आईएएस मृणाल मीना का महा-एक्शन: सुबह 4 बजे अचानक पहुंचे अस्पताल, आदिवासियों का जीता दिल, लोग बोले- 'कलेक्टर हो तो ऐसा!'
सरकारी व्यवस्थाओं को सुधारने और आम जनता को त्वरित न्याय दिलाने के लिए जब कोई प्रशासनिक अधिकारी लीक से हटकर काम करता है, तो वह जनता के लिए किसी मसीहा से कम नहीं होता। मध्य प्रदेश के धार जिले में ऐसा ही एक वाकया सामने आया है, जिसने पूरे प्रशासनिक अमले में हिलाकर रख दिया है। जिले के युवा आईएएस अधिकारी और कलेक्टर मृणाल मीना ने तड़के सुबह 4 बजे जिला अस्पताल का औचक निरीक्षण (Surprise Inspection) कर एक नई मिसाल पेश की है। इस आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र में बुनियादी स्वास्थ्य सेवाओं की जमीनी हकीकत जानने के लिए किए गए इस औचक एक्शन ने स्थानीय लोगों, खासकर आदिवासी समाज का दिल जीत लिया है।
तड़के सुबह 4 बजे अस्पताल का गेट देख उड़ गए स्टाफ के होश
आम तौर पर बड़े प्रशासनिक अधिकारी कार्यालयीन समय या पहले से तय कार्यक्रमों के तहत ही औचक निरीक्षण करते हैं, जिसकी भनक विभागों को पहले ही लग जाती है। लेकिन आईएएस मृणाल मीना ने व्यवस्था की असली हकीकत परखने के लिए सुबह 4 बजे का वक्त चुना, जब पूरा अस्पताल स्टाफ गहरी नींद या बेफिक्री में था। कलेक्टर जैसे ही बिना किसी तामझाम और सुरक्षा काफिले के सीधे जिला अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड और ओपीडी परिसर में दाखिल हुए, वहां तैनात डॉक्टरों, नर्सों और सुरक्षा गार्डों के होश उड़ गए।
मरीजों के बीच जमीन पर बैठकर जाना हाल, लापरवाहियों पर भड़के कलेक्टर
अस्पताल परिसर में दाखिल होते ही आईएएस मृणाल मीना सीधे इलाज के लिए दूर-दराज के ग्रामीण और आदिवासी इलाकों से आए मरीजों और उनके परिजनों के पास पहुंचे। उन्होंने बिना किसी हिचकिचाहट के मरीजों के पास बैठकर उनसे बातचीत की और पूछा कि क्या उन्हें समय पर दवाइयां, बेड और डॉक्टर की सेवाएं मिल रही हैं या नहीं। निरीक्षण के दौरान अस्पताल के कई वार्डों में गंदगी, स्ट्रेचर की कमी और कुछ ड्यूटी स्टाफ की अनुपस्थिति पाए जाने पर कलेक्टर का पारा चढ़ गया। उन्होंने मौके पर ही सिविल सर्जन और संबंधित प्रभारियों को कड़ी फटकार लगाते हुए व्यवस्थाओं को तत्काल दुरुस्त करने के कड़े निर्देश जारी किए।
सोशल मीडिया पर मचा भौकाल, जनता ने कहा- 'असली हीरो'
कलेक्टर मृणाल मीना के इस औचक निरीक्षण का वीडियो और तस्वीरें जैसे ही सोशल मीडिया पर सामने आईं, यह देखते ही देखते पूरे प्रदेश में वायरल हो गईं। धार जिले के स्थानीय निवासियों सहित इंटरनेट यूज़र्स उनके इस साहसिक कदम की जमकर सराहना कर रहे हैं। लोगों का कहना है कि दूरस्थ आदिवासी अंचलों के गरीब मरीजों को अक्सर स्वास्थ्य सेवाओं के लिए भटकना पड़ता है, लेकिन अगर जिले का मुखिया खुद सुबह 4 बजे जागकर पहरेदारी करेगा, तो कोई भी कर्मचारी लापरवाही करने की हिम्मत नहीं जुटा पाएगा। सोशल मीडिया पर लोग कमेंट कर रहे हैं कि देश के हर जिले में ऐसे ही संवेदनशील और कर्मठ कलेक्टर की जरूरत है।