दोबारा आंदोलन का खौफ! जानिए क्यों असम और बिहार सरकार को वापस लेने पड़े NEET छात्रों पर दर्ज मुकदमे
देशभर में नीट-यूजी (NEET-UG) परीक्षा की अनियमितताओं और पेपर लीक के खिलाफ छात्रों का गुस्सा किसी से छिपा नहीं है। हाल ही में इन प्रदर्शनों के दौरान कई राज्यों में पुलिस कार्रवाई का सामना करना पड़ा और छात्रों पर मुकदमे दर्ज किए गए। लेकिन अब एक बार फिर से भड़कने वाले राष्ट्रव्यापी छात्र आंदोलन के डर और बढ़ते राजनीतिक दबाव के चलते असम और बिहार की सरकारों को अपने कदम पीछे खींचने पड़े हैं। दोनों राज्यों की सरकारों ने प्रदर्शनकारी छात्रों पर दर्ज सभी एफआईआर (FIR) और आपराधिक मामलों को वापस लेने का आधिकारिक ऐलान कर दिया है, जिससे हजारों युवाओं को बड़ी राहत मिली है।
बिहार और असम सरकार का बड़ा कदम, सभी मुकदमे होंगे खत्म
नीट विरोध प्रदर्शनों के दौरान प्रशासन द्वारा की गई कड़ी कार्रवाई के बाद से ही छात्रों और विभिन्न संगठनों में भारी नाराजगी थी। स्थिति की गंभीरता को भांपते हुए सबसे पहले बिहार सरकार ने बड़ा कदम उठाया और 26 जुलाई 2026 की शाम 6 बजे तक आंदोलन के सिलसिले में दर्ज सभी प्राथमिकियों और कानूनी कार्रवाइयों को वापस लेने का निर्देश जारी किया। इसके तुरंत बाद असम सरकार के गृह एवं राजनीतिक विभाग ने भी एक आधिकारिक अधिसूचना जारी कर राज्य में दर्ज सभी मामलों और गिरफ्तारियों को वापस लेने का ऐलान कर दिया। प्रशासन ने साफ कर दिया है कि इन मामलों में अब कोई भी प्रतिकूल कानूनी कार्रवाई नहीं की जाएगी और मामलों को पूरी तरह बंद माना जाएगा।
दोबारा आंदोलन की चेतावनी और बैठकों का दौर बना टर्निंग पॉइंट
इस बड़े फैसले के पीछे मुख्य वजह छात्र संगठनों और विभिन्न मंचों द्वारा लगातार दी जा रही दोबारा उग्र आंदोलन की चेतावनी रही। सूत्रों के मुताबिक, प्रशासन और प्रतिनिधियों के बीच लंबी चली उच्चस्तरीय बैठकों के बाद सरकार को यह अहसास हो गया कि यदि मामलों को वापस नहीं लिया गया, तो देश में एक बार फिर युवा आक्रोश सड़कों पर उतर सकता है। आंदोलन और प्रदर्शनों के दौरान बड़े पैमाने पर हुई गिरफ्तारियों ने सरकार की मुश्किलें बढ़ा दी थीं, जिसके बाद डैमेज कंट्रोल के तहत यह नीतिगत फैसला लिया गया।
जेल में बंद छात्रों की होगी जल्द रिहाई, आगे नहीं होगी कोई कार्रवाई
असम और बिहार दोनों ही राज्यों की सरकारों ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि इन मुकदमों के तहत जिन भी छात्रों या युवाओं को हिरासत में लिया गया था या गिरफ्तार किया गया था, उनकी फाइलों की समीक्षा करके उन्हें तेजी से रिहा किया जाएगा। सरकार के इन आदेशों के बाद अब पुलिस थानों और अदालतों में चल रही कानूनी प्रक्रियाओं को समाप्त करने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। इस फैसले से न केवल उन छात्रों को राहत मिली है जो अपनी पढ़ाई और करियर को लेकर भविष्य को लेकर आशंकित थे, बल्कि यह सरकार की ओर से तनाव को कम करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।