जेल से बाहर आते ही शादी के बजाय धर्म परिवर्तन का दबाव बनाने लगा आरोपी, वारंट के बाद भी गिरफ्त से दूर

जेल से बाहर आते ही शादी के बजाय धर्म परिवर्तन का दबाव बनाने लगा आरोपी, वारंट के बाद भी गिरफ्त से दूर

उत्तर प्रदेश के कानून व्यवस्था और सामाजिक ताने-बाने को झकझोर देने वाला एक बेहद गंभीर मामला सामने आया है, जहां एक ओर जहां अदालतें और पुलिस महकमा महिलाओं की सुरक्षा के लिए तमाम बड़े दावे करते हैं, वहीं दूसरी ओर अपराधियों के हौ इतने बुलंद हैं कि वे कानून के फंदे से बचकर खुलेआम पीड़ितों को प्रताड़ित कर रहे हैं। इस सनसनीखेज प्रकरण के केंद्र में एक ऐसा आरोपी है जो जेल की चारदीवारी से जमानत पर बाहर आने के बाद भी अपनी हरकतों से बाज नहीं आया और उसने अपनी प्रेमिका या पूर्व परिचित पर शादी करने के बजाय सीधे तौर पर धर्म परिवर्तन करने का भारी दबाव बनाना शुरू कर दिया। जब इस गंभीर मामले की शिकायत पुलिस और अदालत तक पहुंची, तो न्यायालय ने आरोपी के कृत्यों को गंभीरता से लेते हुए उसकी जमानत को तुरंत प्रभाव से रद्द कर दिया और उसके खिलाफ कड़े गैर-जमानती वारंट भी जारी कर दिए। लेकिन हैरानी की बात यह है कि अदालत द्वारा वारंट जारी होने और कानून का शिकंजा कसने के बावजूद वह शातिर आरोपी पिछले छह महीनों से लगातार पुलिस की आंखों में धूल झोंककर फरार चल रहा है, जिससे न्याय व्यवस्था और स्थानीय पुलिस प्रशासन की कार्यशैली पर बहुत बड़े और गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। पीड़िता लगातार न्याय के लिए दर-दर भटकने को मजबूर है, जबकि खाकी वर्दीधारी आरोपी को ढूंढने में अभी तक पूरी तरह से नाकाम साबित होते नजर आ रहे हैं, जिससे समाज में इस बात को लेकर भारी रोष व्याप्त है कि आखिर कब तक कानून के रखवाले अपराधियों को यूं ही खुलेआम घूमने की छूट देते रहेंगे।

पीड़िता की आपबीती और जेल से छूटने के बाद आरोपी द्वारा धर्म परिवर्तन के लिए बनाया जा रहा चौतरफा दबाव

इस पूरे मामले की तह में जाने पर यह पता चलता है कि किस प्रकार एक आपराधिक प्रवृत्ति का व्यक्ति कानून की पैरोकारी का फायदा उठाकर समाज की भोली-भाली युवतियों को अपने जाल में फंसाता है और फिर उन पर अत्याचार की सीमाएं लांघ देता है। आरोपी जब पहले किसी अन्य मामले में जेल की सजा काट रहा था, तो पीड़िता को यह उम्मीद थी कि उसके जेल चले जाने से उसकी जिंदगी के तमाम कष्ट हमेशा के लिए समाप्त हो जाएंगे और उसे एक सुरक्षित माहौल मिल सकेगा। लेकिन जैसे ही वह शातिर अपराधी जमानत पर छूटकर बाहर आया, उसने अपने पुराने तौर-तरीकों को दोहराते हुए पीड़िता से संपर्क साधा और उस पर यह दबाव बनाना शुरू कर दिया कि वह सामान्य रूप से शादी करने के बजाय अपने धर्म को बदलकर उसकी शर्तों के अनुसार जीवन जिए। जब पीड़िता ने उसकी इस गैरकानूनी, अनुचित और जबरन धर्म परिवर्तन कराने वाली मांग का पुरजोर विरोध किया, तो आरोपी ने उसे खुलेआम जान से मारने की धमकियां देनी शुरू कर दीं और उसके मान-सम्मान को ठेस पहुंचाने के लिए तरह-तरह के हथकंडे अपनाने लगा। इस प्रकार की घटनाएं इस बात का सबसे बड़ा उदाहरण हैं कि कुछ आपराधिक तत्व किस हद तक सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने और एक महिला की स्वतंत्रता का हनन करने पर आमादा रहते हैं, जिन्हें समय रहते कड़ी से कड़ी सजा देना बेहद अनिवार्य हो जाता है ताकि समाज में एक कड़ा संदेश जा सके।

