ED का नया मिशन: 8 महीने में सजा और 10 हाई-प्रोफाइल केस पर एक्शन, राहुल-सोनिया से लेकर लालू-केजरीवाल तक रडार पर
प्रवर्तन निदेशालय (ED) प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के तहत दर्ज मामलों को अंजाम तक पहुंचाने और मुकदमों में तेजी से सजा दिलाने के लिए अब पूरी तरह आक्रामक रणनीति पर काम कर रहा है।
जांच एजेंसी पर अक्सर लगने वाले केस लटकाने और राजनीतिक दबाव के आरोपों के बीच ईडी डायरेक्टर राहुल नवीन ने अपने सभी जोनल अधिकारियों को सख्त दिशा-निर्देश जारी किए हैं। नए फरमान के तहत हर जोन को कम से कम 10 ऐसे हाई-प्रोफाइल मामलों की पहचान करनी होगी, जिनकी कानूनी घेराबंदी इतनी पुख्ता हो कि अगले 6 से 8 महीनों के भीतर आरोपियों को अदालत से सजा दिलाई जा सके।
बेंगलुरु सम्मेलन में बनी रणनीति: 18 महीने में जांच खत्म करने का लक्ष्य
आईआईएम बेंगलुरु में आयोजित ईडी जोनल अफसरों के 36वें त्रैमासिक सम्मेलन में एजेंसी की कार्यशैली, जांच की प्राथमिकताओं और सजा दिलाने की नई रूपरेखा की समीक्षा की गई। इस उच्चस्तरीय बैठक का मुख्य केंद्र बिंदु मुकदमों के ट्रायल में तेजी लाना था।
ईडी डायरेक्टर राहुल नवीन ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि ट्रायल शुरू होने से पहले ही सबूत और गवाहों की तैयारी इतनी मजबूत रखी जाए कि बड़े वकील अदालती प्रक्रिया को बेवजह लंबा न खींच सकें। जो मामले पिछले 6 महीने से अदालत के संज्ञान का इंतजार कर रहे हैं, उनकी हर महीने समीक्षा होगी, जबकि 10 साल से अधिक पुराने लंबित मामलों की विशेष निगरानी की जाएगी। इसके अलावा, जो जांच पहले 4 से 5 साल तक खिंच जाती थी, उसे अब हर हाल में करीब 18 महीने यानी डेढ़ साल के भीतर समेटने की समयसीमा तय की गई है।
एआई के इस्तेमाल पर सख्त पाबंदी: डेटा लीक से बचने के कड़े निर्देश
मनी लॉन्ड्रिंग और वित्तीय धोखाधड़ी से जुड़े हाई-प्रोफाइल मामलों की अत्यधिक संवेदनशीलता को देखते हुए ईडी प्रमुख ने जांच अधिकारियों को ऑनलाइन या ऑफलाइन किसी भी प्रकार के आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) टूल के इस्तेमाल को लेकर कड़ा अलर्ट जारी किया है। एजेंसी का मानना है कि एआई टूल्स के इस्तेमाल से जांच से जुड़े बेहद गोपनीय कानूनी दस्तावेज, चार्जशीट के अंश या वित्तीय साक्ष्य लीक हो सकते हैं। इसलिए अफसरों को निर्देश दिया गया है कि वे केस डायरी और संवेदनशील जानकारियों को पूरी तरह सुरक्षित रखें और पारंपरिक सुरक्षित तरीकों से ही दस्तावेजीकरण का काम पूरा करें।
2029 चुनाव से पहले हलचल: कई दिग्गज राजनेताओं पर लटकी तलवार
प्रवर्तन निदेशालय की यह सक्रियता देश के सियासी समीकरणों के लिहाज से भी काफी असरदार मानी जा रही है, क्योंकि पीएमएलए की जद में सिर्फ कॉर्पोरेट जगत के रसूखदार और भगोड़े कारोबारी ही नहीं, बल्कि कई प्रमुख विपक्षी नेता भी हैं। यदि एजेंसी तय समयसीमा के भीतर ट्रायल पूरा कराकर सजा दिलाने में सफल रहती है, तो कई सियासी घरानों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। इस रडार में नेशनल हेराल्ड मामले में कांग्रेस नेता राहुल गांधी व सोनिया गांधी, आईआरसीटीसी घोटाले में लालू प्रसाद यादव, राबड़ी देवी व तेजस्वी यादव, रांची जमीन घोटाले में हेमंत सोरेन, दिल्ली शराब नीति मामले में अरविंद केजरीवाल तथा आईएनएक्स मीडिया व एयरसेल-मैक्सिस केस में पी. चिदंबरम और उनके बेटे कार्ति चिदंबरम जैसे बड़े नाम शामिल हैं।
ईडी का ऐतिहासिक विस्तार: 60 फीसदी बढ़ेंगे पद, खुलेंगे नए जोनल ऑफिस
जांच और अदालती प्रक्रिया को रफ्तार देने के लिए केंद्र सरकार ने एजेंसी के बुनियादी ढांचे को भी बड़ा विस्तार देने की मंजूरी दे दी है। इसके तहत 1 जनवरी 2027 से ईडी के कार्यबल में 60 फीसदी की भारी बढ़ोतरी देखने को मिलेगी, जहां स्वीकृत पदों की संख्या 2,029 से बढ़ाकर 3,256 की जा रही है। एजेंसी के कामकाज को विकेंद्रीकृत करने के लिए पीएमएलए जोनों की संख्या बढ़ाकर 50 की जाएगी, जबकि 5 विशेष जोन विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (फेमा) के लिए समर्पित रहेंगे। इसके साथ ही जमीनी स्तर पर जांच को धार देने के लिए फंक्शनल यूनिट्स की संख्या भी 131 से सीधे बढ़ाकर 241 की जा रही है।