BJP ने SAD के सामने रखी बड़ी शर्त! पंजाब की आधी सीटों पर ठोका दावा

BJP ने SAD के सामने रखी बड़ी शर्त! पंजाब की आधी सीटों पर ठोका दावा

पंजाब के सियासी रण में भारतीय जनता पार्टी (BJP) और शिरोमणि अकाली दल (SAD) के बीच दोबारा गठबंधन को लेकर चल रही बातचीत के बीच भारतीय जनता पार्टी ने अपने कड़े तेवर साफ कर दिए हैं। बीजेपी के कद्दावर नेता और केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने आगामी चुनावी समीकरणों को लेकर आधी-आधी यानी बराबर सीटों पर चुनाव लड़ने की दो टूक मांग रख दी है।

पंजाब विधानसभा की कुल 117 सीटों में से बीजेपी अब करीब 58-59 सीटों पर सीधा दावा ठोक रही है। पार्टी के स्थानीय और शीर्ष नेताओं का साफ कहना है कि राज्य में महज 22 या 23 सीटों पर संतोष करने का पुराना गठबंधन फॉर्मूला अब पूरी तरह अप्रासंगिक हो चुका है और बीजेपी अब किसी भी कीमत पर 'छोटे भाई' (जूनियर पार्टनर) की भूमिका स्वीकार नहीं करेगी।

पुराने 22-23 सीटों के फॉर्मूले को बीजेपी ने किया खारिज

दशकों तक चले पुराने गठबंधन के दौर में अकाली दल राज्य की अधिकांश ग्रामीण और सिख बहुल सीटों पर चुनाव लड़ता था, जबकि बीजेपी को केवल शहरी इलाकों की 22 से 23 सीटें ही दी जाती थीं। हालांकि, पिछले कुछ सालों में राज्य के ग्रामीण इलाकों में अपनी सांगठनिक पहुंच को विस्तार देने और धरातल पर मजबूत पकड़ बनाने के बाद बीजेपी की रणनीतिक सोच में आमूलचूल बदलाव आया है। पार्टी अब पूरे राज्य में अपनी स्वतंत्र पहचान और प्रभावी ताकत के साथ चुनावी मैदान में उतरना चाहती है, न कि किसी क्षेत्रीय दल की बैसाखी पर।

महाराष्ट्र और बिहार की तर्ज पर पंजाब में 'बड़ा भाई' बनने की रणनीति

बीजेपी पंजाब में उसी सफल सियासी मॉडल को दोहराना चाहती है जिसे उसने महाराष्ट्र और बिहार में सफलतापूर्वक लागू किया है। दशकों तक महाराष्ट्र में शिवसेना और बिहार में जनता दल यूनाइटेड (JDU) के साथ बीजेपी हमेशा 'छोटे भाई' के रूप में चुनाव लड़ती रही। लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के केंद्रीय नेतृत्व संभालने के बाद पार्टी ने अपनी आक्रामक विस्तारवादी नीति अपनाई। आज परिणाम यह है कि दोनों राज्यों में बीजेपी सबसे बड़े राजनीतिक दल के रूप में स्थापित हो चुकी है और शीर्ष सत्ता की कमान उसके पास है। ठीक इसी रणनीति को अमलीजामा पहनाते हुए पार्टी अब पंजाब में भी खुद को मुख्य धुरी के रूप में स्थापित करने के मिशन पर काम कर रही है।

सिख चेहरों के दम पर तोड़ा सिर्फ 'शहरी हिंदू पार्टी' का तमगा

लंबे अरसे तक पंजाब में बीजेपी की छवि महज शहरी हिंदू मतदाताओं की पार्टी तक सीमित मानी जाती थी, लेकिन हाल के वर्षों में पार्टी ने इस धारणा को पूरी तरह बदल दिया है। बीजेपी ने पंजाब के कई कद्दावर सिख नेताओं को अपने पाले में शामिल किया है, जिनमें पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह, केवल सिंह ढिल्लों, एच.एस. फूलका और रवनीत सिंह बिट्टू जैसे प्रभावशाली नाम शामिल हैं। इन वरिष्ठ सिख चेहरों के जुड़ने से पार्टी का आत्मविश्वास बढ़ा है और उसका मानना है कि वह अब पारंपरिक हिंदू वोट बैंक से आगे बढ़कर उदारवादी सिख मतदाताओं के बीच भी गहरी पैठ बनाने में सक्षम है।

कमजोर अकाली दल के सामने 2022 के नतीजों ने बदला शक्ति संतुलन

सियासी जानकारों का मानना है कि वर्तमान राजनीतिक माहौल बीजेपी के विस्तार के लिए सबसे मुफीद नजर आ रहा है। खुद को पंथ और सिख मतदाताओं का एकमात्र प्रतिनिधि बताने वाला अकाली दल आज अपने इतिहास के सबसे कमजोर दौर से गुजर रहा है। 2022 के पंजाब विधानसभा चुनाव में अकाली दल को सिर्फ 3 सीटों पर जीत मिली थी, जबकि अलग लड़कर भी बीजेपी ने 2 सीटें हासिल की थीं।

दोनों दलों के बीच सीटों का यह बेहद कम अंतर यह साबित करता है कि अकाली दल का पुराना दबदबा खत्म हो चुका है, जो बाद के लोकसभा चुनावों में भी दिखा। बीजेपी वोट ट्रांसफर की सहूलियत के लिए गठबंधन की संभावनाएं तो खुली रखना चाहती है, लेकिन अकाली दल की राजनीतिक कमजोरी के इस दौर में अपनी हिस्सेदारी घटाने को बिल्कुल तैयार नहीं है।