'बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ... पहले टीचर तो दो': महाराष्ट्र में क्यों भड़के 10वीं के छात्र? जानें क्या है पूरा मामला
महाराष्ट्र में शिक्षा व्यवस्था को लेकर एक बेहद चौंकाने वाला और गंभीर मामला सामने आया है, जहां बोर्ड परीक्षा (10वीं) के छात्रों ने सरकार के प्रसिद्ध नारे 'बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ' पर ही सवाल खड़े कर दिए हैं। राज्य के सरकारी और जिला परिषद स्कूलों के छात्रों, विशेषकर छात्राओं ने "बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ... लेकिन पहले हमें टीचर तो दो!" के नारों के साथ विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया है। यह मामला डिजिटल प्लेटफॉर्म्स और सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। आइए जानते हैं कि आखिर क्यों बोर्ड परीक्षा के मुहाने पर खड़े इन छात्रों को पढ़ाई छोड़कर सड़कों पर उतरना पड़ा है।
शिक्षकों की भारी कमी: बोर्ड परीक्षा सिर पर, कोर्स अधूरा
इस पूरे विवाद की मुख्य जड़ महाराष्ट्र के कई ग्रामीण और अर्ध-शहरी सरकारी स्कूलों में शिक्षकों (Teachers Shortage) की भारी कमी है। 10वीं कक्षा के छात्रों का आरोप है कि उनका नया शैक्षणिक सत्र शुरू हुए महीनों बीत चुके हैं, लेकिन गणित, विज्ञान और अंग्रेजी जैसे मुख्य विषयों को पढ़ाने के लिए स्कूलों में पूर्णकालिक शिक्षक ही उपलब्ध नहीं हैं। बोर्ड परीक्षाएं नजदीक आ रही हैं और पाठ्यक्रम (Syllabus) पूरी तरह अधूरा पड़ा है। छात्रों का कहना है कि जब स्कूलों में पढ़ाने के लिए शिक्षक ही नहीं होंगे, तो वे पढ़ेंगे कैसे और बोर्ड परीक्षाओं में अच्छे अंक कैसे लाएंगे?
नारों और हकीकत के बीच का अंतर उजागर
विरोध प्रदर्शन कर रही छात्राओं का गुस्सा इस बात पर सबसे ज्यादा फूटा कि एक तरफ सरकार महिला सशक्तिकरण और लड़कियों की शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए 'बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ' जैसे बड़े अभियानों पर करोड़ों रुपये खर्च कर रही है, वहीं दूसरी तरफ धरातल पर बेटियों को बुनियादी शिक्षा के लिए भी संघर्ष करना पड़ रहा है। अभिभावकों का कहना है कि वे निजी ट्यूशन या कोचिंग की भारी-भरकम फीस देने में सक्षम नहीं हैं, जिसके कारण वे सरकारी स्कूलों पर निर्भर हैं। लेकिन शिक्षकों की कमी के चलते उनके बच्चों का भविष्य अधर में लटका हुआ है।
प्रशासन का आश्वासन, लेकिन छात्र अड़े
मामले के तूल पकड़ने और छात्रों द्वारा स्कूल के गेट पर तालाबंदी करने के बाद स्थानीय शिक्षा विभाग और प्रशासनिक अधिकारी हरकत में आए हैं। अधिकारियों का तर्क है कि शिक्षकों के ट्रांसफर (स्थानांतरण) और नई भर्ती प्रक्रियाओं में हो रही देरी के कारण कुछ स्कूलों में यह अस्थाई समस्या पैदा हुई है। प्रशासन ने जल्द से जल्द 'अतिथि शिक्षकों' (Guest Teachers) या अन्य स्कूलों से शिक्षकों को डेपुटेशन पर भेजने का आश्वासन दिया है। हालांकि, छात्र और उनके माता-पिता किसी भी अस्थाई व्यवस्था को मानने को तैयार नहीं हैं और वे स्कूलों में पक्के शिक्षकों की तुरंत नियुक्ति की मांग पर अड़े हुए हैं।