1500 फॉर्म छपवाए, लेकिन पहुंच गए 7000 लोग... शादी के ल‍िए नेशनल हाईवे तक लग गई लाइन

1500 फॉर्म छपवाए, लेकिन पहुंच गए 7000 लोग... शादी के ल‍िए नेशनल हाईवे तक लग गई लाइन

उत्तर प्रदेश के एक जिले में आयोजित मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के दौरान एक ऐसा नजारा देखने को मिला, जिसने प्रशासनिक व्यवस्थाओं की पोल खोलकर रख दी। स्थानीय प्रशासन और समाज कल्याण विभाग ने कार्यक्रम के लिए महज 1500 आवेदन फॉर्म छपवाए थे और उसी हिसाब से मंडप व तैयारियों का खाका तैयार किया था। लेकिन जब पंजीयन की प्रक्रिया शुरू हुई, तो शादी का फॉर्म लेने और पंजीयन कराने के लिए उम्मीद से कहीं ज्यादा यानी 7000 से अधिक लोगों का हुजूम उमड़ पड़ा। आलम यह हो गया कि फॉर्म लेने के लिए लगी लोगों की लंबी-लंबी कतारें दफ्तर के बाहर निकलकर सीधे नेशनल हाईवे तक पहुंच गईं। देखते ही देखते हाईवे पर कई किलोमीटर लंबा ट्रैफिक जाम लग गया और गाड़ियों के पहिए पूरी तरह थम गए। इस अप्रत्याशित भीड़ को देखकर अधिकारियों के हाथ-पांव फूल गए और स्थिति को नियंत्रित करने के लिए आनन-फानन में पुलिस बल को मौके पर बुलाना पड़ा।

सरकारी शादी की योजना में उमड़ा जनसैलाब, हाईवे पर लगा लंबा जाम

मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के तहत गरीब और जरूरतमंद परिवारों की बेटियों का विवाह कराने के लिए जिला प्रशासन की ओर से विशेष शिविर का आयोजन किया गया था। सरकार की ओर से मिलने वाली आर्थिक सहायता, गृहस्थी का सामान और उपहारों की वजह से इस योजना को लेकर स्थानीय लोगों में जबरदस्त उत्साह देखने को मिला। सुबह तड़के से ही आसपास के ग्रामीण इलाकों और दूर-दराज के गांवों से हजारों की संख्या में अभिभावक, युवक और युवतियां केंद्र पर जुटने लगे। प्रशासनिक अधिकारियों का अनुमान था कि करीब एक से डेढ़ हजार आवेदन ही आएंगे, लेकिन जैसे-जैसे सूरज चढ़ता गया, भीड़ का आंकड़ा सात हजार को पार कर गया। कतार में लगे लोगों की धक्का-मुक्की और आगे निकलने की होड़ के कारण लाइन सड़क पर फैल गई, जिससे राष्ट्रीय राजमार्ग पर भारी वाहनों और बसों का आवागमन पूरी तरह ठप्प हो गया।

महज 1500 फॉर्म की तैयारी और 7000 दावेदारां का जमावड़ा: प्रशासनिक चूक उजागर

इस पूरी घटना ने समाज कल्याण विभाग और स्थानीय प्रशासन की जमीनी सर्वे व्यवस्था पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। विभाग ने बिना किसी सटीक सर्वे या पूर्व आकलन के केवल 1500 फॉर्म छपवाकर वितरण शुरू कर दिया था। कुछ ही घंटों के भीतर सारे फॉर्म खत्म हो गए, जिससे लाइन में खड़े बाकी हजारों लोगों का गुस्सा फूट पड़ा। लोगों का आरोप था कि वे रात से ही भूखे-प्यासे कतार में खड़े थे, लेकिन अव्यवस्था के कारण उन्हें फॉर्म तक नसीब नहीं हुआ। जब फॉर्म खत्म होने की घोषणा की गई, तो वहां मौजूद भीड़ ने हंगामा शुरू कर दिया। इस भीषण अव्यवस्था के कारण हाईवे पर एम्बुलेंस और यात्रियों की गाड़ियां भी घंटों फंसी रहीं, जिससे आम जनता को खासी परेशानियों का सामना करना पड़ा।

