Up Kiran, Digital Desk: ‘बांग्लादेश कोई डेनमार्क नहीं है।’ यह वाक्य पश्चिमी देशों की उस सबसे बड़ी गलत समझ को उजागर करने के लिए काफी है जिसने हमारे पड़ोसी राष्ट्र को संकट में डाल दिया। भारत की पूर्व विदेश सचिव निरुपमा मेनन राव ने एक चौंकाने वाला विश्लेषण प्रस्तुत किया है। उनका कहना है कि पश्चिमी देशों ने बांग्लादेश को समझने में बड़ी गलती की।
उन्होंने शेख हसीना को केवल एक तानाशाह के रूप में देखा और उन्हें सत्ता से हटाने में अप्रत्यक्ष भूमिका निभाई। नतीजा यह हुआ कि आज बांग्लादेश में लोकतंत्र नहीं बल्कि कट्टरपंथियों और भीड़ का शासन है। हसीना के हटने के बाद वहां स्थिरता समाप्त हो गई और देश एक ऐसे अंधेरे कुएं में गिर गया है जहां से बाहर निकलना मुश्किल है। राव का मानना है कि पश्चिम ने अंजाने में उन इस्लामी चरमपंथी ताकतों की सहायता कर दी जो अब पूरे राष्ट्र को विनाश की ओर ले जा रही हैं।
क्या पश्चिम ने बांग्लादेश को डेनमार्क समझने में ऐतिहासिक चूक की?
निरुपमा राव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक बहुत ही गंभीर टिप्पणी की है। उन्होंने कहा कि पश्चिमी देशों को लगा कि बांग्लादेश एक उदार लोकतांत्रिक राष्ट्र है जैसा कि डेनमार्क है। उन्हें विश्वास था कि एक लंबी अवधि से सत्ता में काबिज शासक के खिलाफ अगर लोग सड़कों पर उतरेंगे तो भविष्य उज्जवल होगा। लेकिन यह उनकी सबसे बड़ी गलतफहमी थी। राव के अनुसार बांग्लादेश एक संवेदनशील और घनी आबादी वाला राष्ट्र है। इसका इतिहास हिंसक रहा है और यहां की राजनीतिक संस्कृति बहुत ही सशंकित है।
हसीना के विदेशी विरोधियों ने बांग्लादेश को बहुत ही संकीर्ण दृष्टिकोण से देखा। उन्होंने केवल चुनाव, लंबे कार्यकाल और मानवाधिकार की बातें कीं। बेशक हसीना के शासन में कुछ कमी थीं। लेकिन पश्चिम ने देश के सामाजिक और राजनीतिक नियंत्रण को अनदेखा कर दिया।
शरीफ उस्मान की मृत्यु के बाद कैसे फिर उफान पर है बांग्लादेश?
यह बयान ऐसे समय में आया है जब बांग्लादेश फिर से जल रहा है। छात्र नेता शरीफ उस्मान हादी की मौत के बाद वहां भीषण हिंसा भड़क उठी है। हादी वही व्यक्ति थे जिन्होंने पिछले वर्ष हसीना को हटाने वाले आंदोलन में अहम भूमिका निभाई थी।
उनकी मृत्यु की सूचना फैलते ही भीड़ विवेकहीन हो गई। चट्टोग्राम में भारत के असिस्टेंट हाई कमिश्नर के निवास पर हमला किया गया। पूर्व मंत्री मोहिबुल हसन चौधरी के घर में आग लगा दी गई।
भीड़ ने राजशाही में आवामी लीग के दफ्तर को तोड़ दिया। इतना ही नहीं मीडिया भी सुरक्षित नहीं है। प्रोथोम आलो और डेली स्टार जैसे अखबारों के कार्यालयों पर हमले हुए हैं। पत्रकारों को लक्ष्य बनाया जा रहा है। यह सब दर्शाता है कि अब हालात यूनुस सरकार के नियंत्रण से बाहर हो चुके हैं।




