अचानक बीच हवा में फेल हुआ इंडिगो विमान का इंजन, गोवा से दिल्ली आ रहे सैकड़ों यात्रियों की अटकी सांसें
हवाई यात्रा को दुनिया का सबसे सुरक्षित और आरामदायक परिवहन माध्यम माना जाता है, जिसमें लोग अपनी मंजिल तक पहुंचने के लिए बेफिक्र होकर सफर करते हैं। लेकिन जब कभी हवा में उड़ते हुए विमान के साथ कोई तकनीकी खराबी आ जाती है, तो यात्रियों के पैरों तले जमीन खिसकना लाजिमी हो जाता है। हाल ही में देश की प्रमुख विमानन कंपनी इंडिगो (Indigo) की एक फ्लाइट के साथ एक ऐसा ही रूह कंपा देने वाला और दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है, जिसने हर किसी को अंदर तक हिलाकर रख दिया है। गोवा से राजधानी दिल्ली की तरफ उड़ान भरने वाली इंडिगो की एक नियमित फ्लाइट जब जमीन से करीब 14,000 फीट की ऊंचाई पर आसमान में बादलों के बीच फर्राटा भर रही थी, तभी अचानक उसके एक इंजन में गंभीर तकनीकी खराबी आ गई और वह बीच हवा में ही फेल हो गया। इस अचानक हुई दुर्घटना ने विमान में सवार सैकड़ों यात्रियों की सांसे पलभर के लिए रोक दीं और हर तरफ चीख-पुकार तथा डर का माहौल पैदा हो गया। इतनी ऊंचाई पर इस तरह का तकनीकी संकट आना किसी भी बड़े विमान हादसे का कारण बन सकता था, जिससे यात्रियों के बीच अफरा-तफरी मच गई।
14,000 फीट की ऊंचाई पर पायलटों की सूझबूझ और घबराए हुए यात्री
जब विमान हवा में होता है, तो यात्रियों के पास अपनी जान बचाने के लिए केवल पायलटों और क्रू मेंबर्स की कुशलता पर भरोसा करने के अलावा और कोई विकल्प नहीं होता। गोवा से दिल्ली आ रही इस फ्लाइट के जब 14,000 फीट की ऊंचाई पर उड़ते वक्त अचानक एक इंजन ने काम करना बंद कर दिया, तो कॉकपिट में रेड अलर्ट बज उठा। विमान का एक इंजन फेल होने के कारण संतुलन बिगड़ने लगा और वह एक तरफ झूलने लगा। केबिन के अंदर बैठे यात्रियों को जब इस गंभीर खतरे का अहसास हुआ, तो उनके चेहरों पर खौफ साफ झलकने लगा। कई लोग अपने भगवान को याद करने लगे तो कुछ परिवार एक-दूसरे को गले लगकर रोने लगे। हालांकि, केबिन क्रू ने अपनी ट्रेनिंग का परिचय देते हुए यात्रियों को शांत कराने की पूरी कोशिश की, लेकिन अंदर का माहौल बेहद तनावपूर्ण हो चुका था। हर कोई यही सोच रहा था कि क्या वे जिंदा अपने घर वापस लौट पाएंगे या यह उनका आखिरी सफर साबित होने वाला है। इस प्रकार की घटनाएं विमानन सुरक्षा पर बहुत बड़े और गंभीर सवाल खड़े करती हैं कि आखिर मेंटेनेंस के बावजूद इस तरह की तकनीकी खामियां कैसे सामने आ जाती हैं।
सुरक्षित इमरजेंसी लैंडिंग और टला एक बड़ा महाविनाश
