कौन है वो IAS अधिकारी जिसके डर से कांप रही हैं बड़ी-बड़ी कंपनियां, 'ओल्ड मोंक' तक की लगा दी लंका!
भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) के अधिकारियों के कड़े फैसलों और प्रशासनिक सख्ती के किस्से अक्सर सुर्खियों में रहते हैं। इन दिनों एक बार फिर देश की बड़ी-बड़ी दिग्गज कंपनियां और शराब निर्माता ब्रांड्स किसी प्रशासनिक अधिकारी के सख्त रुख के कारण चर्चा में आ गए हैं। फूड सेफ्टी और विधिक मानकों का उल्लंघन करने वाली दिग्गज कंपनियों के खिलाफ उठाए गए कदमों ने बाजार में हड़कंप मचा दिया है, जिसमें मशहूर 'ओल्ड मोंक' (Old Monk) जैसी प्रतिष्ठित ब्रांड्स की मुश्किलें भी बढ़ गई हैं।
नियमों का उल्लंघन करने पर FSSAI का कड़ा एक्शन
सरकारी नियामक संस्थाओं और खाद्य सुरक्षा प्राधिकरण (FSSAI) द्वारा हाल ही में बाजार में बिकने वाले खाद्य और पेय पदार्थों की गुणवत्ता को लेकर एक बड़ा प्रशासनिक अभियान चलाया गया है। इस जांच के दायरे में केवल सामान्य वस्तुएं ही नहीं, बल्कि नामचीन शराब कंपनियां भी आईं। नियमों की अनदेखी और गुणवत्ता के तय मानकों पर खरे न उतरने के कारण कई लोकप्रिय ब्रांड्स के खिलाफ सख्त विधिक कार्रवाई की गई है, जिससे औद्योगिक जगत में हड़कंप मच गया है।
भ्रामक दावों और फ्लेवर पर हुई कड़ी कार्रवाई
जांच के दौरान यह बात सामने आई कि कई बड़ी कंपनियों ने अपने उत्पादों की पैकेजिंग और लेबलिंग में उपभोक्ताओं को गुमराह करने वाले भ्रामक दावों का इस्तेमाल किया था। उदाहरण के लिए, मशहूर 'ओल्ड मोंक XXX रम' के एक विशेष वेरिएंट पर "7 साल पुरानी ब्लेंडेड" होने का ऐसा दावा किया गया था जो मानकों के अनुकूल नहीं पाया गया। इसके अलावा, उत्पादों में कृत्रिम फ्लेवर और अन्य अमानक सामग्रियों के इस्तेमाल को लेकर भी नियामक प्राधिकरण ने कड़ी आपत्ति जताई है।
बाजार में मचा हड़कंप, बिक्री पर लगी रोक
FSSAI और अन्य प्रशासनिक विभागों की इस सख्त कार्रवाई के बाद ओल्ड मोंक समेत मैकडॉवेल्स नंबर 1, बैगपाइपर, एंटीक्विटी ब्लू और रॉयल चैलेंज जैसी कई मशहूर शराब के अलग-अलग वेरिएंट्स की बिक्री पर रोक लगा दी गई है। इस कार्रवाई ने साफ कर दिया है कि उपभोक्ता सुरक्षा और नियमों के मामलों में किसी भी बड़ी से बड़ी कंपनी को बख्शा नहीं जाएगा। प्रशासनिक महकमे की इस मुस्तैदी से यह संदेश गया है कि बाजार में पारदर्शिता और नियमों का पालन करना हर संस्थान के लिए अनिवार्य है।