'जिन्हें लाठीचार्ज दिखा ही नहीं वो मुलाकात क्यों करेंगे...': जेपीएससी आंदोलन में पुलिस कार्रवाई में घायल छात्रों का छलका दर्द, सरकार पर लगाए गंभीर आरोप
झारखंड की राजधानी रांची में जेपीएससी (JPSC) अभ्यर्थियों का आंदोलन अब बेहद संवेदनशील मोड़ पर पहुंच गया है। धरनास्थल पर हुई कथित पुलिस कार्रवाई और बल प्रयोग के दौरान गंभीर रूप से घायल हुए छात्रों का दर्द अब खुलकर सामने आने लगा है। अस्पताल और धरनास्थल पर मौजूद जख्मी छात्रों ने तीखे सवाल उठाते हुए कहा है कि "जिन्हें हमारा दर्द और लाठीचार्ज दिखा ही नहीं, वे हमसे मुलाकात क्यों करेंगे?" छात्रों के इस बयान और उनके जख्मों ने राज्य की सियासत में भूचाल ला दिया है, और हेमंत सोरेन सरकार पर मानवीय संवेदनाओं को ताक पर रखने के गंभीर आरोप लग रहे हैं।
"आधी रात को सोते हुए छात्रों पर बरसाई गई लाठियां"
घायल छात्रों ने आपबीती सुनाते हुए मीडिया को बताया कि वे पूरी तरह से शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगें रख रहे थे, लेकिन प्रशासन ने लोकतांत्रिक अधिकारों का गला घोटते हुए रात के अंधेरे में उन पर अचानक धावा बोल दिया। छात्रों का आरोप है कि पुलिस ने बिना किसी चेतावनी के बल प्रयोग किया, जिससे कई छात्र गंभीर रूप से घायल हो गए। लाठीचार्ज और भगदड़ में कई अभ्यर्थियों के हाथ-पैर में फ्रेक्चर आए हैं और सिर पर गंभीर चोटें लगी हैं। अस्पताल के बेड पर दर्द से कहरा रहे छात्रों का कहना है कि वे न्याय मांगने आए थे, लेकिन बदले में उन्हें पुलिस की लाठियां और बर्बरता मिली।
नेताओं की चुप्पी और सियासी बयानबाजी पर फूटा गुस्सा
घायल छात्रों और उनके परिजनों का गुस्सा इस बात पर सबसे ज्यादा फूट रहा है कि इतनी बड़ी घटना के बाद भी जिम्मेदार जनप्रतिनिधि और नेता उनकी सुधि लेने नहीं पहुंचे। छात्रों का कहना है कि सत्ता पक्ष के जिन नेताओं को उनकी आवाज सुननी चाहिए थी, वे या तो इस घटना से मुंह फेर रहे हैं या फिर इसे सिरे से खारिज कर रहे हैं। छात्रों ने दो टूक कहा कि जो लोग यह कह रहे हैं कि कोई लाठीचार्ज या बल प्रयोग हुआ ही नहीं, वे केवल अपनी राजनीतिक रोटियां सेक रहे हैं और हकीकत से आंखें मूंद चुके हैं।
JPSC आंदोलन पर गरमाई राजनीति, सरकार पर बढ़ा दबाव
छात्रों पर हुई इस कार्रवाई के बाद झारखंड की राजनीति पूरी तरह से सुलग उठी है। विपक्ष लगातार सरकार को घेरते हुए यह सवाल पूछ रहा है कि आखिर छात्रों पर बर्बरता क्यों की गई। वहीं, दूसरी तरफ प्रशासनिक अधिकारी इस पूरे मामले पर सावधानी बरत रहे हैं। बहरहाल, अस्पताल में भर्ती घायल छात्रों के आंसू और उनका यह दर्दनाक बयान आने वाले दिनों में सरकार के लिए एक बड़ी राजनीतिक चुनौती साबित हो सकता है, क्योंकि युवा वर्ग का यह आक्रोश अब शांत होने का नाम नहीं ले रहा है।