कोलकाता एयरपोर्ट पर दबोचा गया साइबर धोखाधड़ी का आरोपी, दुबई भागने की कोशिश नाकाम

कोलकाता एयरपोर्ट पर दबोचा गया साइबर धोखाधड़ी का आरोपी, दुबई भागने की कोशिश नाकाम

कोलकाता के नेताजी सुभाष चंद्र बोस अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर इमिग्रेशन और सुरक्षा अधिकारियों को एक बेहद बड़ी और अहम कामयाबी हाथ लगी है। देश भर में करोड़ों रुपये की साइबर धोखाधड़ी और वित्तीय ठगी के नेटवर्क से जुड़े एक शातिर आरोपी को दुबई भागने की फिराक में एयरपोर्ट से रंगे हाथों दबोच लिया गया। आरोपी के खिलाफ लुकआउट सर्कुलर (LOC) जारी किया गया था, जिसके आधार पर जैसे ही उसने अंतरराष्ट्रीय उड़ान पकड़ने के लिए इमिग्रेशन काउंटर पर अपने दस्तावेज जमा किए, जांच प्रणाली में लाल बत्ती जल उठी। सुरक्षा एजेंसियों ने बिना एक पल गंवाए त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी को हिरासत में ले लिया और आगे की कानूनी पूछताछ के लिए संबंधित पुलिस विभाग को सौंप दिया। कोलकाता एयरपोर्ट पर हुई इस त्वरित कार्रवाई से न केवल अंतरराज्यीय साइबर अपराध गिरोह का भंडाफोड़ होने की उम्मीद जागी है, बल्कि यह भी साफ हो गया है कि भारतीय सुरक्षा तंत्र अब भगोड़ों को दबोचने के लिए पूरी तरह मुस्तैद है।

दुबई भागने की बनाई थी फुलप्रूफ योजना, एयरपोर्ट पर ऐसे चढ़ा हत्थे

पकड़े गए आरोपी ने कानून की गिरफ्त से बचने और भारतीय जांच एजेंसियों को चकमा देने के लिए विदेश भागने की पूरी पटकथा तैयार कर रखी थी। उसने कोलकाता एयरपोर्ट से दुबई जाने वाली एक अंतरराष्ट्रीय फ्लाइट की टिकट बुक कराई थी और बेहद सामान्य यात्री की तरह लगेज चेकिंग और बोर्डिंग पास की प्रक्रिया पूरी की थी। उसे लग रहा था कि वह आसानी से देश की सीमा से बाहर निकल जाएगा, लेकिन जैसे ही वह इमिग्रेशन क्लियरेंस के लिए काउंटर पर पहुंचा, वहां तैनात सतर्क अधिकारियों ने उसके पासपोर्ट और क्रेडेंशियल्स की जांच की। केंद्रीय सुरक्षा डेटाबेस में उसके नाम के आगे सक्रिय 'लुकआउट नोटिस' की पुष्टि होते ही अधिकारियों के कान खड़े हो गए। सुरक्षा टीम ने आरोपी को तुरंत अलग कमरे में ले जाकर पूछताछ शुरू की और जब दस्तावेजों की गहराई से जांच हुई तो उसका असली चेहरा सामने आ गया।

देश भर में फैला साइबर ठगी का जाल, करोड़ों के घोटाले का आरोप

शुरुआती जांच और पुलिस सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, गिरफ्तार आरोपी लंबे समय से एक संगठित साइबर अपराध सिंडिकेट का संचालन कर रहा था। इस गिरोह का जाल देश के कई राज्यों में फैला हुआ था, जहां लोगों को निवेश पर मोटे रिटर्न का लालच देकर, फर्जी बैंक खाते (Mule Accounts) खोलकर और डिजिटल अरेस्ट जैसी नई तकनीकों का इस्तेमाल करके करोड़ों रुपये की चपत लगाई जा रही थी। आरोपी पर विभिन्न राज्यों के साइबर पुलिस स्टेशनों में धोखाधड़ी, वित्तीय धोखाधड़ी और जालसाजी की कई गंभीर प्राथमिकियां (FIR) दर्ज थीं। जब जांच एजेंसियों का शिकंजा आरोपी और उसके सहयोगियों पर कसने लगा, तो उसने भारत छोड़कर किसी सुरक्षित खाड़ी देश में शरण लेने की योजना बनाई ताकि अपनी बेनामी संपत्ति को वहां खपा सके और कानूनी कार्रवाई से बच सके।

