दिल्ली में भरभराकर गिरी 4 मंजिला इमारत, मलबे से 7 लोगों को निकाला गया; राहत कार्य जारी

दिल्ली में भरभराकर गिरी 4 मंजिला इमारत, मलबे से 7 लोगों को निकाला गया; राहत कार्य जारी

राजधानी दिल्ली के सीमापुरी इलाके में एक दर्दनाक हादसा सामने आया है, जहां एक चार मंजिला रिहायशी व व्यावसायिक इमारत अचानक भरभराकर गिर गई। हादसे के बाद पूरे इलाके में चीख-पुकार मच गई और आसपास अफरा-तफरी का माहौल बन गया।

मलबे में कई लोगों के फंसे होने की आशंका के बीच दिल्ली पुलिस, फायर ब्रिगेड और आपदा प्रबंधन की टीमों ने तुरंत मोर्चा संभाला। राहत और बचाव दल ने त्वरित कार्रवाई करते हुए अब तक 7 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया है, जबकि बाकी फंसे लोगों की तलाश के लिए मलबा हटाने का काम युद्धस्तर पर जारी है।

दमकल विभाग के कंट्रोल रूम को दोपहर 3 बजकर 15 मिनट पर इमारत ढहने की सूचना मिली थी। कॉल मिलते ही दमकल की कई गाड़ियां और स्थानीय पुलिस बल मौके पर पहुंचे और फौरन रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया। स्थानीय सूत्रों के मुताबिक, यह मकान महज 25 गज के बेहद संकरे भूखंड पर खड़ा था। जमीनी तल पर दुकानें चल रही थीं और उसके ऊपर चार मंजिलें तान दी गई थीं। इतने छोटे दायरे में बनी बहुमंजिला संरचना के अचानक गिरने से आसपास के मकानों को भी खतरे की आशंका पैदा हो गई है।

दिल्ली में कमजोर और अवैध निर्माणों के ढहने का यह कोई पहला मामला नहीं है। इससे पहले साउथ कैंपस के पास घने बसे सत्य निकेतन इलाके में पांच मंजिला इमारत गिरने से 7 लोगों की जान चली गई थी, जिसमें ज्यादातर छात्र प्रभावित हुए थे। 30 मई को दक्षिणी दिल्ली के साकेत में कोचिंग सेंटर और दफ्तरों से भरी एक बहुमंजिला इमारत गिर गई थी, जिसमें 6 लोगों की मौत हुई थी। इसके अलावा 8 जुलाई को भारी बारिश के दौरान रोहिणी सेक्टर-16 में निर्माणाधीन चार मंजिला इमारत ढहने से 3 लोगों ने दम तोड़ दिया था। वहीं 2 जून को मुकुंदपुर में सिलेंडर धमाके के बाद अवैध फैक्ट्री गिरी जिसमें 11 मजदूर घायल हुए, और उसके अगले दिन करावल नगर में भी चार मंजिला मकान गिर गया था।

सत्य निकेतन हादसे के बाद दिल्ली हाई कोर्ट ने एमसीडी और दिल्ली सरकार के प्रति कड़ा रुख अपनाते हुए स्पष्ट कहा था कि एजेंसियां अपनी जिम्मेदारी से पल्ला नहीं झाड़ सकतीं। प्रशासन ने उस समय राष्ट्रीय राजधानी की जर्जर और खतरनाक इमारतों को चिन्हित कर सख्त कार्रवाई का दावा किया था, लेकिन शहर भर में ऐसी पुरानी और अवैध संरचनाओं की विशाल तादाद के चलते जमीनी स्तर पर निगरानी अब भी एक गंभीर चुनौती बनी हुई है।