मालदीव ने चली बड़ी चाल, भारत से की SAARC को जिंदा करने की गुहार, नई दिल्ली के इस जवाब से पाकिस्तान के उड़े होश!

मालदीव ने चली बड़ी चाल, भारत से की SAARC को जिंदा करने की गुहार, नई दिल्ली के इस जवाब से पाकिस्तान के उड़े होश!

दक्षिण एशिया की राजनीति में इस समय एक बहुत बड़ा भूचाल आ गया है। लंबे समय से ठंडे बस्ते में पड़े दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संगठन यानी सार्क (SAARC) को लेकर मालदीव की मुइज्जू सरकार ने एक नया पासा फेंका है। मालदीव ने भारत से आधिकारिक तौर पर अपील की है कि वह आगे बढ़कर सार्क को दोबारा जीवित और सक्रिय करे। मालदीव का मानना है कि क्षेत्रीय विकास के लिए इस मंच का चलना बेहद जरूरी है। लेकिन, आतंकवाद के मुद्दे पर जीरो टॉलरेंस की नीति रखने वाले भारत ने इस अपील पर जो दो टूक जवाब दिया है, उसने मालदीव की उम्मीदों पर पानी तो फेरा ही है, साथ ही सार्क समिट की आस लगाए बैठे पाकिस्तान को भी तगड़ी मिर्ची लगा दी है।

मालदीव को अचानक क्यों याद आया सार्क?

चीन की गोद में खेलने के बाद आर्थिक मोर्चे पर हिचकोले खा रहे मालदीव के सुर अब धीरे-धीरे बदलने लगे हैं। मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू ने द्विपक्षीय वार्ताओं के दौरान इस बात पर जोर दिया कि सार्क देशों के बीच व्यापार, कनेक्टिविटी और सहयोग को बढ़ाने के लिए इस संगठन को पुनर्जीवित किया जाना चाहिए। जानकारों का मानना है कि मालदीव इस समय एक बड़े आर्थिक संकट से गुजर रहा है और वह भारत की मदद के साथ-साथ खुद को एक बड़े क्षेत्रीय नेता के रूप में स्थापित करने की कोशिश में है। इसी वजह से उसने भारत के सामने सार्क का राग अलापना शुरू कर दिया है, जिसकी बैठकों पर पिछले कई सालों से पूरी तरह रोक लगी हुई है।

भारत का करारा जवाब: आतंकवाद और बातचीत एक साथ नहीं

मालदीव की इस गुहार पर भारत ने बिना किसी हिचकिचाहट के अपना रुख साफ कर दिया है। भारतीय विदेश मंत्रालय के उच्च पदस्थ सूत्रों के मुताबिक, नई दिल्ली ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक सार्क का एक सदस्य देश (पाकिस्तान) अपनी धरती से संचालित होने वाले सीमा पार आतंकवाद पर पूरी तरह लगाम नहीं लगाता, तब तक सार्क की किसी भी बैठक या प्रगति का कोई औचित्य नहीं है। भारत ने दो टूक शब्दों में कहा कि आतंक के साए में कोई बातचीत या क्षेत्रीय सहयोग संभव नहीं हो सकता। भारत का यह कड़ा संदेश सीधे तौर पर मालदीव के जरिए पाकिस्तान को एक सख्त चेतावनी है कि भारत अपने रुख से एक इंच भी पीछे हटने वाला नहीं है।

पाकिस्तान को क्यों लगी सबसे ज्यादा मिर्ची?

भारत के इस सख्त और स्पष्ट जवाब से सबसे बड़ा झटका पाकिस्तान को लगा है। दरअसल, पाकिस्तान लंबे समय से सार्क शिखर सम्मेलन की मेजबानी करने के लिए छटपटा रहा है। साल 2016 में उरी आतंकी हमले के बाद भारत ने इस्लामाबाद में होने वाले सार्क सम्मेलन का बहिष्कार कर दिया था, जिसके बाद बांग्लादेश, भूटान और अफगानिस्तान ने भी भारत का साथ देते हुए बैठक में जाने से मना कर दिया था। तब से लेकर आज तक सार्क पूरी तरह से निष्क्रिय पड़ा है। पाकिस्तान को उम्मीद थी कि मालदीव के दबाव में शायद भारत मान जाए और उसे अंतरराष्ट्रीय मंच पर अलग-थलग होने से बचने का मौका मिल जाए, लेकिन भारत के जवाब ने उसकी उम्मीदों पर एक बार फिर पानी फेर दिया है।

भारत ने सार्क का ढूंढ लिया है मजबूत विकल्प

कूटनीतिक विशेषज्ञों का कहना है कि भारत अब सार्क पर अपना समय और ऊर्जा बर्बाद नहीं करना चाहता। भारत ने सार्क के समानांतर एक बेहद सफल और मजबूत संगठन बिम्सटेक (BIMSTEC) को खड़ा कर दिया है। बिम्सटेक में पाकिस्तान शामिल नहीं है, जिसके कारण बंगाल की खाड़ी के आसपास के देशों के बीच व्यापार और सुरक्षा समझौते बिना किसी रुकावट के तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। भारत ने मालदीव और दुनिया को यह साफ कर दिया है कि वह क्षेत्रीय सहयोग के खिलाफ नहीं है, लेकिन वह किसी भी ऐसे संगठन को बढ़ावा नहीं देगा जहां आतंकवाद फैलाने वाले देश को मंच मिलता हो।

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