'हादसे के वक्त मैं सो रहा था': मर्सिडीज हिट एंड रन केस में बोले आरोपी जज; पुलिस पर भड़का हाईकोर्ट

'हादसे के वक्त मैं सो रहा था': मर्सिडीज हिट एंड रन केस में बोले आरोपी जज; पुलिस पर भड़का हाईकोर्ट

राजधानी के बेहद पॉश इलाके में हुए सनसनीखेज मर्सिडीज हिट एंड रन हादसे ने न्याय व्यवस्था और पुलिस प्रशासन की कार्यशैली पर गहरे सवाल खड़े कर दिए हैं। तेज रफ्तार मर्सिडीज कार से मासूमों को रौंदने के इस खौफनाक मामले में जब आरोपी जज से पूछताछ की गई, तो उन्होंने बेहद गैर-जिम्मेदाराना जवाब देते हुए कहा—"हादसे के वक्त मैं गाड़ी की पिछली सीट पर सो रहा था और मुझे नहीं पता कि दुर्घटना कैसे हुई।" आरोपी के इस बयान और पुलिस की ढुलमुल जांच प्रक्रिया पर उच्च न्यायालय (High Court) ने सख्त रुख अपनाते हुए पुलिस विभाग को जमकर फटकार लगाई है। हाईकोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि कानून की नजर में सब बराबर हैं, चाहे आरोपी कोई आम नागरिक हो या फिर न्याय की कुर्सी पर बैठा कोई जज। अदालत ने मामले की लीपापोती करने की कोशिशों पर पुलिस अधिकारियों को आड़े हाथों लेते हुए पूरी घटना की निष्पक्ष और समयबद्ध जांच रिपोर्ट पेश करने के कड़े निर्देश जारी किए हैं।

देर रात का खौफनाक हादसा: तेज रफ्तार मर्सिडीज ने बेकसूरों को रौंदा

यह दिल नहला देने वाला हादसा देर रात उस वक्त हुआ जब सड़कें सुनसान थीं और लोग अपने घरों या फुटपाथों पर सो रहे थे। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, एक अत्यधिक तेज रफ्तार काली मर्सिडीज कार अनियंत्रित होकर डिवाइडर को पार करते हुए किनारे पर खड़े लोगों और वाहनों को रौंदती हुई निकल गई। टक्कर इतनी भीषण थी कि मर्सिडीज का अगला हिस्सा पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गया और दूर-दूर तक चीख-पुकार मच गई। हादसे में कई लोग गंभीर रूप से घायल हो गए, जिन्हें स्थानीय निवासियों की मदद से तुरंत नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया। प्रत्यक्षदर्शियों का आरोप है कि गाड़ी की रफ्तार बेहद तेज थी और हादसे के तुरंत बाद कार सवार लोगों ने मौके से भागने की कोशिश की, जिन्हें वहां मौजूद गश्ती दल और स्थानीय युवाओं ने घेर लिया।

'हादसे के वक्त मैं सो रहा था': आरोपी जज की दलील ने खड़े किए कई गंभीर सवाल

दुर्घटना के बाद जब गाड़ी में सवार आरोपी जज को थाने लाया गया और उनसे शुरुआती पूछताछ की गई, तो उन्होंने खुद को पूरी तरह निर्दोष बताते हुए सारा दोष ड्राइवर पर मढ़ने की कोशिश की। जज का दावा है कि वे लंबी यात्रा के कारण थके हुए थे और हादसे के समय कार की पिछली सीट पर गहरी नींद में सो रहे थे, इसलिए उन्हें इस बात की कोई जानकारी नहीं है कि गाड़ी कौन चला रहा था और दुर्घटना कैसे हुई। हालांकि, प्रत्यक्षदर्शियों और मौके पर मौजूद चश्मदीदों के बयानों में जज के इस दावे का विरोधाभास देखने को मिल रहा है। लोगों का आरोप है कि ड्राइविंग सीट से खुद जज बाहर निकले थे या फिर वे नशे की हालत में थे। पुलिस द्वारा एफआईआर दर्ज करने और अल्कोहल टेस्ट में देरी करने से आरोपी की इस दलील पर संदेह और ज्यादा गहरा गया है।

