महाराष्ट्र के भिवंडी में भीषण हादसा: आधी रात को जमींदोज हुई 4 मंजिला इमारत, 9 लोगों की दर्दनाक मौत, मलबे में रेस्क्यू ऑपरेशन जारी

महाराष्ट्र के भिवंडी में भीषण हादसा: आधी रात को जमींदोज हुई 4 मंजिला इमारत, 9 लोगों की दर्दनाक मौत, मलबे में रेस्क्यू ऑपरेशन जारी

महाराष्ट्र के ठाणे जिले के भिवंडी इलाके से एक बेहद दुखद और दिल दहला देने वाली खबर सामने आ रही है। यहां आधी रात को एक जर्जर 4 मंजिला रिहायशी इमारत अचानक ताश के पत्तों की तरह भरभराकर ढह गई। इस भीषण हादसे में अब तक 9 लोगों की मलबे में दबने से दर्दनाक मौत हो चुकी है, जबकि कई अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हो गए हैं। आधी रात को जब यह हादसा हुआ, उस वक्त इमारत में रहने वाले अधिकांश लोग गहरी नींद में सो रहे थे, जिसके कारण उन्हें संभलने का मौका तक नहीं मिला। मलबे के नीचे अभी भी कई लोगों के दबे होने की आशंका है, जिन्हें निकालने के लिए युद्ध स्तर पर राहत कार्य चलाया जा रहा है।

आधी रात को मलबे के ढेर में तब्दील हुई इमारत, चीख-पुकार से दहला इलाका

स्थानीय प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, यह भीषण हादसा रात के करीब 12 से 1 बजे के बीच हुआ। अचानक एक जोरदार धमाके जैसी आवाज हुई और देखते ही देखते पूरी 4 मंजिला इमारत मलबे के ढेर में तब्दील हो गई। इमारत के गिरते ही पूरे इलाके में धूल का गुबार छा गया और चारों तरफ चीख-पुकार मच गई। आसपास के लोग तुरंत मदद के लिए दौड़े और मलबे में फंसे लोगों को निकालने की कोशिश शुरू की। घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस, दमकल विभाग (Fire Brigade) और ठाणे आपदा प्रतिक्रिया बल (TDRF) की टीमें भारी लाव-लश्कर और क्रेन के साथ मौके पर पहुंच गईं।

NDRF की टीम ने संभाला मोर्चा, गैस कटर और खोजी कुत्तों की ली जा रही मदद

हादसे की गंभीरता को देखते हुए राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) की टीम को भी तुरंत रेस्क्यू ऑपरेशन के लिए बुलाया गया। NDRF के जवानों ने मलबे को हटाने और जिंदगी की सांसें तलाशने के लिए मोर्चा संभाल लिया है। मलबे के नीचे दबे लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए अत्याधुनिक उपकरणों, कंक्रीट कटर और लाइफ डिटेक्टर सिस्टम का इस्तेमाल किया जा रहा है। इसके साथ ही खोजी कुत्तों (Sniffer Dogs) की भी मदद ली जा रही है ताकि मलबे में फंसे लोगों की सटीक लोकेशन का पता लगाया जा सके। घायलों को इलाज के लिए तुरंत पास के आईजीएम (IGM) अस्पताल और ठाणे के सिविल अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

जर्जर घोषित थी इमारत, प्रशासन की लापरवाही या मकान मालिक की मनमानी?

लोकल अथॉरिटी और प्रशासनिक सूत्रों से मिली प्राथमिक जानकारी के अनुसार, ढही हुई यह 4 मंजिला इमारत काफी पुरानी थी और इसे स्थानीय नगर निगम द्वारा पहले ही 'अति खतरनाक' और जर्जर (Dilapidated Building) घोषित किया जा चुका था। स्थानीय प्रशासन का दावा है कि इमारत को खाली करने के लिए पहले भी नोटिस जारी किए गए थे। हालांकि, इसके बावजूद कई परिवार आर्थिक तंगी या वैकल्पिक व्यवस्था न होने के कारण इसी खतरनाक ढांचे में रहने को मजबूर थे। इस हादसे ने एक बार फिर मानसून और बारिश के सीजन में जर्जर इमारतों के ऑडिट और प्रशासनिक लापरवाही पर बड़े गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मुख्यमंत्री और जिला प्रशासन ने मृतकों के परिजनों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की है और मामले की उच्च स्तरीय जांच के आदेश दे दिए हैं।

 

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