टॉप 250 में नहीं दिखा एक भी भारतीय संस्थान, IISc 254वें पायदान पर और LPU भी लिस्ट में शामिल

टॉप 250 में नहीं दिखा एक भी भारतीय संस्थान, IISc 254वें पायदान पर और LPU भी लिस्ट में शामिल

टाइम्स हायर एजुकेशन (Times Higher Education - THE) द्वारा जारी नवीनतम 'वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग 2027' (World University Rankings 2027) ने देश के उच्च शिक्षा और शैक्षणिक संस्थानों की गुणवत्ता पर एक बार फिर गंभीर चर्चा छेड़ दी है। इस साल जारी की गई वैश्विक सूची के अनुसार, दुनिया के शीर्ष 250 संस्थानों के भीतर एक भी भारतीय शिक्षण संस्थान अपनी जगह बनाने में कामयाब नहीं हो पाया है। हालांकि, भारतीय विज्ञान संस्थान (IISc बेंगलुरु) ने एक बार फिर देश में शीर्ष स्थान हासिल करते हुए वैश्विक स्तर पर 254वां स्थान प्राप्त किया है, जो भारत के सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले संस्थानों में सबसे आगे है। इस रैंकिंग में देश के कुल 143 विश्वविद्यालयों को जगह मिली है, जो एशिया में किसी भी देश द्वारा सबसे अधिक प्रतिनिधित्व का आंकड़ा है। इसके बावजूद, ग्लोबल टॉप-250 की सूची में भारत की अनुपस्थिति ने शिक्षाविदों और नीति निर्माताओं के सामने कई बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं, जिससे यह साफ होता है कि देश के प्रतिष्ठित संस्थानों को वैश्विक मानकों पर अपनी अनुसंधान गुणवत्ता, शिक्षण पद्धतियों और अंतरराष्ट्रीय पहुंच को और अधिक मजबूत करने की आवश्यकता है।

भारतीय विज्ञान संस्थान (IISc) ने देश में बरकरार रखा अपना दबदबा, ग्लोबल लिस्ट में 254वें नंबर पर दर्ज की अपनी मजबूत उपस्थिति

जारी किए गए ताजा आंकड़ों के मुताबिक, इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ़ साइंस (IISc) बेंगलुरु ने एक बार फिर से देश के सभी उच्च शिक्षण संस्थानों को पीछे छोड़ते हुए भारत में पहला स्थान अपने नाम किया है। वैश्विक स्तर पर आईआईएससी (IISc) को 254वां स्थान मिला है, और इसे शिक्षण के क्षेत्र में 62.1 तथा अनुसंधान गुणवत्ता (research quality) के मामले में 58.6 का स्कोर प्राप्त हुआ है। इसके अलावा, देश के अन्य संस्थानों जैसे सविता इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एंड टेक्निकल साइंसेज, शूलिनी यूनिवर्सिटी, जामिया मिल्लिया इस्लामिया और किट (KIIT) यूनिवर्सिटी ने भी अलग-अलग बैंड्स में अपनी जगह बनाई है। चौंकाने वाली बात यह है कि इस प्रतिष्ठित वैश्विक सूची में लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी (LPU) ने भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है, जिसे विभिन्न संकेतकों के आधार पर निर्धारित रैंक बैंड में स्थान मिला है। हालांकि देश से भाग लेने वाले विश्वविद्यालयों की कुल संख्या बढ़कर 143 हो गई है, जो पिछले साल के मुकाबले 15 अधिक है, लेकिन विश्व के सर्वश्रेष्ठ 250 विश्वविद्यालयों के क्लब में भारत का खाता न खुल पाना देश की शोध और अकादमिक नीतियों के लिए एक आत्ममंथन का विषय बना हुआ है।

वैश्विक पटल पर एशिया का बढ़ता प्रभाव और ब्रिटिश-अमेरिकी विश्वविद्यालयों का वर्चस्व, ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी ने फिर मारी बाजी

अगर वैश्विक स्तर पर बात करें तो टाइम्स हायर एजुकेशन की इस सूची में एक बार फिर यूनाइटेड किंगडम की मशहूर ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी (University of Oxford) ने लगातार 11वें साल पहले स्थान पर कब्जा जमाए रखा है। वहीं दूसरी ओर, मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (MIT) ने अपना दूसरा स्थान बरकरार रखा है, और अमेरिका तथा ब्रिटेन के शिक्षण संस्थानों ने दुनिया के टॉप-10 में अपना दबदबा पूरी तरह से कायम रखा है। एक तरफ जहां पश्चिमी देश शोध और औद्योगिक साझेदारी के मामले में सबसे आगे चल रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ एशिया महाद्वीप के कई देश जैसे सिंगापुर, जापान, चीन और दक्षिण कोरिया के विश्वविद्यालय भी वैश्विक रैंकिंग में तेजी से ऊपर आ रहे हैं। एशियाई विश्वविद्यालयों ने इस बार अपनी स्थिति को और मजबूत किया है, लेकिन भारतीय परिसरों को वैश्विक प्रतिस्पर्धा में टिके रहने के लिए फंडिंग, इंटरनेशनल फैकल्टी एक्सचेंज, और अत्याधुनिक रिसर्च इंफ्रास्ट्रक्चर पर भारी निवेश करने की सख्त जरूरत है ताकि आने वाले वर्षों में भारत के संस्थान भी दुनिया के शीर्ष विश्वविद्यालयों की पहली पंक्ति में गर्व के साथ खड़े हो सकें।