इमिग्रेशन और CISF की मुस्तैदी से नाकाम हुई विदेश भागने की साजिश

कोलकाता हवाई अड्डे पर तैनात इमिग्रेशन विभाग और केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) के बीच के बेहतरीन समन्वय ने इस बड़ी सफलता को मुमकिन बनाया। एयरपोर्ट सुरक्षा अधिकारियों का कहना है कि देश के सभी प्रमुख अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डों को साइबर अपराधियों और वित्तीय भगोड़ों की सूची के साथ अपडेट रखा जाता है। जैसे ही कोई संदिग्ध व्यक्ति भारत छोड़ने का प्रयास करता है, बायोमेट्रिक और डिजिटल सिस्टम तुरंत सुरक्षा बलों को सतर्क कर देता है। इस मामले में भी इमिग्रेशन अधिकारियों की पैनी नजर और डिजिटल डेटाबेस की त्वरित प्रतिक्रिया के कारण आरोपी विमान में सवार होने से महज कुछ समय पहले धर दबोचा गया। अगर वह दुबई पहुंचने में कामयाब हो जाता तो उसे वापस भारत लाना कूटनीतिक और कानूनी रूप से काफी जटिल हो जाता।

ट्रांजिट रिमांड पर लेने की तैयारी, साइबर नेटवर्क की खुलेगी पोल

कोलकाता एयरपोर्ट पर गिरफ्तारी की सूचना तुरंत संबंधित राज्य की साइबर क्राइम पुलिस और जांच एजेंसियों को दी गई। स्थानीय पुलिस ने आरोपी को कोर्ट में पेश कर ट्रांजिट रिमांड हासिल करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है, ताकि उसे उस राज्य में ले जाया जा सके जहां उसके खिलाफ मुख्य साइबर अपराध का मामला दर्ज है। पुलिस अधिकारियों का मानना है कि इस आरोपी की गिरफ्तारी से उस पूरे अंतरराष्ट्रीय साइबर नेटवर्क की परतें खुलेंगी जो विदेश में बैठकर भारतीय नागरिकों की गाढ़ी कमाई लूट रहा है। पुलिस अब आरोपी के मोबाइल फोन, लैपटॉप, बैंक खातों के विवरण और पासपोर्ट की गहनता से तकनीकी जांच कर रही है ताकि उसके अन्य साथियों, विदेशी संपर्कों और मनी ट्रेल (पैसों के लेन-देन) का पता लगाया जा सके।

साइबर अपराधियों के खिलाफ कसता कानूनी शिकंजा और आम जनता को सीख

कोलकाता एयरपोर्ट पर हुई यह सफल गिरफ्तारी देश की सुरक्षा एजेंसियों और साइबर सेल की बढ़ती तकनीकी दक्षता को दर्शाती है। आज के समय में भारत की केंद्रीय और राज्य पुलिस एजेंसियां डिजिटल ट्रैकिंग, इमिग्रेशन अलर्ट और अंतरराष्ट्रीय समन्वय के जरिए अपराधियों के हर रास्ते को बंद कर रही हैं। इस घटना ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि अपराध करके विदेश भाग जाना अब आसान नहीं रहा। इसके साथ ही प्रशासनिक अधिकारियों ने आम जनता से भी अपील की है कि वे किसी भी अनजान वित्तीय ऑफर, शेयर बाजार के फर्जी ऐप या अनजान कॉल के झांसे में न आएं और किसी भी प्रकार की वित्तीय धोखाधड़ी होते ही तुरंत राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन नंबर पर अपनी शिकायत दर्ज कराएं ताकि समय रहते अपराधियों के खातों को फ्रीज किया जा सके।