वेतन के आधार पर तय होगी लॉटरी सिलेक्शन प्रक्रिया, जानिए प्रोफेशनल्स के लिए क्या बदला
अमेरिका में काम करने का सपना देख रहे भारतीय प्रोफेशनल्स और तकनीकी विशेषज्ञों के लिए एक बहुत बड़ी और अहम खबर सामने आई है। अमेरिकी आव्रजन नियमों में बदलाव के तहत 1 अक्टूबर से एच-1बी (H-1B) वीजा की पूरी चयन प्रक्रिया में बड़ा फेरबदल लागू हो गया है। अब तक चलने वाली पारंपरिक और समान लॉटरी प्रणाली की जगह पूरी तरह से वेतन-आधारित (Wage-Based Selection System) नई व्यवस्था शुरू कर दी गई है। अमेरिकी नागरिक और आव्रजन सेवा (USCIS) के नए दिशा-निर्देशों के अनुसार, आगामी वित्त वर्ष के लिए होने वाली इस चयन प्रक्रिया में अधिक वेतन पाने वाले और उच्च कौशल वाले आवेदकों को प्राथमिकता दी जाएगी। इस बदलाव का सबसे ज्यादा असर अमेरिका की शीर्ष सॉफ्टवेयर कंपनियों, आईटी फर्मों और वहां काम करने वाले हजारों भारतीय नागरिकों पर पड़ने वाला है, जिन्हें अब अपनी जॉब की सैलरी और पोजीशन के हिसाब से रणनीतिक तैयारियां करनी होंगी।
नया वेटेड लॉटरी सिस्टम: ज्यादा सैलरी वाले आवेदकों को मिलेंगी अधिक एंट्रीज, जानिए कैसे काम करेगी यह पूरी व्यवस्था
नए नियमों के लागू होने के बाद अब एच-1बी वीजा रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया को अमेरिकी श्रम विभाग (DOL) के प्रचलित वेतन मानकों (OEWS Wage Levels) से जोड़ दिया गया है। इसका मतलब यह है कि किसी आवेदक को मिलने वाली नौकरी का वेतन जितना अधिक होगा, चयन पूल में उसकी उतनी ही ज्यादा एंट्रीज दर्ज की जाएंगी। उदाहरण के तौर पर, यदि कोई उम्मीदवार न्यूनतम या एंट्री-लेवल (वेतन स्तर I) पर है, तो उसे लॉटरी में केवल एक ही एंट्री मिलेगी। वहीं दूसरी ओर, जो प्रोफेशनल्स विशेषज्ञ या उच्च वेतन श्रेणी (वेतन स्तर IV) के अंतर्गत आते हैं, उन्हें चयन प्रक्रिया में चार गुना यानी चार एंट्रियां मिलेंगी। हालांकि अमेरिकी प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि कम वेतन वाले या शुरुआती स्तर के आवेदकों को पूरी तरह से बाहर नहीं किया गया है, लेकिन अधिक वेतन पाने वाले उम्मीदवारों के सफल होने की संभावनाएं इस नई व्यवस्था के तहत काफी हद तक बढ़ जाएंगी।
भारतीय वर्कर्स और टेक प्रोफेशनल्स को किन बातों का रखना होगा विशेष ध्यान, सख्त दस्तावेजों और नियमों की स्क्रूटनी बढ़ी
इस बदलाव के बाद अमेरिका में नौकरी की तलाश कर रहे छात्रों और एच-1बी धारकों के लिए यह बेहद जरूरी हो गया है कि वे अपनी कंपनियों के साथ मिलकर सैलरी स्ट्रक्चर और जॉब टाइटल की सटीक योजना बनाएं। आव्रजन विशेषज्ञों का मानना है कि अब सिर्फ रैंडम आवेदन करने से काम नहीं चलेगा, बल्कि रजिस्ट्रेशन के दौरान दिए गए वेतन और दस्तावेजों की अमेरिकी अधिकारियों द्वारा बेहद बारीकी से जांच की जाएगी। यदि दस्तावेजों और पेश किए गए आंकड़ों में किसी भी प्रकार की विसंगति पाई जाती है, तो बिना अतिरिक्त समय दिए या बिना किसी चेतावनी के सीधे याचिका खारिज की जा सकती है। इसके अलावा, सोशल मीडिया प्रोफाइल की जांच, कड़े बैकग्राउंड चेक और वीजा एक्सटेंशन से जुड़ी नीतियों में भी सख्ती बरती जा रही है। ऐसे में भारतीय कामगारों को सलाह दी जाती है कि वे किसी भी तरह की कानूनी पेचीदगियों से बचने के लिए अपने इमिग्रेशन वकीलों से सलाह लेकर पूरी सावधानी के साथ अपने दस्तावेजों को दुरुस्त रखें।