चार मंजिला जर्जर बिल्डिंग जमींदोज, 8 की दर्दनाक मौत, रेस्क्यू ऑपरेशन जारी
महाराष्ट्र के भिवंडी इलाके से एक बेहद दर्दनाक खबर सामने आई है। नरपोली के भंडारी कंपाउंड में स्थित एक चार मंजिला 'कोहिनूर बिल्डिंग' अचानक ढह गई। इस भयानक हादसे में अब तक कम से कम 8 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है।
घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस, फायर ब्रिगेड और राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF) की टीमें तुरंत मौके पर पहुंच गईं। फिलहाल युद्धस्तर पर रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया जा रहा है। प्रारंभिक रिपोर्ट्स के मुताबिक, मलबे के नीचे अभी भी 8 से 10 लोगों के फंसे होने की आशंका जताई जा रही है।
जर्जर घोषित हो चुकी थी 'कोहिनूर बिल्डिंग'
इस पूरी घटना में सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि यह हादसा टाला जा सकता था। भिवंडी पश्चिम के विधायक महेश चौगुले ने जानकारी दी कि भिवंडी नगर निगम ने पहले ही इस कोहिनूर बिल्डिंग का सर्वे कर इसे 'सी श्रेणी' (अत्यंत खतरनाक और जर्जर) घोषित कर दिया था।
प्रशासन द्वारा इसे खाली करने का आदेश भी दे दिया गया था और अधिकांश परिवार यह इमारत छोड़कर जा भी चुके थे। स्थानीय प्रशासन ने घटनास्थल के चारों ओर सुरक्षा घेरा बना लिया है और जनता से अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील की है।
नियमों की अनदेखी बनी मौत की वजह? उठे गंभीर सवाल
यह हादसा स्थानीय प्रशासन और इमारत मालिकों की घोर लापरवाही की ओर इशारा कर रहा है। जब इमारत को खतरनाक घोषित कर पूरी तरह से खाली करा लिया गया था, तो वहां मजदूरों को काम करने की अनुमति किसने दी? जानकारी के मुताबिक, इमारत खाली होने के बावजूद भूतल (ग्राउंड फ्लोर) पर एक परिवार मरम्मत का काम करवा रहा था। प्रशासन द्वारा चार आधिकारिक सुरक्षा नोटिस जारी किए जाने के बावजूद वहां काम चालू था। इसी दौरान इमारत का एक हिस्सा भरभरा कर गिर गया और वहां काम कर रहे 6 से 7 मजदूर और परिवार के लोग मलबे में दब गए। परिसर को सुरक्षित रखने की जिम्मेदारी किसकी थी, इसे लेकर अब गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।