नवोदय-सैनिक स्कूल एडमिशन में महा-घोटाला? क्या सिर्फ 'कागजों पर' चल रहे थे स्कूल, राजकोट में 697 संदिग्ध छात्रों की जांच शुरू
शिक्षा के मंदिरों में हुई धांधली की एक बेहद चौंकाने वाली खबर गुजरात के राजकोट से सामने आई है। नवोदय विद्यालय और सैनिक स्कूलों में दाखिले को लेकर चल रहे विवाद ने अब एक गंभीर मोड़ ले लिया है। प्रशासन द्वारा की गई शुरुआती पड़ताल में यह संदेह गहरा गया है कि क्या इन प्रतिष्ठित संस्थानों में एडमिशन पूरी तरह से पारदर्शी थे या फिर सब कुछ सिर्फ कागजों पर ही मैनेज किया जा रहा था? इस मामले की गंभीरता को देखते हुए अब राजकोट में 697 संदिग्ध छात्रों की सघन जांच शुरू कर दी गई है, जिसने पूरे शिक्षा महकमे में खलबली मचा दी है।
क्या है एडमिशन घोटाले का पूरा खेल?
मामला तब प्रकाश में आया जब प्रशासनिक स्तर पर छात्रों के रिकॉर्ड और उनके आवासीय दस्तावेजों (Residence Proof) की रैंडम चेकिंग की गई। सूत्रों के मुताबिक, इन 697 छात्रों के दस्तावेजों में भारी विसंगतियां पाई गई हैं। आरोप है कि कई छात्रों ने गलत पते, फर्जी आय प्रमाण पत्र और नियमों को ताक पर रखकर कोटे का लाभ उठाया है। बड़ा सवाल यह है कि यदि ये छात्र वहां नहीं थे, तो उनकी जगह कौन पढ़ाई कर रहा था या फिर क्या इन सीटों को 'बेनामी' तरीके से बेचा गया था?
'कागजी दाखिले' की आशंका से सन्न है प्रशासन
जांच के दायरे में आए इन 697 छात्रों के रिकॉर्ड को अब क्रॉस-वेरीफाई किया जा रहा है। जांच अधिकारी यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि क्या इन छात्रों का वास्तविक नामांकन किसी स्कूल में था या फिर ये सिर्फ सरकारी ग्रांट और सुविधाओं का लाभ लेने के लिए बनाए गए फर्जी नाम थे। यदि यह साबित हो जाता है कि एडमिशन सिर्फ कागजों पर हुए थे, तो यह देश के सबसे प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थानों की साख पर एक बहुत बड़ा प्रश्नचिह्न होगा। शिक्षा विभाग के उच्च अधिकारियों ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि इस जांच में किसी भी स्तर पर कोताही नहीं बरती जाएगी।
अभिभावकों और सिस्टम की मिलीभगत की जांच
इस पूरे 'एडमिशन रैकेट' के पीछे एक बड़े गिरोह के होने की आशंका से भी इनकार नहीं किया जा सकता है। पुलिस और प्रशासन की टीम अब उन बिचौलियों को भी तलाश रही है, जो मोटी रकम लेकर फर्जी दस्तावेजों के जरिए बच्चों का दाखिला सुनिश्चित करने का दावा करते थे। वहीं, जिन स्कूलों में ये दाखिले हुए थे, वहां के संबंधित क्लर्कों और प्रशासनिक अधिकारियों की भूमिका भी जांच के घेरे में है। क्या स्कूल प्रबंधन की मिलीभगत के बिना 697 बच्चों का फर्जी एडमिशन संभव था? यह सवाल अब हर किसी की जुबान पर है।
सख्त कार्रवाई के संकेत, रद्द हो सकते हैं एडमिशन
जांच प्रक्रिया के तहत, जिन छात्रों के दस्तावेज फर्जी पाए जाएंगे, न केवल उनके एडमिशन तत्काल प्रभाव से रद्द कर दिए जाएंगे, बल्कि उनके अभिभावकों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई भी की जा सकती है। इसके साथ ही, भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए नवोदय और सैनिक स्कूल एडमिशन प्रक्रिया को और अधिक पारदर्शी बनाने के लिए बायोमेट्रिक और आधार लिंक्ड वेरिफिकेशन को अनिवार्य किया जा सकता है। राजकोट की इस कार्रवाई पर पूरे देश के उन अभिभावकों की नजर है जो अपने बच्चों के भविष्य के लिए इन स्कूलों पर भरोसा करते हैं।