ओडिशा में बाढ़ का कहर: 5 लाख से अधिक जिंदगियां संकट में, 3 की मौत
ओडिशा में कुदरत का कहर थमने का नाम नहीं ले रहा है। लगातार हो रही मूसलाधार बारिश और नदियों के उफान से राज्य के कई हिस्सों में बाढ़ की स्थिति बेहद गंभीर हो चुकी है। अब तक दमकलकर्मी समेत कम से कम तीन लोगों की जान जा चुकी है, जबकि 5 लाख से ज्यादा लोग इस त्रासदी से सीधे प्रभावित हुए हैं। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में मौजूद मुख्यमंत्री मोहन चरण मांझी स्थिति पर पल-पल की नजर बनाए हुए हैं। उन्होंने हालात की संवेदनशीलता को देखते हुए तुरंत अपने तीन प्रमुख मंत्रियों—सूर्यबंशी सूरज, गणेश राम सिंह खुंटिया और केसी मोहपात्रा—को ज़मीनी स्तर पर राहत व बचाव कार्यों की कमान संभालने का निर्देश दिया है।
1,000 से अधिक घर तबाह, 1.88 लाख लोग सुरक्षित ठिकानों पर स्थानांतरित
बाढ़ के उग्र रूप ने तटीय और उत्तरी ओडिशा में भारी तबाही मचाई है। बालेश्वर, भद्रक, जाजपुर, मयूरभंज और क्योंझर जिलों में अब तक 1,000 से अधिक घर पूरी तरह या आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त हो चुके हैं। राज्य सरकार की तत्परता से बुधवार शाम तक लगभग 1,88,002 लोगों को जलभराव वाले इलाकों से निकालकर 396 राहत शिविरों में पहुँचाया गया है। इससे पहले ही उत्तरी ओडिशा में राहत एवं बचाव अभियान का नेतृत्व करने के लिए तीन वरिष्ठ आईएएस अधिकारियों को विशेष रूप से तैनात किया गया था, ताकि किसी भी आपात स्थिति से त्वरित तरीके से निपटा जा सके।
छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश में भारी बारिश से महानदी में मध्यम बाढ़ का खतरा
उत्तरी जिलों में जारी तबाही के बीच अब ओडिशा के मध्य और निचले इलाकों पर नया खतरा मंडराने लगा है। पड़ोसी राज्य छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश के ऊपरी जलग्रहण क्षेत्रों (Upper Catchment Areas) में हुई भीषण बारिश के कारण महानदी नदी प्रणाली का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है। जल संसाधन विभाग के इंजीनियर-इन-चीफ दिलीप कुमार राउत ने स्थिति की जानकारी देते हुए बताया कि ऊपरी इलाकों से आ रहे भारी पानी के कारण महानदी बेसिन में मध्यम दर्जे की बाढ़ आने का बड़ा जोखिम बन गया है। हीराकुड जलाशय का जलस्तर बुधवार शाम 6 बजे तक 617.91 फीट दर्ज किया गया, जबकि इसकी कुल भंडारण क्षमता 630 फीट है। प्रशासन लगातार बैराज और बांध के जलस्तर की निगरानी कर रहा है।
इन जिलों पर पड़ी है कुदरत की सबसे बुरी मार
ओडिशा आपदा प्रबंधन विभाग के अनुसार, राज्य के लगभग 15 जिले इस आपदा की चपेट में हैं। इनमें से छह जिले—बालासोर, भद्रक, जाजपुर, मयूरभंज, संबलपुर और ढेंकनाल—सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं। इसके अलावा कम दबाव (Low Pressure) के कारण हुई मूसलाधार बारिश से क्योंझर, सुंदरगढ़, झारसुगुड़ा, बरगढ़, नुआपड़ा, कालाहांडी, रायगढ़ा, गजपति और मलकानगिरी जैसे जिलों में भी निचले इलाके पूरी तरह जलमग्न हो चुके हैं और जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है।