विमान के अंदर जब मौत का यह साया मंडरा रहा था, तब कॉकपिट में बैठे अनुभवी पायलटों ने अपनी जान की परवाह किए बिना असाधारण साहस और पेशेवर सूझबूझ का परिचय दिया। उन्होंने बिना एक सेकंड गंवाए तुरंत नजदीकी एयर ट्रैफिक कंट्रोल (ATC) से संपर्क साधा और आपातकालीन स्थिति (Emergency Landing) घोषित कर दी। एक इंजन के भरोसे विमान को संभालना और उसे सुरक्षित नीचे उतारना किसी लोहे के चने चबाने से कम नहीं होता, लेकिन पायलटों ने अपनी महारत दिखाते हुए विमान का रुख तुरंत सुरक्षित हवाई अड्डे की ओर मोड़ दिया। जमीन पर मौजूद तकनीकी और आपातकालीन टीमों को भी तुरंत अलर्ट कर दिया गया। आखिरकार, भारी तनाव और सांसें रोक देने वाले उन कुछ पलों के बाद विमान को सुरक्षित रूप से रनवे पर उतार लिया गया। जैसे ही विमान के पहिये जमीन पर टिके, राहत की एक बहुत बड़ी सांस सभी ने ली। यदि पायलटों की वह त्वरित प्रतिक्रिया न होती, तो 14,000 फीट की ऊंचाई पर हुआ यह इंजन फेलियर इतिहास का एक सबसे बड़ा विमान हादसा बन सकता था।
विमानन कंपनियों के रखरखाव पर खड़े हुए गंभीर सवाल
इस बाल-बाल बचे बड़े हादसे के बाद से एक बार फिर से देश की विमानन कंपनियों और उनके मेंटेनेंस प्रोटोकॉल पर बहुत बड़े सवालिया निशान खड़े हो गए हैं। यात्रियों का कहना है कि जब वे भारी-भरकम पैसे देकर टिकट खरीदते हैं, तो उनका जीवन सुरक्षित होना एयरलाइंस की सबसे पहली जिम्मेदारी होती है। उड़ान भरने से पहले विमान के इंजनों और तकनीकी उपकरणों की गहन जांच क्यों नहीं की गई, यह एक ऐसा सवाल है जिसका जवाब पीड़ित यात्री और उनके परिजन मांग रहे हैं। नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) ने इस पूरे मामले का कड़ा संज्ञान लेते हुए इंडिगो एयरलाइन से विस्तृत रिपोर्ट तलब कर ली है और उच्च स्तरीय जांच के आदेश दे दिए हैं। जानकारों का मानना है कि इस तरह की लापरवाही भविष्य में किसी बड़े नरसंहार का सबब बन सकती है, इसलिए एयरलाइंस कंपनियों को अपने सुरक्षा मानकों में किसी भी प्रकार की कोताही बरतने से बचना चाहिए और हर उड़ान से पहले विमान की पूरी तरह से री-चेकिंग सुनिश्चित करनी चाहिए।
यात्रियों का खौफनाक अनुभव और जिंदगी का नया सबक
गोवा से दिल्ली की इस फ्लाइट में सफर करने वाले यात्रियों के लिए यह सफर जिंदगी का सबसे डरावना अनुभव बन गया है। जमीन पर सुरक्षित उतरने के बाद जब यात्रियों ने मीडिया से बात की, तो उनके चेहरे पर वह खौफ साफ दिखाई दे रहा था। उनका कहना था कि मौत को इतनी नजदीक से उन्होंने अपनी जिंदगी में कभी नहीं देखा था। यह घटना हमें यह सिखाती है कि हमारी जिंदगी कितनी अनिश्चित है और कब क्या हो जाए, कोई नहीं जानता। इंडिगो की इस उड़ान में भले ही एक बड़ा हादसा टल गया हो और सभी यात्री सुरक्षित अपने घर पहुंच गए हों, लेकिन 14,000 फीट की ऊंचाई पर बिताए गए वे डरावने पल उनके दिलों से शायद ही कभी मिट पाएंगे। यह वाकया विमानन क्षेत्र के लिए एक कड़ी चेतावनी है कि वे यात्रियों की सुरक्षा के साथ कभी समझौता न करें, क्योंकि एक छोटी सी तकनीकी चूक सैकड़ों बेकसूर इंसानों की जिंदगी को पलभर में लील सकती है।