कोर्ट के सख्त आदेश और जमानत रद्द होने के बावजूद पुलिस की नाकामी पर उठ रहे गंभीर सवाल

न्यायपालिका की गरिमा और कानून के राज को बनाए रखने के लिए जब कोई अदालत किसी संगीन अपराध के आरोपी की जमानत को रद्द करती है और उसकी गिरफ्तारी के लिए वारंट जारी करती है, तो यह उम्मीद की जाती है कि स्थानीय पुलिस तत्परता दिखाते हुए फौरन उसे धर दबोचेगी। लेकिन इस प्रकरण में स्थानीय पुलिस की कार्यप्रणाली और उनकी सुस्ती ने तमाम व्यवस्थाओं की पोल खोलकर रख दी है, जहां पिछले छह महीने से कोर्ट का वारंट हाथ में होने के बावजूद खाकीधारी पुलिसकर्मी उस फरार आरोपी तक पहुंचने में पूरी तरह असमर्थ साबित हो रहे हैं। क्या पुलिस किसी बड़े राजनीतिक दबाव के कारण या अपनी कार्यकुशलता की कमी के चलते उस आरोपी को बचाने की कोशिश कर रही है, यह एक ऐसा सवाल है जिसका जवाब आज पीड़ित परिवार के साथ-साथ पूरा शहर जानना चाहता है। लगातार छह महीने तक एक वॉन्टेड मुजरिम का खुलेआम घूमना और पुलिस की फाइलों में उसका सुराग तक न मिलना इस बात को साबित करता है कि जमीनी स्तर पर कानून के इम्पोरफोर्समेंट में कितनी बड़ी खामियां मौजूद हैं, जिससे अपराधियों के हौसले आसमान छूने लगते हैं। उच्चाधिकारियों को अब इस मामले में स्वतः संज्ञान लेते हुए एक विशेष टास्क फोर्स का गठन करना चाहिए और उस फरार आरोपी को जल्द से जल्द सलाखों के पीछे पहुंचाकर अदालत के आदेशों की लाज रखनी चाहिए ताकि पीड़िता को समय पर न्याय मिल सके।

महिलाओं की सुरक्षा और जबरन धर्म परिवर्तन के मामलों में त्वरित न्याय की सख्त जरूरत

आज के आधुनिक समय में भी महिलाओं के खिलाफ इस प्रकार के उत्पीड़न और जबरन धर्म परिवर्तन के मामलों का सामने आना हमारे सामाजिक विकास और लोकतांत्रिक मूल्यों पर एक बड़ा धब्बा है, जिससे निपटने के लिए प्रशासन को अपनी नीति और नीयत दोनों को सख्त करना होगा। जब तक पुलिस ऐसे भगोड़े और कुख्यात आरोपियों के खिलाफ संपत्ति कुर्क करने और समाज में उनकी हनक को तोड़ने जैसी कड़ी कार्रवाई नहीं करेगी, तब तक कानून का डर अपराधियों के दिलों से कभी खत्म नहीं हो सकता। इस मामले में अब जरूरत इस बात की है कि मीडिया और समाज के प्रबुद्ध वर्ग मिलकर इस आवाज को बुलंद करें ताकि पुलिस प्रशासन अपनी गहरी नींद से जागे और उस आरोपी को जल्द से जल्द गिरफ्तार कर अदालत के सामने पेश करे। पीड़िता की सुरक्षा और उसका आत्मविश्वास बहाल करना राज्य सरकार और पुलिस विभाग की नैतिक जिम्मेदारी है, और यदि इस मामले में अब भी ढिलाई बरती गई तो यह देश की न्याय प्रणाली के प्रति आम जनता के विश्वास को डिगाने का काम करेगा।