पुलिस बल ने संभाला मोर्चा, अतिरिक्त फॉर्म छपवाने का दिया आश्वासन

सड़क पर मची अफरा-तफरी और हाईवे जाम होने की सूचना मिलते ही जिले के वरिष्ठ पुलिस अधिकारी और भारी संख्या में पुलिस बल मौके पर पहुंचे। पुलिस ने सबसे पहले हाईवे पर खड़ी गाड़ियों को हटवाकर यातायात को सुचारू कराया और लाउडस्पीकर के जरिए भीड़ को शांत रहने की अपील की। मामले की गंभीरता को देखते हुए उपजिलाधिकारी (SDM) और समाज कल्याण अधिकारी ने मौके पर पहुंचकर मोर्चा संभाला। अधिकारियों ने स्वीकार किया कि योजना को लेकर लोगों का उत्साह उम्मीद से काफी ज्यादा था। भीड़ के गुस्से को शांत करने के लिए प्रशासन ने तुरंत अतिरिक्त फॉर्म छपवाने और ऑनलाइन आवेदन की तारीख बढ़ाने का आश्वासन दिया, जिसके बाद जाकर लोगों का गुस्सा शांत हुआ और कतारें सुव्यवस्थित हो सकीं।

मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना का बढ़ता क्रेज और योजना का गणित

राज्य सरकार द्वारा चलाई जा रही सामूहिक विवाह योजना का उद्देश्य गरीब परिवारों पर शादी-ब्याह के दौरान पड़ने वाले आर्थिक बोझ को कम करना है। इस योजना के तहत सरकार प्रति जोड़ा एक निश्चित धनराशि सीधे वधू के बैंक खाते में ट्रांसफर करती है, साथ ही कपड़े, बर्तन, गहने और गृहस्थी का जरूरी सामान भी उपहार स्वरूप देती है। इसके अलावा विवाह समारोह के आयोजन का पूरा खर्च भी शासन द्वारा ही उठाया जाता है। यही वजह है कि ग्रामीण और कस्बाई इलाकों में इस योजना को लेकर जबरदस्त मांग है। हालांकि, इतनी बड़ी संख्या में लोगों का पहुंचना यह भी दर्शाता है कि क्षेत्र में आर्थिक तंगी के कारण लोग सरकारी मदद पर काफी हद तक निर्भर हैं।

भविष्य के लिए सबक: डिजिटल रजिस्ट्रेशन और बेहतर प्रबंधन की उठी मांग

इस घटना के बाद अब प्रशासनिक गलियारों में सामूहिक विवाह योजना के क्रियान्वयन को लेकर नए सिरे से विचार शुरू हो गया है। स्थानीय समाजसेवियों और बुद्धिजीवियों का कहना है कि इतने बड़े आयोजनों के लिए केवल कागजी फॉर्म वितरण पर निर्भर रहने के बजाय ब्लॉक स्तर पर डिजिटल रजिस्ट्रेशन और ऑनलाइन स्लॉट बुकिंग की व्यवस्था की जानी चाहिए। यदि लोगों को पहले से ही समय और तिथि का स्लॉट मिल जाएगा, तो जिला मुख्यालयों पर इस तरह का हुजूम नहीं उमड़ेगा और न ही नेशनल हाईवे जैसी प्रमुख सड़कों पर जाम की स्थिति पैदा होगी। फिलहाल, प्रशासन ने छूटे हुए सभी पात्र आवेदकों के फॉर्म जमा करने के लिए विशेष काउंटर खोलने का फैसला किया है ताकि कोई भी जरूरतमंद इस योजना के लाभ से वंचित न रहे।