दिल्ली-NCR में चलती बस में नाबालिग से दरिंदगी: 43 KM के सफर में सुरक्षा की 5 बड़ी चूक, उठे गंभीर सवाल

दिल्ली-NCR में चलती बस में नाबालिग से दरिंदगी: 43 KM के सफर में सुरक्षा की 5 बड़ी चूक, उठे गंभीर सवाल

राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (Delhi-NCR) में एक चलती स्लीपर बस के भीतर 16 वर्षीय नाबालिग लड़की के साथ ड्राइवर और कंडक्टर द्वारा किए गए सामूहिक दुष्कर्म के मामले ने सार्वजनिक परिवहन और रात्रि सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोल कर रख दी है।

ग्रेटर नोएडा के परी चौक से लेकर दिल्ली के कश्मीरी गेट तक लगभग 43 किलोमीटर के सफर में हुई इस दरिंदगी ने यह स्पष्ट कर दिया है कि सड़कों पर निगरानी और जांच तंत्र किस कदर लापरवाह बना हुआ था। यदि समय रहते रूट पर चेकिंग और बस में सुरक्षा मानकों का पालन होता, तो इस जघन्य अपराध को टाला जा सकता था। पुलिस और फॉरेंसिक जांच में इस पूरे रूट और बस से जुड़ी 7 बड़ी प्रशासनिक व तकनीकी खामियां उजागर हुई हैं।

43 किलोमीटर लंबे रूट पर मिले सिर्फ दो चेकपॉइंट

जांच अधिकारियों के अनुसार, ग्रेटर नोएडा के परी चौक से कश्मीरी गेट अंतरराज्यीय बस अड्डे तक के करीब 43 किलोमीटर लंबे संवेदनशील मार्ग पर केवल दो स्थानों पर नियमित चेकपॉइंट्स मौजूद थे। इतनी लंबी दूरी तय करने के दौरान बस बिना किसी सख्त फिजिकल चेकिंग या तलाशी के आसानी से आगे बढ़ती रही, जो रात्रि गश्त की बड़ी विफलता को दर्शाता है।

मयूर विहार इंटरसेक्शन पर बैरिकेडिंग थी लेकिन पुलिस नदारद

दिल्ली-नोएडा सीमा के पास स्थित मयूर विहार इंटरसेक्शन जैसे अति-संवेदनशील और व्यस्ततम पॉइंट पर सड़क किनारे भारी बैरिकेडिंग तो की गई थी, लेकिन घटना की रात वहां एक भी पुलिसकर्मी तैनात नहीं था। निगरानी का ढांचा सड़क पर मौजूद होने के बावजूद सुरक्षाकर्मियों की अनुपस्थिति ने अपराधियों के हौसले बुलंद किए।

व्यस्ततम चौराहों से सीसीटीवी कैमरे गायब

मयूर विहार इंटरसेक्शन पर ट्रैफिक सिग्नल और आसपास के मुख्य पॉइंट पर सीसीटीवी कैमरों का न होना जांच में सामने आया है। यह वही प्रमुख रूट था, जिससे होकर आरोपी बस को लेकर दिल्ली की सीमा में निर्बाध रूप से दाखिल हुए और उन्हें किसी कैमरे की जद में आने का डर नहीं था।

बस के इन-बिल्ट सीसीटीवी कैमरे भी पड़े थे बंद

ट्रैवल कंपनी के दावों के मुताबिक, बस में लगे आंतरिक सीसीटीवी कैमरे वारदात के समय पूरी तरह बंद थे। कंपनी का तर्क है कि बस तकनीकी मरम्मत के दौर में थी, लेकिन यात्रियों की सुरक्षा के सबसे महत्वपूर्ण उपकरण का ठप होना कानूनन और सुरक्षा के लिहाज से एक अक्षम्य चूक है।

स्लीपर बर्थ और खिड़कियों पर लगे काले पर्दे बने ढाल

नियमों की अनदेखी करते हुए स्लीपर बस की खिड़कियों और बर्थ पर गहरे पर्दे लगाए गए थे। जांचकर्ताओं ने पाया कि इन पर्दों की वजह से बाहर सड़क या चेकपोस्ट से बस के भीतर की कोई भी गतिविधि दिखाई नहीं दे रही थी, जिससे आरोपियों को अपराध छिपाने का पूरा मौका मिला।

फिलहाल पुलिस पूरे रूट का डिजिटल मैप तैयार कर रही है और रास्ते के तमाम कैमरों, चौकियों और कंट्रोल रूम के डेटा का मिलान किया जा रहा है। बस को जब्त कर फॉरेंसिक टीम साक्ष्य जुटा रही है।