तिरुवल्लूर गैस रिसाव त्रासदी: सुरक्षित घर लौटे धनबाद के 12 श्रमिक, प्रीति देवी के अंतिम दर्शन कर गमगीन हुआ पूरा तोपचांची
तमिलनाडु के तिरुवल्लूर में हुए भीषण गैस रिसाव हादसे ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया था। इस त्रासदी का शिकार हुए धनबाद के तोपचांची निवासी 12 श्रमिक आज सुरक्षित अपने घर वापस लौट आए हैं। अपनों को सुरक्षित देख परिजनों के आंसू छलक पड़े, लेकिन इस राहत के बीच एक गहरा दुख भी जुड़ा है—इस हादसे में जान गंवाने वाली प्रीति देवी का पार्थिव शरीर भी आज उनके पैतृक गांव तोपचांची पहुँचा।
अपनों की वापसी, पर 'प्रीति' की कमी
तिरुवल्लूर में काम कर रहे धनबाद के इन श्रमिकों की वापसी का दिन मिश्रित भावनाओं वाला रहा। एक तरफ 12 श्रमिक सुरक्षित घर पहुँचकर अपनी जान बचा लेने के शुक्रगुजार हैं, वहीं दूसरी तरफ प्रीति देवी के अंतिम दर्शन ने पूरे क्षेत्र में मातम फैला दिया है। प्रीति देवी का पार्थिव शरीर जैसे ही उनके घर पहुँचा, परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल था। पूरे तोपचांची इलाके में आज शोक की लहर है और हर कोई इस त्रासदी से स्तब्ध है।
प्रशासन और ग्रामीणों की रही अहम भूमिका
गैस रिसाव की सूचना मिलते ही स्थानीय प्रशासन और जनप्रतिनिधियों ने सक्रियता दिखाते हुए वहां फंसे धनबाद के श्रमिकों को सुरक्षित निकालने का बीड़ा उठाया था। आज उनके सुरक्षित आगमन के बाद प्रशासन ने परिजनों को ढांढस बंधाया। स्थानीय लोगों ने बताया कि प्रीति देवी की मौत ने न केवल एक परिवार को बल्कि पूरे गांव को झकझोर दिया है। उनकी अंतिम यात्रा में भारी संख्या में ग्रामीण शामिल हुए।
तिरुवल्लूर गैस रिसाव: एक सबक
यह घटना देश भर के उन हजारों श्रमिकों की सुरक्षा पर बड़ा सवाल खड़ा करती है, जो अपने परिवार के पेट पालने के लिए दूसरे राज्यों में जोखिम भरी परिस्थितियों में काम करते हैं। गैस रिसाव की यह त्रासदी किसी भी कंपनी के सुरक्षा मानकों की लापरवाही का नतीजा हो सकती है। फिलहाल, तोपचांची के लोग अब प्रीति देवी के परिवार के साथ खड़े हैं और सरकार से इस मामले में उचित मुआवजे और दोषियों पर कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
गमगीन माहौल में अंतिम विदाई
प्रीति देवी के अंतिम संस्कार के दौरान पूरा तोपचांची इलाका भावुक था। सभी ने एक स्वर में मांग की है कि इस प्रकार की औद्योगिक दुर्घटनाओं को रोकने के लिए सख्त कदम उठाए जाने चाहिए ताकि भविष्य में किसी अन्य 'प्रीति' को अपनी जान न गंवानी पड़े। सुरक्षित लौटे श्रमिकों ने भी उस खौफनाक मंजर को याद करते हुए बताया कि वे तो बच गए, लेकिन प्रीति को नहीं बचा सके, जिसका मलाल उन्हें ताउम्र रहेगा।