69 हजार शिक्षक भर्ती: बिना किसी को हटाए नए अभ्यर्थियों को मौका देगी सरकार!

69 हजार शिक्षक भर्ती: बिना किसी को हटाए नए अभ्यर्थियों को मौका देगी सरकार!

लखनऊ: उत्तर प्रदेश की बहुचर्चित 69 हजार सहायक अध्यापक भर्ती प्रक्रिया में एक बड़ा और सकारात्मक मोड़ आ गया है। सालों से कानूनी दांव-पेंच और आंदोलन की मार झेल रहे अभ्यर्थियों के लिए राहत भरी खबर है। उत्तर प्रदेश सरकार अब इस जटिल विवाद का ऐसा समाधान निकालने की तैयारी में है, जिससे किसी का नुकसान न हो। सरकार का रुख साफ है कि वर्तमान में कार्यरत शिक्षकों की नौकरी पर आंच आए बिना, नई मेरिट सूची में आने वाले योग्य अभ्यर्थियों को भी नियुक्ति का मौका दिया जाए।

पुरानी नियुक्तियां सुरक्षित, नए चेहरों को भी मिलेगा हक

इस पूरे मामले में सरकार का सबसे बड़ा फोकस इस बात पर है कि जो शिक्षक पिछले कुछ सालों से स्कूलों में अपनी सेवाएं दे रहे हैं और जिनका जीवन इस नौकरी पर निर्भर है, उन्हें न हटाया जाए। सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के विभिन्न आदेशों के बाद उपजे कानूनी संकट को दूर करने के लिए बेसिक शिक्षा विभाग एक बीच का रास्ता तलाश रहा है। सरकार का मानना है कि मानवीय और प्रशासनिक दोनों पक्षों को ध्यान में रखते हुए पुराने शिक्षकों को हटाए बिना नई सूची के अभ्यर्थियों को समायोजित किया जाना सबसे बेहतर कदम होगा।

अतिरिक्त पदों के सृजन पर विचार कर रही सरकार

कानूनी अड़चनों को दूर करने और दोनों पक्षों को संतुष्ट करने के लिए सरकार अतिरिक्त पदों (Supernumerary Posts) के सृजन पर गंभीरता से विचार कर रही है। अगर इस फॉर्मूले को हरी झंडी मिलती है, तो मूल 69 हजार पदों से अलग नए पद सृजित किए जाएंगे, जिससे कोर्ट के आदेशानुसार संशोधित कट-ऑफ में आने वाले अभ्यर्थियों को नौकरी दी जा सके। इस कदम से न सिर्फ सालों से प्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थियों का इंतजार खत्म होगा, बल्कि बेसिक शिक्षा विभाग में शिक्षकों की कमी भी दूर होगी।

मुख्यमंत्री स्तर पर जल्द लग सकती है अंतिम मुहर

सूत्रों के मुताबिक, बेसिक शिक्षा विभाग ने इस संबंध में अपनी पूरी कार्ययोजना तैयार कर ली है। विधि विशेषज्ञों से राय लेने के बाद इस प्रस्ताव को जल्द ही मुख्यमंत्री के समक्ष अंतिम मंजूरी के लिए पेश किया जाएगा। सरकार की कोशिश है कि इस संवेदनशील मुद्दे का ऐसा कानूनी रूप से ठोस समाधान निकाला जाए, जिसे दोबारा अदालत में चुनौती न दी जा सके। इस फैसले से यूपी के हजारों परिवारों में एक बार फिर उम्मीद की किरण जग गई है।

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