पुलिस की कछुआ चाल और ढिलाई पर भड़का हाईकोर्ट: लगा दी पुलिस की क्लास

इस हाई-प्रोफाइल मामले में स्थानीय पुलिस द्वारा बरती गई शुरुआती ढिलाई और वीआईपी ट्रीटमेंट की खबरें जैसे ही मीडिया की सुर्खियों में आईं, हाईकोर्ट ने मामले का स्वतः संज्ञान (Suo Motu) लेते हुए पुलिस प्रशासन पर कड़ा प्रहार किया। सुनवाई के दौरान उच्च न्यायालय की पीठ ने पुलिस अधिकारियों से तीखे सवाल पूछे कि घटना के तुरंत बाद आरोपी का मेडिकल टेस्ट क्यों नहीं कराया गया और सीसीटीवी फुटेज को समय रहते जब्त क्यों नहीं किया गया। अदालत ने कड़े शब्दों में कहा कि अगर रक्षक ही भक्षक बन जाएं और पुलिस पद का रसूख देखकर जांच की दिशा मोड़ना शुरू कर दे, तो आम जनता का न्याय प्रणाली से विश्वास उठ जाएगा। हाईकोर्ट ने स्पष्ट आदेश दिया है कि जांच में किसी भी तरह की सिफारिश या दबाव को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और लापरवाही बरतने वाले पुलिसकर्मियों के खिलाफ भी सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई होगी।

पीड़ित परिवारों का रो-रोकर बुरा हाल: निष्पक्ष न्याय और मुआवजे की उठाई गुहार

इस भयानक हादसे ने कई हंसते-खेलते परिवारों की खुशियां पल भर में छीन ली हैं। अस्पताल में जिंदगी और मौत की जंग लड़ रहे घायलों के परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। पीड़ितों का कहना है कि वे गरीब लोग हैं जो अपनी मेहनत-मजबूरी करके गुजर-बसर करते हैं, लेकिन रसूखदार लोगों की लापरवाही की कीमत उन्हें अपने खून से चुकानी पड़ रही है। पीड़ित परिवारों ने आरोप लगाया कि शुरुआती दौर में पुलिस उन पर मामला रफा-दफा करने और शिकायत वापस लेने का दबाव बना रही थी। हालांकि, अब हाईकोर्ट के कड़े दखल के बाद पीड़ितों के मन में निष्पक्ष न्याय की उम्मीद जगी है। उन्होंने सरकार से दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा दिलाने और घायलों का मुफ्त में बेहतर इलाज करवाने की मांग की है।

सीसीटीवी फुटेज और फॉरेंसिक जांच से खुलेगा सच का पिटारा

मामले की गंभीरता को देखते हुए अब फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (FSL) की टीमों को दुर्घटनाग्रस्त मर्सिडीज की जांच में लगा दिया गया है। एयरबैग्स के सेंसर्स, कार के डिजिटल स्टीयरिंग डेटा और घटनास्थल के आसपास लगे दर्जनों सीसीटीवी कैमरों की फुटेज की बारीकी से जांच की जा रही है। फॉरेंसिक विशेषज्ञों का कहना है कि कार के ईसीयू (ECU) डेटा से यह आसानी से पता लगाया जा सकता है कि हादसे के समय गाड़ी की सटीक रफ्तार क्या थी और ब्रेक कब लगाए गए थे। इसके अलावा, फिंगरप्रिंट्स और डीएनए नमूनों के जरिए यह भी शीशे की तरह साफ हो जाएगा कि दुर्घटना के वक्त ड्राइविंग सीट पर कौन बैठा था। पुलिस पर अब जल्द से जल्द चार्जशीट दाखिल करने का भारी दबाव है।