NEET UG एग्जाम पैटर्न में बड़ा बदलाव! CBT मोड और JEE की तर्ज पर 'टू-स्टेज' परीक्षा लाने की तैयारी

NEET UG एग्जाम पैटर्न में बड़ा बदलाव! CBT मोड और JEE की तर्ज पर 'टू-स्टेज' परीक्षा लाने की तैयारी

देशभर के मेडिकल उम्मीदवारों के लिए एक बेहद अहम और बड़ी खबर सामने आ रही है। नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) और केंद्र सरकार देश की सबसे बड़ी और संवेदनशील मेडिकल प्रवेश परीक्षा यानी नीट-यूजी (NEET-UG) के पूरे ढांचे में क्रांतिकारी बदलाव करने की योजना बना रही है। पिछले कुछ सत्रों में परीक्षा से जुड़ी गड़बड़ियों, पेपर लीक के मामलों और पारदर्शिता को लेकर उठे सवालों के बाद सरकार ने यह सख्त कदम उठाया है। सुप्रीम कोर्ट में साझा की गई इस नई कार्ययोजना के तहत अब मेडिकल एंट्रेंस एग्जाम को पूरी तरह से फुल-प्रूफ और आधुनिक बनाने का प्लान तैयार किया जा रहा है, जिसमें पारंपरिक तरीकों को अलविदा कहकर डिजिटल तकनीक को अपनाने पर जोर दिया जा रहा है।

ओएमआर शीट की छुट्टी, अब कंप्यूटर-बेस्ड टेस्ट (CBT) का प्लान

नीट परीक्षा में पारदर्शिता लाने के लिए सबसे बड़ा बदलाव इसे ऑनलाइन माध्यम पर शिफ्ट करने को लेकर है। अब तक लाखों छात्र पेन और पेपर के जरिए ओएमआर (OMR) शीट पर बुलबुले भरकर परीक्षा देते आए हैं, लेकिन भविष्य में इस पूरी प्रक्रिया को कंप्यूटर-बेस्ड टेस्ट (CBT) मोड में बदला जा सकता है। शिक्षा मंत्रालय और उच्च स्तरीय विशेषज्ञ समितियों (जैसे डॉ. के. राधाकृष्णन समिति) का मानना है कि ऑनलाइन परीक्षा होने से प्रश्नपत्रों के भौतिक परिवहन, प्रिंटिंग प्रेस के लीक जोखिम और परीक्षा केंद्रों पर होने वाली धांधली पर बहुत हद तक लगाम लगाई जा सकेगी।

इंजीनियरिंग की तर्ज पर 'टू-स्टेज' परीक्षा प्रणाली का विचार

इस बड़े बदलाव की श्रृंखला में दूसरा सबसे महत्वपूर्ण प्रस्ताव मेडिकल प्रवेश परीक्षा को दो चरणों (Two-Stage Exam Pattern) में आयोजित करने का है। जिस प्रकार देश की इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षा 'जेईई मेन' (JEE Main) साल में दो बार या अलग-अलग चरणों में आयोजित की जाती है, ठीक उसी तर्ज पर नीट-यूजी को भी दो चरणों में कराए जाने पर विचार चल रहा है। हर साल 22 लाख से अधिक छात्रों के इस विशाल परीक्षा में शामिल होने के कारण, इसे कई शिफ्टों या चरणों में बांटने से प्रशासनिक दबाव कम होगा और छात्रों को भी अपनी परफॉर्मेंस सुधारने का एक और मौका मिल सकेगा, जिसके बाद नॉर्मलाइजेशन प्रक्रिया अपनाई जाएगी।

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डिजिटल सुरक्षा का होगा कड़ा पहरा

सरकार की इस नई रूपरेखा का मुख्य उद्देश्य परीक्षा प्रक्रिया से मानवीय हस्तक्षेप को कम से कम करना है। परीक्षा केंद्रों की निगरानी से लेकर डेटा सुरक्षा तक के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और आधुनिक डिजिटल टूल्स का इस्तेमाल बढ़ाया जाएगा। इस संभावित बदलाव के बाद से मेडिकल की तैयारी कर रहे छात्रों को अब केवल ऑफलाइन किताबों और मॉक टेस्ट तक सीमित रहने की बजाय कंप्यूटर स्क्रीन पर अभ्यास करने, अपनी स्पीड और टाइम मैनेजमेंट को डिजिटल फॉर्मेट के अनुकूल ढालने की सख्त जरूरत होगी, जिससे वे भविष्य की इस हाई-टेक परीक्षा के लिए पूरी तरह तैयार रह सकें।

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