Up Kiran, Digital Desk: दिल्ली में वायु प्रदूषण दिन-प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है, और इससे निपटने के लिए सरकार नए-नए उपायों को लागू कर रही है। हाल ही में, दिल्ली सरकार ने एक नई योजना के तहत राजधानी में क्लाउड सीडिंग यानी कृत्रिम बारिश कराने का निर्णय लिया है। दिल्ली के मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने 28 अक्टूबर को इस प्रक्रिया को लागू करने की जानकारी दी है। यह योजना प्रदूषण को नियंत्रित करने और मौसम में सुधार लाने के लिए की जा रही है।
क्या है क्लाउड सीडिंग और कैसे होती है कृत्रिम बारिश?
क्लाउड सीडिंग एक वैज्ञानिक तकनीक है, जिसके जरिए बादलों में कृत्रिम रूप से बदलाव किया जाता है। इस प्रक्रिया के दौरान विभिन्न रसायनों का इस्तेमाल कर बादलों को बारिश के लिए तैयार किया जाता है। इसके लिए सबसे पहले बादलों में नमी को बढ़ाया जाता है, और फिर उन्हें बरसने के लिए प्रेरित किया जाता है। इस प्रक्रिया का उद्देश्य वायुमंडल में मौजूद नमी को बूंदों या बर्फ के रूप में इकट्ठा करना है, जिससे बारिश होती है।
क्लाउड सीडिंग की प्रक्रिया के तीन मुख्य चरण
कृत्रिम बारिश कराने की प्रक्रिया तीन चरणों में होती है:
पहला चरण: सबसे पहले वायु के द्रव्यमान को ऊपर की ओर भेजा जाता है, ताकि बादल बन सकें। इसके लिए कैल्शियम क्लोराइड, कैल्शियम कार्बाइड, यूरिया और अन्य रसायनों का इस्तेमाल किया जाता है। ये रसायन हवा से जलवाष्प को सोख लेते हैं और बादल बनने की प्रक्रिया को तेज करते हैं।
दूसरा चरण: इस चरण में बादल के द्रव्यमान को बढ़ाने के लिए नमक, यूरिया, सूखी बर्फ और कैल्शियम क्लोराइड का इस्तेमाल किया जाता है। यह बादलों को घना बनाता है, जिससे उनमें अधिक नमी जमा होती है।
तीसरा चरण: अंत में, सिल्वर आयोडाइड या सूखी बर्फ का छिड़काव किया जाता है। यह बादलों के घनत्व को बढ़ाता है और उन्हें बर्फ के कणों में बदल देता है। इस प्रक्रिया के बाद बादल इतना भारी हो जाते हैं कि वे बारिश के रूप में गिरने लगते हैं।
क्लाउड सीडिंग का इस्तेमाल क्यों किया जा रहा है?
कृत्रिम बारिश या क्लाउड सीडिंग का इस्तेमाल विभिन्न उद्देश्यों के लिए किया जाता है। जहां एक ओर यह कृषि में सिंचाई के लिए उपयोगी होता है, वहीं इसका एक और महत्वपूर्ण उपयोग वायु प्रदूषण को कम करना है। दिल्ली में बढ़ते प्रदूषण और प्रदूषण से होने वाली स्वास्थ्य समस्याओं को देखते हुए, यह एक प्रभावी उपाय हो सकता है।


_95041788_100x75.png)
_1958220061_100x75.png)
_1693007520_100x75.png)