जेएसएससी घोटाला: 50 नंबर कम वाले बने अधिकारी, और पास होकर भी धक्के खा रहे हैं असली हकदार!
झारखंड की राजधानी रांची स्थित ऐतिहासिक जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में इन दिनों सरकारी परीक्षाओं में लगातार सामने आ रही अनियमितताओं और धांधली के खिलाफ छात्रों का गुस्सा फूट पड़ा है। पिछले एक हफ्ते से अधिक समय से जारी इस धरना-प्रदर्शन में राज्य के कोने-कोने से अभ्यर्थी शामिल हो रहे हैं।
छात्रों का मुख्य सवाल यह है कि आखिर झारखंड सरकार एक भी बड़ी प्रतियोगी परीक्षा को विवादों के बिना पारदर्शी तरीके से क्यों नहीं संपन्न करा पा रही है। इस आंदोलन को अब देश भर के छात्रों, विभिन्न राजनीतिक दलों और सिविल सोसाइटी समूहों का भारी समर्थन मिल रहा है, जबकि दूसरी ओर जांच एजेंसियों ने भी एक्शन लेते हुए गड़बड़ी के आरोप में अब तक 14 लोगों को गिरफ्तार किया है।
"मुझे नहीं पता भूख हड़ताल कैसे करते हैं": अनशन पर बैठे ब्रह्मानंद कुमार महतो
इस विरोध प्रदर्शन के केंद्र में रामगढ़ के रहने वाले ब्रह्मानंद कुमार महतो हैं, जो स्टेडियम में पिछले कई दिनों से आमरण अनशन पर बैठे हैं।
बॉटनी से पीएचडी कर रहे महतो ने 2023 में जेएसएससी (JSSC) की सिल्कवर्म रियरर परीक्षा पास की थी और इस आंदोलन में शामिल होने के लिए उन्होंने अपनी सेंट्रल सिल्क बोर्ड की नौकरी तक छोड़ दी। महतो का कहना है कि उन्हें पहले से नहीं पता था कि भूख हड़ताल कैसे की जाती है, क्योंकि उन्होंने कभी ऐसा नहीं किया था, लेकिन वे बस यहां आए, लेट गए और जब तक मांगों का समाधान नहीं होता, तब तक पीछे हटने को तैयार नहीं हैं।
एक दशक का लंबा इंतजार और अभ्यर्थियों की दर्दभरी दास्तां
इस प्रदर्शन में शामिल होने वाले अभ्यर्थियों की कहानियां बेहद झकझोर देने वाली हैं। धनबाद से आए 37 वर्षीय मोहम्मद शमशेर आलम ने बताया कि वे केवल एक छोटा सा कपड़ों का बैग लेकर आए थे और उन्हें नहीं पता था कि वापसी कब होगी।
उन्होंने आरोप लगाया कि जिन उम्मीदवारों के उनसे 50-60 नंबर कम थे, उन्हें नौकरियां मिल गईं, जबकि परीक्षा पास किए उन्हें 10 साल बीत चुके हैं और अब परिवार चलाने के लिए उन्हें प्राइवेट नौकरी करनी पड़ रही है। वहीं, लोहरदगा की 40 वर्षीय आनंदी कुमारी ने बताया कि वे 2016 में जेएसएससी टीजीटी परीक्षा पास कर चुकी हैं, लेकिन भ्रष्टाचार के कारण उनका चयन नहीं हुआ। अब वे उम्र सीमा पार कर चुकी हैं और उनकी बेटी उनसे पूछती है कि "मम्मी घर कब चलेंगी," लेकिन वे न्याय मिलने तक अडिग हैं।