आवाज'
झारखंड में प्रतियोगी परीक्षाओं में हो रही कथित धांधली और गड़बड़ियों को लेकर राज्य का सियासी पारा एक बार फिर चढ़ गया है। जेपीएससी (JPSC) और जेएसएससी (JSSC) परीक्षाओं में अनियमितताओं के खिलाफ पिछले काफी समय से सड़कों पर उतरकर शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्र-छात्राओं से मिलने भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष और वरिष्ठ नेता बाबूलाल मरांडी पहुंचे। इस दौरान उन्होंने आंदोलनरत छात्रों की समस्याओं को बेहद गंभीरता से सुना और उन्हें पूरा भरोसा दिलाया कि उनकी मांगों को राज्य के सबसे बड़े सदन यानी विधानसभा के भीतर और बाहर पूरी मजबूती के साथ उठाया जाएगा। छात्रों के इस प्रदर्शन ने एक बार फिर झारखंड में रोजगार और निष्पक्ष परीक्षा प्रणाली की मांग को लेकर राजनीतिक सरगर्मी तेज कर दी है।
छात्रों का दर्द और सड़क पर उबाल
राजधानी रांची समेत पूरे राज्य के युवा और अभ्यर्थी लंबे समय से विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक, धांधली, रिजल्ट में देरी और भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज बुलंद कर रहे हैं। छात्रों का आरोप है कि उनकी मेहनत और भविष्य के साथ लगातार खिलवाड़ किया जा रहा है, जिससे उनका मनोबल टूट रहा है। परीक्षा प्रक्रियाओं में पारदर्शिता की मांग को लेकर युवा लगातार प्रशासनिक और राजनीतिक स्तर पर हस्तक्षेप की गुहार लगा रहे हैं। इसी कड़ी में जब भाजपा नेता बाबूलाल मरांडी आंदोलन स्थल पर पहुंचे, तो छात्रों ने उन्हें अपनी एक-एक समस्या और परीक्षा संचालन में हो रही गड़बड़ियों के तमाम सबूतों से अवगत कराया।
सरकार पर बरसे बाबूलाल मरांडी, कहा- युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं
छात्रों की समस्याएं सुनने के बाद बाबूलाल मरांडी राज्य सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए नजर आए। उन्होंने कहा कि झारखंड के नौजवानों का भविष्य अंधकार में धकेला जा रहा है और परीक्षाओं में हो रही धांधली यह साबित करती है कि व्यवस्था में गहरी खामियां हैं। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि युवाओं का यह संघर्ष केवल उनका अपना नहीं, बल्कि पूरे राज्य के सम्मान और भविष्य का सवाल है। मरांडी ने भरोसा दिलाया कि वे इस गंभीर मुद्दे को आगामी विधानसभा सत्र में प्रमुखता से उठाएंगे और सरकार को जवाबदेह बनाएंगे ताकि दोषी अधिकारियों और एजेंसियों पर कड़ी कार्रवाई हो सके और परीक्षाओं में पूरी पारदर्शिता सुनिश्चित की जा सके।