दिल्ली के छात्रों की मौज! अब घर बैठे मिलेगी विदेश जैसी पढ़ाई, कैबिनेट ने दी इस ऐतिहासिक बिल को मंजूरी
दिल्ली के उच्च शिक्षा क्षेत्र में एक ऐतिहासिक बदलाव की शुरुआत हो चुकी है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की अध्यक्षता में हुई महत्वपूर्ण दिल्ली कैबिनेट बैठक में 'दिल्ली प्राइवेट यूनिवर्सिटी बिल' को आधिकारिक मंजूरी मिल गई है।
इस फैसले के साथ ही राजधानी दिल्ली में वर्ल्ड-क्लास निजी विश्वविद्यालयों की स्थापना का रास्ता पूरी तरह साफ हो गया है। सरकार के इस कदम से अब दिल्ली के छात्रों को उच्च शिक्षा के लिए दूसरे राज्यों या विदेशों में भटकने की जरूरत नहीं पड़ेगी, बल्कि उन्हें अपने ही शहर में देश-विदेश के स्तर की शिक्षा प्राप्त करने के शानदार अवसर मिलेंगे। कैबिनेट से हरी झंडी मिलने के बाद अब इस बिल को आगामी दिल्ली विधानसभा सत्र में पेश किया जाएगा, जहाँ से पारित होने के बाद यह कानून का रूप ले लेगा।
शिक्षा मंत्री आशीष सूद का बड़ा बयान, छात्रों का आर्थिक बोझ होगा कम
दिल्ली के शिक्षा मंत्री आशीष सूद ने इस कैबिनेट फैसले की जानकारी देते हुए बताया कि मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के नेतृत्व में यह ऐतिहासिक निर्णय लिया गया है। उन्होंने कहा कि पिछले कई सालों से दिल्ली के युवाओं को बेहतरीन उच्च शिक्षा के लिए देश के अन्य राज्यों या विदेशों का रुख करना पड़ता था, जिससे अभिभावकों और छात्रों पर भारी-भरकम आर्थिक बोझ पड़ता था।
सरकार का मुख्य उद्देश्य अब यही है कि राजधानी के छात्रों को उनके अपने गृह नगर में ही उच्च गुणवत्ता वाली शिक्षा और बेहतरीन करियर अवसर मिल सकें। शिक्षा मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि दिल्ली सरकार राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के विजन के तहत पूरी तरह काम कर रही है, इसलिए राजधानी में खुलने वाले सभी नए निजी विश्वविद्यालय भी एनईपी 2020 के सभी दिशा-निर्देशों का कड़ाई से पालन करेंगे।
दिल्ली प्राइवेट यूनिवर्सिटी बिल की मुख्य बातें और स्थापना के कड़े नियम
राजधानी में खुलने वाले निजी विश्वविद्यालयों के लिए सरकार ने बेहद पारदर्शी और सख्त नियम तय किए हैं ताकि फर्जी या सिर्फ नाममात्र के संस्थानों पर पूरी तरह लगाम लगाई जा सके। इन विश्वविद्यालयों की स्थापना से जुड़ी मुख्य बातें इस प्रकार हैं-
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स्वयं जुटानी होगी जमीन: नई प्राइवेट यूनिवर्सिटी स्थापित करने वाले संस्थानों को अपनी खुद की जमीन खरीदनी होगी या कम से कम 30 साल की वैध लीज पर लेनी होगी। सरकार इसके लिए किसी भी तरह की जमीन उपलब्ध नहीं कराएगी।
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अत्याधुनिक बुनियादी ढांचा: परिसरों में उच्च स्तर के शैक्षणिक भवन, आधुनिक प्रयोगशालाएं, समृद्ध पुस्तकालय, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और छात्रों के विकास के लिए जरूरी सभी संसाधन होने अनिवार्य होंगे।
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मानकों का पालन: यूजीसी (UGC), एआईसीटीई (AICTE), एनएमसी (NMC), बीसीआई (BCI), एनसीटीई (NCTE) और अन्य राष्ट्रीय नियामक संस्थानों के सभी नियमों का पूर्ण पालन करना होगा। हालांकि, ये निजी विश्वविद्यालय किसी अन्य कॉलेज को अपने साथ संबद्ध (एफिलिएट) नहीं कर सकेंगे।
दिल्ली के छात्रों के लिए 25% आरक्षण और फीस पर कड़ी सरकारी निगरानी
इस नए बिल की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह स्थानीय युवाओं के हितों की पूरी रक्षा करता है। दिल्ली में स्थापित होने वाले प्रत्येक निजी विश्वविद्यालय के हर कोर्स में कम से कम 25 प्रतिशत सीटें दिल्ली के मूल छात्रों के लिए पूरी तरह आरक्षित रहेंगी। इन सीटों पर दाखिला दिल्ली सरकार की मौजूदा आरक्षण नीति के तहत ही किया जाएगा। इसके अलावा, छात्रों और अभिभावकों को अत्यधिक फीस के बोझ से बचाने के लिए सरकार ने फीस नियंत्रण की पुख्ता व्यवस्था की है। इसके लिए एक विशेष रेगुलेटरी कमेटी का गठन किया जाएगा, जो विश्वविद्यालयों द्वारा ली जाने वाली फीस के मामलों की लगातार समीक्षा और निगरानी करेगी।